आईटी और आईटीज के मामले मे भी रेरा को करना चाहिए पहल : राईज

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आईटी और आईटीज का मामला भी बहुत बड़ा है जिस पर सरकार तथा तीनो प्राधिकरण की ध्यान अभी तक क्यों नही गया ? इसमे निवेश करके लाखों निवेशक ने अभी तक अपने खुन पसीने की कमाई गवाये है। बिल्डर तथा प्रमोटर्स के द्वारा दिये गये आकर्षक आफर मे फंसकर अपने जीवन भर की कमाई को लगा दिया। ऐसा आफर जिसमे बिल्डर्स तथा प्रमोटर्स के द्वारा एश्यूरेड रिटर्नस का भरोसा दिया गया। लेकिन आज तक प्रोजेक्ट लटके पड़े है तो रिटर्नस कहाँ से मिलेंगे? हमारी मांग है कि एश्युरड रिटर्न जैसी स्कीम पर प्रतिबंध लगे। क्योंकि इस स्कीम के जरिये मोटी रकम वसूले गये है यह एक धन इक्ट्ठा करने वाली चिट फंड या पोंजी स्कीम जैसी योजना है। लेकिन इस मामले मे सेबी और आरबीआई भी चुप है लेकिन क्यों ? रेरा को इस मे भी एक अच्छी पहल करनी चाहिए।

लेकिन इस मामले मे तीनो प्राधिकरण , नौकरशाही तथा सरकारे चुप है लेकिन क्यों ? 2012 से लगातार इस मुद्दे को उठाये जा रहे है और इस संबंध मे समय समय पर सभी संबंधित विभाग को जागरूक करने की कोशिश किये गये लेकिन कोई भी एक्शन नही लिये गये क्यों ?

ज्ञात हो कि आईटी और आईटीज के लिए बड़े सस्ते दर भर बिल्डर को जमीन का आवंटन किया गया है जिसकी निगरानी करने की जरूरत है। लगभग 5 एकड़ से अधिक जमीनों का आवंटन सस्ते दर पर इसलिए किया गया था ताकि सुचना प्रोद्योंगिकी जैसी कंपनी तथा काम करने वालों को सस्ते मे मिल सके। इसके द्वारा रोजगार सृजन करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन इस बात की निगरानी कौन करेगा की जो जमीन दिया गया है उसमें आईटी/आईटीज से जुड़े आफिस ही बनाया गया है।

शहर के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता श्री अनिल के गर्ग ने रेरा को इस मामले मे हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि संभवत: बिल्डरों ने आईटी/और आईटीज सेक्टरों मे बड़े खेल खेला हो। क्योंकि हमारे प्राधिकरण और ब्यूरोक्रेसी स्लीपिंग मोड है। बिल्डर अपने स्पेस को किन लोगों को बेच रहा है इस बात की निगरानी किसकी जिम्मेदारी है ? संभवत: इस स्पेस को कर्मशियल उपयोग के लिए बेचा जा रहा है जिसकी जांच की आवश्यकता है। रेरा ने अच्छी पहल किया है लेकिन उनको इस मामले मे भी हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।

यह आवश्यकता इसलिए भी है क्योंकि बुकिंग के समय पर खरीदारों के साथ कोई प्रमाणिक दस्तावेज साझा नही किये जाते है। अगर निवेशक को रेरा नंबर के साथ दस्तावेज साझा करने की परंपरा बहाल करने की जरूरत है। ग्राहकों को आकर्षक आफर देकर धन इकट्ठा करने की योजना चलायी जाती है जिसका निगरानी अगर सेबी और आरबीआई के साथ साथ रेरा भी करे तो ग्रहकों के हित मे एक अच्छा कदम होगा। जिससे ग्राहको को धोखाधड़ी से बचाया जा सकता है।

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