12 साल की उम्र हुई थी विधवा, फौजी पति की मौत के 69 साल बाद मिलेगी पेंशन, बोलीं- मुझे अब…

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14 जून 1952 को जब पारुली देवी के पति की मौत हुई तब पारुली की उम्र सिर्फ 12 साल थी. पारुली को अब पहली बार पेंशन मिलने जा रही है.

14 जून 1952 को जब पारुली देवी के पति की मौत हुई तब पारुली की उम्र सिर्फ 12 साल थी. पूर्व सैनिक पति गगन सिं14 जून 1952 को जब पारुली देवी के पति की मौत हुई तब पारुली की उम्र सिर्फ 12 साल थी.ह की दुर्घटना में मौत हुई थी. इसके बाद से पारुली ने शादी नहीं की और अपने भाई के यहाँ रहने लगीं. आश्चर्य की बात है कि पूर्व सैनिक की पत्नी होने के नाते पारुली पेंशन की हकदार थीं, लेकिन करीब सात दशकों तक वह इससे वंचित रहीं. पति की मौत को 69 साल हो गए. वह खुद 81 साल की हैं. अब उन्हें पहली बार पेंशन मिलने जा रही है. उनकी पेंशन का हिसाब 1977 से जोड़ा गया. सरकार उन्हें 1977 से अब तक की पेंशन के 20 लाख रुपयों का भुगतान करेगी.

अस्सी से ज्यादा बसंत देख चुकीं पूर्व फौजी की पत्नी के जीवन में ये दिन सामाजिक कार्यकर्ता डीएस भंडारी की वजह से आया, जिन्होंने उनकी तकलीफों को देखने के बाद उनके लिए कुछ करने का निर्णय किया. जब डीएस भंडारी को यह पता चला कि पारूली देवी के पति की मृत्यु सेवा में रहते हुए एक दुर्घटना में हुई थी और वह पारिवारिक पेंशन पाने की हकदार हैं तो उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए दिन रात एक कर दिया कि उन्हें इसका लाभ मिले.

सात वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त होने के बाद से सामाजिक सेवा में लगे भंडारी ने बताया कि 14 जून, 1952 में पति की मृत्यु के बाद से अपने भाइयों के साथ लुंथुरा गांव में रह रही पारूली देवी के बारे में जब उन्हें पता चला तो वह खुद को उनकी मदद करने से नहीं रोक पाए. उन्होंने बताया कि देवी के पति गगन सिंह की दुर्घटना में तब मृत्यु हो गई थी जब वह सेवारत थे.

भंडारी ने बताया कि पूछताछ करने पर पता चला कि पारूली देवी भारत सरकार की पूर्व सैनिक पारिवारिक पेंशन स्कीम के तहत पेंशन पाने की हकदार हैं . उन्होंने बताया कि रक्षा सेवाओं के मुख्य नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के प्रयागराज कार्यालय ने आखिरकार उनकी पेंशन सितंबर 1977 से स्वीकृत कर दी जिसके बाद पारूली देवी को कुल 20 लाख रुपए मिलेंगे .

इस बारे में संपर्क करने पर पारूली देवी ने कहा, ‘‘मुझे पैसे की जरूरत नहीं है, लेकिन सरकार ने मेरे पति और मुझे पहचान दी. यह मेरे लिए बहुत संतोष की बात है.’’

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