बिजली पर क्यो हाहाकार, जब हर घर मे हो रहा है बिजली का व्यापार

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गाँव और किसान की बात छोेड़कर अगर हम शहर की बात करे तो शहर में घर घर मे बिजली की व्यापार (गैर कानूनी) चल रहे है। बिजली कंपनी रेट बढाये या नही बढ़ाये लेकिन यहाँ पर हर साल रेट बढ़ा दिये जाते है। इस काम मे बड़े बड़े समाजसेवी भी जुड़े है।

आप अगर किसी शहर मे रहते है और किराये की मकान मे रहते है तो यह मामला आपसे जुड़ा हुआ है। चाहे दिल्ली हो या मुम्बई या फिर कलकता। सभी शहरो मे किरायेदार की हालत एक जैसी है। आप कही पर कमरा किराये पर लेने जाते है तो आपको बताया जाता है कि मकान की किराया इतना, पानी का इतना और बिजली का इतना। बिजली कंपनी 5 रुपये युनिट देता हो तो मकान मालिक आपसे इसके 8 से 12 रुपये तक वसूल करता है। आप मजबूर होकर देते है क्योंकि आपके पास और कोई भी चारा नही है और मजबूरी का फायदा उठाना हिन्दुस्तान की पूरानी आदत है।

यह मामला खुलेआम चल रहा है और सरकार के अफसर से लेकर नेता और अगर बात करे तो यह बात प्रधानमंत्री मोदी के जानकारी मे भी हो तो आश्चर्य नही है। लेकिन कोई भी इस मामले मे बोल नही सकता है। जैसा की नोएडा के एक मामले सामने है जिसमे डीएम के आदेश के बाद भी किराया मांगा गया और नही देने पर किरायेदार के साथ मारपीट किया गया। जब पुलिस ने इस पर एक्शन लिया तो सरकार मे बैठे पार्टी के लोग पुलिस के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। लाॅक डाउन और धारा 144 का उलंघन किया गया लेकिन किसी के खिलाफ कोई कारवाई नही हुई। क्योंकि यह लोग सरकार में बैठे है और जो पार्टी सत्ता मे पुलिस को अपना दास समझने लगती है।

यही मामला बिजली की है : यह नही पता कि इस प्रकार से किरायेदार से बिजली बिल अधिक लेना अपराध की श्रेणी मे आते है या नही। लेकिन अगर अपराध की श्रेणी मे आते है तो 99 प्रतिशत मकान मालिक जो किराये पर मकान दे रखे है वह इस अपराध को करते है। मकान मालिक के घर मे एसी चलते है, कुलर चलते है और उन सबका बिल किरायेदारों को भरना पड़ता है। सबसे बड़ी बात मकान मालिक किराया कानून का उलंघन करते है। कभी भी किराये की रसीद नही देते है जिससे की किराये अपना अस्थायी डाक्युमेंट बना सके। शहर के झुग्गी बस्ती मे भी जहाँ फ्री के जमीन पर लोगों ने घर बना रखे है वहाँ भी यह खेल खुब चलते है।

अगर इस प्रकार से बिजली बिल ज्यादा लेना है तो सख्त कारवाई होनी चाहिए। लेकिन करेगा कौन किसको अपनी कुर्सी से प्यार नही है। किरायेदार तो प्रदेशी है यह वोटर थोड़े ही है इसको लूटने मे क्या परहेज।

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