अब हाउस टैक्स क्यों ? पहले से ही लीज रेंट लिया जा चुका है ।

Spread the love

जनता के वाजिब सवाल, जब एक बार में ही लीज रेंट ले ली गई तो फिर दुबारा से हाउस टैक्स का प्रावधान क्यों? क्या सरकार की मंसूबा जनता से जबरन उगाही करने की है। क्या सरकार और पार्टी अपने नीचे कार्य करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को फायदा पहुँचाने के लिए नगर निगम बनाने की तैयारी करने में लगी। जिससे पूरे शासन तथा प्रशासन को राजनीतिक के दबाव मे कार्य करना पड़े।

राईज एनजीओ के द्वारा खड़े किये गये सवाल मे यह बात स्पष्ट है, कि सताधारी राजनीतिक पार्टियों के मंसूबे अच्छे नही। द राईट इनिशिएटी फाॅर सोशल एम्पावरमेंट के द्वारा 2017 में द टाइम्स आफ इंडिया मे छपे एक लेख का हवाला दिया है जिसमें सरकार से सवाल के साथ साथ कुछ सुझाव भी दिये गए थे। लेकिन सरकार इन सुझावों को दरकिनार कर जनता के द्वारा चुकाये गये रकम का बन्दर बाँट करना चाहती है।

सुझाव दिया गया है कि हमें दिल्ली MCD मुम्बई एन एम डी सी का माडल नही अपनाना चाहिए। इसके कारण पब्लिक सर्विस की हालात खराब हुई है। इसलिए इसे स्वीकार नही करना चाहिए। MCD ने शहर मे देने वाली सुविधाओं के बेहतर बनाने के बजाय और बिगाड़ कर रख दिया है। किसी भी अल्पकालिक योजना को कार्यान्वित करने की अपनी क्षमता खो दी है। यह सब राजनीतिक पार्टी के कन्ट्रोलिंग के कारण हुई है। ऐसे मे नोएडा को इस सिस्टम के हवाले करना अच्छा नही होगा।

जिला गौतमबुद्धनगर मे नगर निगम और नगर पालिका के सिस्टम को अपनाने के बजाय एक पब्लिक सर्विस कमेटी का गठन करना चाहिए। इसमें कार्य से जुड़े लोगों को जगह मिलना चाहिए ताकि कम खर्चे मे अच्छे-से-अच्छे सुविधाओं से लोगों को लाभान्वित किया जा सके। इस तरह के बेहतरीन सेवा को बहाल करने के लिए सरकार JUSCO से परामर्श ले सकती है।

ये बता दे कि JUSCO जमशेदपुर युटिलिटी सर्विस प्रोवाईडर कंपनी है जो कि टाटा की शहर जमशेदपुर मे अपनी सर्विस दे रही है। जो नागरिकों के सुविधाओं को बेहतर बनाने मे कामयाब रही है। सरकार को ऐसी कंपनियों से सलाह लेकर नोएडा मे भी ऐसी ही व्यवस्था बहाल करना चाहिए , बजाय इसके कि मुंसिपलिटी बनाया जाय और मुंसिपल कमीशनर नगर निगर और मेयर बहाल हो।

द डिवीजनल कमीशनर मेरठ आलोक सिंहा, प्रमुख सचिव सरकार उत्तर प्रदेश, श्री आलोक टंडन आईएएस, अध्यक्ष सीईओ, न्यु ओखला औधोगिक विकारस प्राधिकरण, नोएडा को लिखे पत्र मे यह सभी शिकायत और सुझाव का संग्लन किया है। इसके बजाय सरकार इन सभी सुझवों को दरकिनार कर राजनीतिक मे किये गये वायदे को पूरा कर अपने आस-पास के लोगों को फायदा पहुँचाना चाहती है। नगर निगम की व्यवस्था करना अच्छा विचार हो सकता है लेकिन इसके लिए टैक्स कौन पेय करेगा ।

उस जनता का भी ख्याल रखना चाहिए जिस पर दोहरी मार पड़ने वाली है। जमीन तो पहले ही लीज रेंट पर दिये गये इसके बाद अब इसमें नगर निगम टेक्स ( हाउस टैक्स) की व्यवस्था और लागु करना क्या जनता के हीत में है?

%d bloggers like this: