योगी के यूपी में महिला पुलिसकर्मी को क्यों करना पड़ रहा है आत्महत्या

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कहते है यह उतम प्रदेश है । यहाँ योगी का राज है। चलो राम राज न सही योगी राज तो है। रामायण के एक प्रसंग जिसमें में स्वयं भगवान श्रीराम ने कहा है कि आखिर योगी से अच्छा राजा तो कोई हो ही नही सकता है। योगी राज में महिला सशक्तिकरण की डंका तो खुब बज रही है, लेकिन जब एक महिला पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नही तो आम नागरिक और खुली सड़क की बात तो दूर रही। जो पुलिस दूसरों की सुरक्षा के लिए बनी है वह तो अपने महिला स्टाफ को भी नही छोड़ रहा है। जिस महिला पुलिस की जिम्मेदारी दूसरी महिला को सुरक्षित रखना है उसे तो अपने ही थानाध्यक्ष के कारण आत्महत्या करना पड़ा रहा है। लगता है यह सिस्टम इतने जल्दी नही बदलने वाली है। रिपेयरिंग से काम नही चलने वाली है, पूरा के पूरा सिस्टम ही बदलना होगा। क्योंकि सिस्टम आज की नही है उस जमाने की जब गलती से लड़के हो जाते थे और फिर लड़कों से गलती हो जाते थे।

मामला कासगंज उत्तर प्रदेश की है, जहाँ पर एक महिला पुलिसकर्मी आत्महत्या करने की कोशिश की है। कारण थानाध्यक्ष के उत्पीड़न। उत्पीड़न से परेशान होकर महिसा कांसटेबल नें फांसी लगाने की कोशिश की। लेकिन सही समय पर किसी ने देख लिया और जान बच गयी। महिला नें फांसी लगाने से पहले सुसाइड नोट में लिखा, जिसमें थानाध्यक्ष पर उत्पीड़न का आरोप है। यह वही पुलिस और उसके थानाध्यक्ष है जिसके भरोसे प्रदेश के योगी सरकार महिला सशक्तिकरण की डंका बजा रही है।

हम तो यही कहेंगे योगी जी कृप्या संज्ञान लिजिए कौन से थानाध्यक्ष जो योगी राज को बदनाम करने में लगा। जो अपने स्टाफ के साथ में इस तरह के हरकत कर सकता है वह पुलिस में रहने लायक है इस पर भी विचार योगी सरकार को करनी चाहिए। क्योंकि एक महिला की सुरक्षा का सवाल है। योगी राज में महिला का उत्पीड़न वो भी एक पुलिसकर्मी के द्वारा।

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