जब सच्चा प्यार होता है

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जब किसी को किसी से सच्चा प्यार होता है

आंखों ही आंखों में प्यार का इजहार होता है
तब जात-पात ऊंच-नीच कुछ नहीं दिखता ,मेरे दोस्त
बस प्यार बस प्यार बस प्यार होता है ।।
मैं पढ़ता था जिस कॉलेज में लड़कियां दीवाना कहती थी
मेरे ऊपर तो कॉलेज की हर एक हसीना मरती थी
बैठा था मैं 1 दिन यूं ही देखा मैंने एक लड़की को
वह नजर बचाकर के सबसे मुझको ही देखा करती थी
आंखों आंखों में बात हुई बातों बातों इजहार हुआ


उसी समय उस लड़की से मुझको है सच्चा प्यार हुआ
मैं जान छिड़कता उस पर वह मुझ पर जान लुटाती थी
मैं पंडित जी का बेटा था वह मौलवी साहब की बेटी थी
मिलना जुलना तब शुरू हुआ बात घर वालों को पता चली
नहीं मिलना है एक दूजे से यह सख्त हिदायत हमें मिली
फिर भी मिलते थे हम चुप चुप कॉलेज के पीछे जा जा कर
फिर घर वालों को पता चला और हम दोनों को सजा मिली
नहीं जाएगी कॉलेज पढ़ने की है उसके अब्बा की जिद थी
पंडित जी का बेटा था वह मौलवी साहब की बेटी थी


फिर शुरू हो गया धर्म युद्ध हम दोनों के परिवारों में
मेरे ही कारण नाक कटी तू तू ही रिश्तेदारों में
फिर उसी रात उस लड़की से शादी की उसके घर जाकर
अगले दिन खूब हंगामा हुआ और न्यूज़ छपी अखबारों में
धीरे-धीरे 1 साल हुआ और शांत हुए घर वाले भी
अब हमें समाज ने स्वीकारा और सुलह हुई परिवारों में
अब मैं खुश हूं मंदिर जाता घर पर नमाज वह पढ़ती है
मैं पंडित जी का बेटा हूं मौलवी साहब की बेटी है
धन्यवाद्
गौरव द्विवेदी ‘ गर्ग ‘

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