whatsap की पत्रकारिता,पत्रकार के हित मे नही।

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धीरे-धीरे पत्रकार जगत मे आर्थिक संकट गहराता चला जा रहा है। पत्रकार के लिए न सरकार कोई सहायता करने जा रही है न ही समाज। खासकर हिन्दी पत्रकारों के लिए दैनीय स्थिति है। पत्रकार से अच्छा तो एनजीओ है जो साल मे अच्छे खास फंड सरकार से ले लेती है, साथ ही जनता से भी। कुछ कार्पोरेट पत्रकार है जो ऐसा करते है तो उनकी बात तो और है।

इसका एक कारण जो सबसे बड़ा है वह है whatsap के द्वारा किया जा रहा पत्रकारिता। खासकर प्रमोशनल पत्रकारिता। एक तरह से कहे तो यही कारण है कि आज कल कोई किसी पत्रकार को बुलाने उसे इज्जत देने के बजाय किसी पत्रकार के whatsp group पर जुड़कर अपना काम चला लेता है। इसके लिए हजार पाँच सौ देकर के किसी से एक पत्रकार की आईडी भी ले लेता है , जबकि उसे पत्रकारिता से कोई लेना-देना ही नही होता है। नही पत्रकारिता के “प” को जानता है।

साथ ही पत्रकार भाई भी उस खबर को एड के चक्कर मे जल्दी से जल्दी अपने पोर्टल पर चलाने लगता है। अब जब नेता जी , सामाजसेवियों के काम ऐसे ही चल जाए तो भला पत्रकार की क्या जरुरत है। एक नही तो दूसरा सही, अगर आपने नही भी किया तो दूसरा करेगा। कुल मिलाकर पन्द्रह से बीस लोग उसे अपना खबर बना ही लेंते है।

क्या करे और क्या न करें ?

पत्रकार का सबसे पहला उद्देश्य होता है सामाजिक बुराईयों को दूर करना। अगर कोई क्राईम का समाचार है, जनता के हित की है तो जरुर छापे या जगह दे। अन्यथा ऐसी खबरों को कोई जगह नही दे जो प्रमोशनल हो । हाँ अगर आप ऐसा करते है जो किसी न किसी पत्रकार का वहाँ होने की स्थिति अवश्य जाँच ले।

अगर कोई पत्रकार आपको प्रेषित करता है और उनके द्वारा बताया गया आकड़ा सही है तो जरुर जगह दे, अन्यथा जगह न दे क्योंकि बड़े पैमाने पर खेल मे धांधली चल रहे है । आपके द्वारा किया गया फ्री के प्रमोशन से स्कूल तथा कुछ तथा कथित खेल संघ जो कि रजिस्टर्ड भी नही है मोटी कमाई कर रहे है।

कई एनजीओ के द्वारा इस प्रकार की धांधली चलाए जा रहे है। एक ही बच्चे कई जगहों पर देखे जा रहे है। इनको सिर्फ मिडिया के पेज पर जगह चाहिए जिसके लिए प्लानिंग करके बच्चों को जमा किया जाता है। स्कूल भी इसका बड़ा फायदा उठाने मे लगा है। आपके द्वारा बिना जाँच के किये जा रहे प्रमोशन से स्कूल अभिभावक के जेब ढीली करते है, लेकिन बेचारा पत्रकार तो बेचारा ही रह गया।

इसलिए पत्रकार लोग पत्रकार के हित मे काम करे। अन्यथा यह हालात और बिगड़ता जा रहा है। no whatsp no whatsp no whats कम से कम किसी न किसी पत्रकार भाई का भला तो हो। अगर हालात यही रही तो शिक्षा की हालात और बिगडेंगी। पत्रकार समाज का आईना है लेकिन पत्रकार को ही अब आईना देखने की जरुरत है।

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