प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का आखिरी इच्छा क्या है ?

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भारत सनातन धर्म के धारण करने वाले राम और कृष्ण की धरती है। भगवान राम मर्यादा के पर्याय है वही श्री कृष्ण कर्म के पर्याय है। सनातन धर्म में सिर्फ प्राणी मात्र के कल्याण ही नही अपितु समस्त प्रकृति को जननी समझकर उसके कल्याण की शिक्षा देती है। लेकिन बीते कुछ सदी में लगातार सनातन को मानने वालों के बीच में मतभेद के कारण भारत में लुटेरों ने राज किया। जिसका कारण था आपसी मतभेद। उसका सबसे बड़ा उदाहरण भगवान श्रीराम के जन्मस्थली आयोध्या रहा है। सनातन धर्म के मानने वालों के रहने के बावजूद उसके मर्यादा के मंदिर को तोड़ वहाँ पर मस्जिद बना दिया गया। ऐसा सिर्फ आयोध्या में ही नहीं अपितु काशी और मथूरा में भी हुआ है। 500 सालों के बाद भगवान राम के जन्मस्थली आयोध्या में मंदिर का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

ये सनातन धर्म और उनके पूर्वजों के दिये गुण ही है कि राममंदिर आन्दोलन को ठंढ़ा नही होने दिया और आखिर में जीत हासिल किया। विदेशी लुटेरों में न जाने कितने सभ्यताओं को नष्ट कर दिया जिसके लिए दुनिया के विभिन्न भागों में लगातार संघर्ष जारी है। एक तरफ इस्लाम तलवार के बल पर पाँव पसारने में लगा है तो दूसरी तरफ दूसरी सभ्यता इनसे अपनी सभ्यताऔर संस्कृति को बचाने के लिए नित्य ही दो दो हाथ करने में लगी ही। भारत में भी कुछ ऐसा ही है।

अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्मस्थली पर राम मंदिर का भव्य निर्माण किया जा रहा है। साल 2020 के 5 अगस्त के दिन भूमि पूजन के कार्यक्रम संपन्न किया गया। जिसमें भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। वर्षों की प्रतिक्षा खत्म हुई अब निर्माण कार्य करने की पूरी तैयारी हो चुकी है , जिसके लिए जनजागरण आंदोलन चलाये जा रहे है। रामभक्त रामभक्त के द्वार पर जाकर उनके इच्छा के अनुसार उनसे दान इकट्ठा कर रहे है। ट्रस्ट का मानना है कि मंदिर को बनाने के लिए चंदा की जरूरत नही पड़ती। इस देश में बड़े बड़े दानी है जो चाहे तो अकेले ही बनवा देती लेकिन हम लोग चाहते ही कि सभी रामभक्तों की सहभागिता हो।

दान कूपन के जरिये या फिर चेक और आनलाईन करें

इसलिए जनजागरण आन्दोलन चलाये जा रहे है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 10,100 और 1000 के कुपन जारी किया गया है। अगर कोई व्यक्ति 2100 का दान देना चाहता हो तो 2 हजार की और एक 100 की कुपन ले सकता है। इसके अलावा अगर कोई ज्यादा दान देने की इच्छा रखता हो साथ में 80G के तहत टेक्स में छुट लेना चाहता हो तो चेक या आनलाईन पैमैंट कर सकता है। संस्था में किसी भी प्रकार के बार कोड स्केनिंग की व्यवस्था नही है और नही किसी प्रकार के डिजिटल पैमेंट लिए जा रहे है। इसलिए रामभक्तों को यह जानकारी होना आवश्यक है कि किसी भी प्रकार से फर्जी लोगों के हाथ में दान न पड़े।

इसी क्रम में भारत के राष्ट्रपति नें राम मंदिर ट्रस्ट को 5 लाख का दान दिया है। जबकि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राम मंदिर आन्दोलन से जुड़े वरिष्ठ भाजपा नेता कल्याण सिंह ने 1 लाख दान दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री था तब भी और अब मुख्यमंत्री नही हूँ तब भी राम भक्त हूँ। मेरे राम भक्ति में कोई कमी नही हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर का निर्माण सिर्फ मंदिर का निर्माण नही है। यह मेरे भारत के गौरव का निर्माण है जो अब होने जा रहा है। यह मेरे राष्ट्र का मंदिर है। देश का गौरव जो छिन हो गया था वही दूबारा से लौटा आया है।

संपूर्ण हिंदू समाज में नयी चेतना जागृत हुआ है और मेरा विश्वास है कि राम का मंदिर राष्ट्र का मंदिर बनेगा जो मेरे राष्ट्र का गौरव है। मेरे देश में आत्मनिर्भरता का भावना बढता जा रहा है। लोग निराश हो गये थे उनकों विश्वास हो गया था कि कुछ होगा नही उनका विश्वास लौटा है। एक बहुत बड़ा परिवर्तन लोगों के सोच में आया है। श्री कल्याण सिंह ने कहा कि 1992 में 464 साल का ढांचा के स्थान पर नया राम मंदिर का संकल्प लिया गया जो अब पूरा होने जा रहा है। अगर वो विवादित ढांचा वहाँ पर खड़ी रहती तो शायद ही ये दिन देखने को मिलता। क्योंकि अदालत कभी भी ढांचा को गिराकर राम मंदिर निर्माण करने का फैसला नही देती। मंदिर बनते देखना मेंरा अंतिम इच्छा है। मेरे समय में पूरा हो जायेगा ऐसा हमे भरोसा है।

कल्याण सिंह (जन्म 5 जनवरी 1932) भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वे पूर्व राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे हैं। इससे पहले वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। वो दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें 26 अगस्त 2014 को राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया।[1] उन्हें राष्ट्रवादी,हिन्दुत्व वादी के रूप में जाना जाता है ।

बाबरी मस्जिद विध्वंश के बाद
वो १९९३ के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अत्रौली और कास्गंज से विधायक निर्वाचित हुये। चुनावों में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरा लेकिन मुलायमसिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी-बहुजन समाज पार्टी ने गठबन्धन सरकार बनायी। विधान सभा में कल्याण सिंह विपक्ष के नेता बने।

वो सितम्बर १९९७ से नवम्बर १९९९ तक पुनः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

२१ अक्टूबर १९९७ को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने कल्याण सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया। कल्याण सिंह पहले से ही कांग्रेस विधायक नरेश अग्रवाल के सम्पर्क में थे और उन्होंने तुरन्त शीघ्रता से नयी पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस का घटन किया और २१ विधायकों का समर्थन दिलाया।[4] इसके लिए उन्होंने नरेश अग्रवाल को ऊर्जा विभाग का कार्यभार सौंपा।

दिसम्बर १९९९ में कल्याण सिंह ने पार्टी छोड़ दी और जनवरी २००४ में पुनः भाजपा से जुड़े।[5] २००४ के आम चुनावों में उन्होंने बुलन्दशहर से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा। २००९ में उन्होंने पुनः भाजपा को छोड़ दिया और एटा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय सांसद चुने गये।

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