योगी आदित्यानाथ के मुस्कराने के क्या कारण हो सकते है ?

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कोरोना के समय मे भी सियासत अपनी चौकरी बिठाने मे लगी है। बड़ी से बड़ी मुद्दे की तलाश मे और उसे भूनाने की कोशिश मे कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी दिन-रात एक कर रही है। दुसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के सर्वदलीय बैठक के बाद योगी जी मुस्कराने लगे है। कारण हो सकता है प्रदेश के दो बड़ी पार्टियों के द्वारा इस बैठक मे शामिल नही होना।

देश के बड़ी पार्टी कांग्रेस लगातार सुर्खियों मे है और हर संभव कोशिश है कि वोट बैंक बढाया जा सके। लगातार सवाल केन्द्र सरकार पर उठा रही है। कोई कसर छोड़ने को तैयार नही। लेकिन ये बात और है कि योगी सरकार भी मंद मंद मुस्कराने मे लगी है। कारण कांग्रेस अपने ही जाल मे उलझती जा रही है, और विपक्षी गठबंधन भी उनसे दूरियाँ बनाने लगी है।

मजदूरों को घर वापस भेजने के लिए “बस पालिटिक्स” फिर राजस्थान सरकार जो कि कांग्रेस की सरकार है उ.प्र. सरकार से डीजल के भरने की और छात्रों को घर वापसी मे मदद करने के लिए भेजे गए 36 लाख की बिल ने कांग्रेस को खुद ही उलझा दिया है। उनके सहयोगी पार्टी बीएसपी और एसपी ने भी तंज कसते हुए इसे अमानवीय और कंगालीपन बता दिया। इन दोनो पार्टियों ने सोनिया गाँधी के द्वारा बुलाये गये विपक्ष की सर्वदलीय बैठक मे भी शामिल होने से इंकार कर दिया। गौरतलब है कि यह प्रदेश की मामला है और इससे वोट बैंक मे सेंध लग सकते है।

एक तरफ तुफान है तो दूसरी तरफ शांत जल अन्दर ही अन्दर एक दूसरे की धारा को काट रही है। यह सब देख योगी जी मुस्कराने लगे है। क्योंकि विपक्ष ने खुद गेंद को योगजी के पाले मे डाल दिया है। 2022 मे होने वाले चुनाव मे योगी किसी प्रकार के मुद्धा को विपक्ष के हाथ लगने से पहले ही निपटने मे लगे है।

गौरतलब है कि पूरा देश कोरोना के संकट से जुझ रहा है और इस समय मे राजनीति सिर्फ वोट बैंक के लिए किसी भी सभ्य समाज के लिए ठीक नही। दूसरी बात कि जिम्मेदारी तय है और हर बात के लिए आप केन्द्र सरकार और योगी सरकार को जिम्मेदारी नही दे सकते है। अगर दिल्ली की हालत खराब है तो उसके लिए दिल्ली सरकार, राजस्थान के लिए राजस्थान सरकार और महाराष्ट्रा के लिए महाराष्ट्रा सरकार जिम्मेदारी है। अगर हालत गुजरात, पंजाब या मध्यप्रदेश मे खराब है तो उसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है। क्योंकि राज्य के सरकारें अपने जिम्मेदारियों को निभाने मे नाकाम रही है। राजनीति इस बार पर हो रही है कि “तुम अपने गिरेबान को झाँक कर देखों हमसे ज्यादा गंदा है। कभी इस पर नही हो रही है कि मेरा गिरेबान तुमसे ज्यादा साफ है”।

विपक्ष दिल्ली पर चुप है जिसके पूरे के पूरे जिले हाॅट-स्पाट बना हुआ है। सबसे ज्यादा पलायन दिल्ली और महाराष्ट्रा से हुआ है और हो रहा है। लेकिन इस पर खामोशी और दिल्ली से हुए पलायन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराना, राजस्थान से पलायन कर युपी मे आने वाले लोगों के लिए केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहराकर विपक्ष ने खुद ही अपने लिए गड्ढे खोद लिया है।

कांग्रेस अपनी सहायता दिल्ली सरकार को दे सकती थी। तो शायद गाजियाबाद के बार्डर पर इतना भीड़ नही लगता। कांग्रेस अपनी मदद राजस्थान मे दे सकती थी तो शायद मजदूरों को पलायन करने से रोका जा सकता था। कांग्रेस अपनी मदद महाराष्ट्रा मे देता तो शायद यह स्थिति उत्पन्न ही नही होते। लेकिन बिहार मे 2020 के अंत मे आने वाली चुनाव और 2022 मे उ. प्र. की चुनाव के लिए खेला गया खेल योगी सरकार के लिए टाॅनिक का काम करेगी।

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