वतन की आवाज: वन हमारे भूमि के फेफड़े है, इसे बचाना होगा।

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बड़ी अजीब से बात है कि हर तरफ आक्सीजन की मांग है। सरकार भी कृतिम आक्सीजन बनाने पर पूरा जोर दे रही है। ताकि कोरोना संक्रमण से जुझ रहे लोगों की जान बचाया जा सके। अखबार की बड़ी बड़ी हैडलाईन में कोरोना की भयावह स्थिति और आक्सीजन को लेकर सरकारों के बीच हो रहे युद्ध मोटी मोटी अक्षरों में प्रकाशित किया है। टेलिविजन चिल्ला चिल्ला कर लोगों को बता रहे है कि आक्सीजन खत्म हो रहा है और आप सब की जान खतरे में है। आज पहली बार पता लगा है कि अब आक्सीजन भी सरकार की जिम्मेदारी है। काश किसी मिडिया की नजर वन को सुरक्षित रखने पर इतनी पैनी होती तो आज हमारे फेफड़ों को कृतिम आक्सीजन की जरूरत नही पड़ते। लेकिन अवसरवाद और विकास बाद में मनुष्य स्वयं के लिए ही घातक सिद्ध होने लगा है। कल पृथ्वी दिवस था लेकिन किसी भी अखबार या न्यूज चैनल ने इस पर तव्वजों नही दिया। क्योंकि यह एक टीआरपी का मामला नही है। खैर मनुष्य जो कर रहा है उसका परिणाम आज सामने है। अगर भविष्य में भी वन को नही बचाया गया तो इससे भी घात परिणाम हो सकते है।

पृथ्वी दिवस से पर्यावरणविद सत्येन्द्र सिंह के द्वारा अथाह में लिखे गये लेख, जिनमें कहते है, “जो अपनी मिट्टी को नष्ट करता है वह स्वयं ही नष्ट हो जाता है।”

विश्व पृथ्वी दिवस पर कहा कि एक राष्ट्र जो अपनी मिट्टी को नष्ट करता है वह एक दिन स्वयं ही नष्ट हो जाता है। वन हमारी भूमि का फेफड़े है। जो हवा को शुद्ध करते है और हमें देते है। जो हमे आक्सीजन देते है उनका भी महत्व हम आज तक नही समझ पाये है। अब तो जागो जब आज हम किसी अपने कि जान बचाने के लिए आक्सीजन की सिलेण्डर का भीख मांगते फिर रहे है। आज हम मनचाहे दाम देने को तैयार है। लेकिन बड़ी शर्मनाक है कि आज भी हम पर्यावरण के बारे में ध्यान नही दे रहे है।

एक बड़ा पेड़ औसतन प्रतिदिन 227 लीटर आक्सीजन छोड़ता है। जबकि एक आदमी को 550 लीटर आक्सीजन की जरूरत पड़ता है। अगर हम सिर्फ गाजियाबाद जिले की बात करे तो यहाँ पर 17 लाख से ज्यादा लोग रहते है। यह आन रिकार्ड है। यह संभव है कि इससे कई गुणा ज्यादा लोग होंगे। लगभग 17 लाख लोग रोज सांस लेते है। 17 लाख लोग उतनी सांस ले लेते है जितनी आक्सीजन 42 लाख 25 हजार 38 पेड़ दिन भर और रात में बना पाते है।

हमारे रसोई घर, फैक्ट्री बिजली खेती वाहन आदि में खपत होने वाली आक्सीजन की बात करें तो यह गणना करना मुश्किल हो जायेगा कि हमे नित्य कितने पेड़ चाहिए आक्सीजन बनाने के लिए। जितने पेड़ है उसकी स्थिति भी भगवान भरोसे है। उसकी भी देखभाल नही किया जा रहा है क्योंकि हमारे देश में सबकुछ सरकार ही करेगा, हम लोग तो सिर्फ सरकारी सब्सिडी लेने के लिए है। यहाँ पर जीवन रक्षा कभी भी चुनाव का मुद्दा नही बनता है। जबकि इस पृथ्वी को हम लोग मां कहते है, इसको विभिन्न तरीकों से पूजते है। खासकर आदिवासी समाज में पृथ्वी पूजन का बहुत पूराना प्रचलन है।

जब भी मौका मिले हम एक पेड़ अवश्य लगाए। जो पेड़ लगे हुए है यथासंभव उसके देखभाल करे। कुछ इसी तर्ज पर समिति बनाकर इस वर्ष भी एक पेड़ एक जिंदगी अभियान शुरु कर रही है, ताकि आप सांस ले सके। इस अभियान की शुरुआत अगले सप्ताह से की जायेगी। उत्थान समिति के चेयरमेन ने बताया कि उन्होने उत्थान समिति से जुड़ने की पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए स्कूलों के बच्चों एवं शिक्षकों से मदद मांगी है, और सभी बच्चे और शिक्षक इसमें भाग लेंगे तथा स्वयं से एक पेड़ लगायेंगे।

यह अभियान लगातार 30 अगस्त तक शहर के विभिन्न हिस्सों में चलेगा। इसलिए जब भी मौका मिले आप भी इस अभियान का हिस्सा बने। एक पेड़ जरूर लगाएँ। अपनी जन्मदिन पर , सालगिरह पर हम लोग कितना खर्च करते है। लेकिन अगर यह श्वसन तंत्र काम नहीं करेगा तो इस अवसर पर मिलने वाले आशीर्वाद निरर्थक और व्यर्थ होगा।

आज जब की हर इंसान आक्सीजन के लिए भाग रहा है तब हमें इसके प्राकृतिक महत्व को समझते हुए प्राकृतिक कारखाने अवश्य लगाने चाहिए। यह समाज आपकी है और इसकी आपकी व्यक्तिगत भागीदारी निश्चित ही होनी चाहिए। वन क्षेत्र लगातार घटते जा रहे है। जबकि प्रत्येक वर्ष कागजों में करोड़ों पेड़ लगाये जा रहे है। गिनिज बुक में नाम दर्ज करवाया जाता है। फिर वन क्षेत्र घट क्यों रहा है। यह एक बड़ा सवाल और चिंतन का विषय है ? इस पर हम सबको मिलकर सोचना होगा।

हम प्रति मिनट सांस के द्वारा औसतन आठ लीटर हवा ग्रहण करते है, जिसमें 20 प्रतिशत आक्सीजन होती है। जब हम सांस छोड़ते है तो उसमें 15 प्रतिशत आक्सीजन वापस निकलते है। इस प्रकार से हम प्रति मिनट 400 मिलीलीटर आक्सीजन सांस के माध्यम से ग्रहण करते है। जो कि 24 घंटे में 576 लीटर बनती है।

हालांकि औसतन 550 लीटर आक्सीजन प्रति व्यक्ति माना जाता है। वही एक पेड़ साल में 260 पाउंड यानि की 117.93 किलोग्राम आक्सीजन का उत्सर्जन करता है। 22.5 लीटर आक्सीजन का वजन 32 ग्राम होता है। यानिकी एक पेड़ एक साल में 82 हजार 922 लीटर आक्सीजन बनाता है। जिसको एक व्यक्ति 150 दिनों में ग्रहण कर जाता है।

एक व्यक्ति को सांस लेने के लिए दो से ज्यादा पेड़ की आवश्यकता है। इसलिए जब भी हो आप अपने हिस्से की दो पेड़ अवश्य लगाये। सिर्फ लगाना ही नही है इसकी देखभाल भी आपकी ही जिम्मेदारी होनी चाहिए और है भी। इस समाज के लिए और परिवार के लिए आपका व्यक्तिगत भागीदारी है।

आप स्वस्थ्य रहे, तन्दुरुस्त रहे। इसकी कामना के साथ मै आप से लेना हूँ विदा। फिर अगले विडियों में एक नये विषय के साथ आपके साथ उपस्थित रहूँगा। आपको अगर विडियों पसंद आया हो तो लाइक एंड सब्स्क्राईव जरूर करे। ज्यादा से ज्यादा शेयर करे। मै आपका भाई आपसे विदा लेता हूँ। जय श्री राम।

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