वतन की आवाज: फिलिस्तीन के समर्थन करने वाली इजराईल हिरोईन को पुलिस नें गोली मारी

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आज कल दुनिया भर में कोरोना के अलावा इजराईल और फिलिस्तीन में मनायी जा रही ईद और दिवाली को लेकर बहस जारी है। जहाँ एक तरफ फिलिस्तीन के द्वारा दागे जा रहे राॅकेट को ईट मुबारक बता रहे है वही इजराईल के जबाबी हमले को दिवाली की संज्ञा देने में लगे है। सुना है इस्लामिक देशों के इजाराईल के विरोध में एक निंदा प्रस्ताव पास किया है। लेकिन इजराईल को भारत नहीं है और नही मनमोहन सिंह का भारत जो सिर्फ निंदा करने के लिए था। जहाँ भारत इजराईल से कुछ सीखा है वही इजराईल के हिरोईन ने भी भारत से बहुत कुछ सीखा है। यही कारण है कि इजराईल के हिरोईन “माईसा अब्द एल्हादी” को पुलिस नें गोली मार दिया, वो भी बिना किसी एफआईआर और वारंट के।

भारत ने क्या सीखा है इजाराईल से

भारत ने इजराईल से यह सीखा है कि किस प्रकार से इजराईल शांतिदूतों को राॅकेट लांचर के बदले मिसाईल मारकर जबाब देता है। एक बार जब 6 देश एक साथ और इजराईल अकेला तब भी इजराईल नें उन सभी देशों को बूरी तरह से हराया ही नही बल्कि गाजा भी छिन लिया। सिर्फ 86 लाख के आबादी वाले इस देश नें दुनिया को दिखा दिया कि हौसला होना चाहिए। भारत भी पुलवामा हमला के बाद वही किया। पाकिस्तान के अंदर घुसकर मारा ही नही अपने एक सैनिक को छोड़ने के लिए भी अल्टिमेटम दिया। यही कारण था कि पाकिस्तान ने अभिनन्दन को छोड़ा ही नहीं महिला अतिथि सेवक के साथ विदा किया। एक बात सीखने की जरुरत है जो कि संभव ही नही असंभव भी है, वह है सभी राजनीतिक दलों को देशहित में एक साथ खड़ा होना। संभव हो सकता है जिस प्रकार से आज इजराईली पुलिस नें देश के गद्दार एक नचनिया को गोली मार दिया है उसी प्रकार से यहाँ के लिबरल औऱ वामपंथी गैंग का इलाज करना होगा। इजराईल से हमे धर्म रक्षा भी सीखना होगा।

इजराईल नें भारत से क्या सीखा है

जिस प्रकार से भारत में बात बात पर डफली गैंग सड़को पर डांस डफली बजा कर आजादी मांगने लगते है, लेकिन भारत के जालिम जिल्ले ईलाही उन्हे आजादी देने में हमेशा आनाकानी करते है। यही सोचकर आज इजराईल के एक लिबरल भी इजराईल से आजादी मांग ली। यह आजादी मांगने की शिक्षा निश्चित तौर पर भारत से सीखी होगी। लेकिन भारत सरकार के तरह इजराईल सरकार एक मिनट भी आनाकानी नही किया और तुरंत ही आजादी देते हुए जहन्नम में पहुँचा दिया। अफसोस यह रहा है कि इस्लाम में महिलाओं को 72 हूर मिलने की रवायत नही है। मेरा सभी इजराईली से विनम्र निवेदन है कि भारत के जेएनयू में पढ़े लिबरल से दूर रहे। क्योंकि यहाँ पर विपक्ष का काम यहाँ पर शांति बनाना नही है शांति भंग करना है, लेकिन इजराईल में इसका उल्टा है जो शांति भंग करता है उसे हमेशा के लिए शांत कर दिया जाता है।

भारतवासियों से मेरा निवेदन: हे भरतवंशी , कब तक अहिंसा परमो धर्म में उलझे रहोगें, अगले इस श्लोक को आगे भी पढ़ो, “धर्म हिंसा तथैव च: धर्म बचाने के लिए हिंसा भी करना चाहिए। संसार के सबसे पौराणिक और मात्र एक धर्म सनातन को आक्सीजन की जरूरत है। उठो जागो और भागो, तब तक जब तुम सनातन का पताका पूरे विश्व पर ना लहरा दो।

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, जय हिंद जय भारत

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