इस चैन आफ ट्रांसमीशनव को समझिये।।क्यो जरुरी है सोशल डिस्टेंसिंग।।

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आखिर क्यों जरुरी है सोशल डिस्टेंसिंग? सरकार को क्यो लगानी पड़ी है कम्पलीट लाँक डाउन ? इसके पीछे हम और आप जैसे लोग ही है जिम्मेदार। जो प्रशासन के लाख कहने के बावजूद भी सोशल डिस्टेंसिंग को मैंटेन नही कर रहे है।

आईये जानते है दिल्ली के 10वीं कोरोना पाजिटिव मरीज के बारे मे

चैन आफ ट्रासमीशन क्या है ?

ये संक्रमण केैसे फैलता है उसके दिल्ली के 10वी कोरोना पाजिटिव मरीज के बारे मे इस पूरे तथ्य को समझनी चाहिए।

दिल्ली कि 10वीं कोरोना मरीज दिल्ली दिलशाद गार्डन के रहने वाली एक महिला है। 19 फरवरी के दिन ये महिला अपने बेटे के साथ सऊदी अरब गयी थी।

10 मार्च को यह महिला सऊदी से दिल्ली लौटी , जहा उसके भाई ने उस रिसिव किया।

12 मार्च को महिला मे बूखार और खांसी की लक्षण दिख रहे थे तो महिला ने अपने पास के ही डाक्टर से संपर्क किया।

15 मार्च को जीटीबी हास्पिटल मे भर्ती करवाया गया।

जीटीबी एमेरजेंसी वार्ड के डाक्टरों ने महिला को RML हास्पिटल मे रेफर किया।

17 मार्च को टेस्ट के बाद महिला कोरोना पाजिटिव पायी गयी।

20 मार्च को महिला के माँ और भाई पाजिटिव पायी गयी।

21 मार्च को महिला के दो बेटी भी पाजिटिव पायी गयी।

22 मार्च को महिला को इलाज करने वाला डाक्टर भी कोरोना पाजिटिव मिला।

यानि उस एक महिला से अभी तक 6 लोग कोरोना के चपेट मे आ चुके है।

बात यही खत्म नही होती है आगे की खतरे मे बारे मे जानिये।

महिला के साथ गये 19 साल के बेटे को कोरोन्टाईन किया गया है।

महिला के इलाज करने वाले डा. के पत्नी और बच्चे मे भी कोरोना के लक्षण दिख रहे है।

10 मार्च को सउदी से लौटी महिला को कोरोना के लक्षण दिखने शुरु हुए और 17 मार्च तक टेस्ट पाजिटिव आया। अब 7 दिनों मे महिला के संपर्क मे आये कुल 74 लोग निगरानी मे है।

खतरा यही खत्म नही होता है।

भाई न महिला को 10 मार्च को दिल्ली एयरपोर्ट पर रिसिव किया था और 20 मार्च को वो टेस्ट पाजिटिव आया । इन दस दिनों के महिला के भाई कई भीड़ भाड़ वाली जगहों पर गया, जिसमे शाहीन बाग भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक लगभग 100 लोगों के संपर्क मे आये।

अब सबकी जाँच करनी होगी।

लेकिन ये चैन अभी टुटी नही है ।

अब और आगे चलिये।

22 मार्च को कोरोना पाजिटिव आने से पहले स्थानिय डाक्टर ने कई मरीजो का इलाज किया। ये आकड़ा 100 के करीब है। वो मरीज भी कोरोना के संदिग्ध हो सकते है। उन सबकी जाँच करनी होगी।

यानि 10 मार्च को सउदी अरब से लौटी एक मरीज के कारण कितने लोग कोरोना के चपेट मे आ चुके है। इस नजर डालिये।

सउदी से महिला लौटी परिवार के 1

परिवार के चार लोग पाजिटिव निकले +4

एक डाक्टर भी कोरोना पाजिटिव निकला +1

डाक्टर के पत्नी और बेटी भी खतरे मे है +2

महिला के बेटे पर भी खतरा है +1

महिला के संपर्क मे आये 74 लोग +74

उसके भाई के संपर्क में 100 लोग आये +100

डाक्टर ने 100 मरीजों का इलाज किया +100 कुल मिलाकर 283 संक्रमित

ये है कोरोना के चैन रिएक्शन वाला खतरा जो धीरे-धीरे महामारी का रुप ले सकता है।

लिहाजा सबको इसी चैन आफ ट्रासंमिशन को ब्रेक करने की जिम्मेदारी है।

जनता कर्फ्यू के दिन तो देश ने पीएम मोदी के अपिल को सर आँखो पर लिया। लेकिन उसके बाद लाँक डाउन किये गये कई शहरो की तस्वीर हैरानी करने वाली है। इसिलिए सरकार कह रही है लाँक डाउन को 100 फिसदी लागु करना होगा।

मेडिकल विभाग का कहना है कि 100 प्रतिशत लाँक डाउन करना होगा । आंशिक लाँक डाउन से काम चलने वाला नही है 100 प्रतिशत लाँक डाउन से ही हम कोरोना से लड़ सकते। और कोई रास्ता नही है। 100 प्रतिशत लाँक डाउन का उद्देश्य चैन आफ ट्रांसमीशन को तोड़ना होगा।

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