“अहिंसा परमो धरम” को समझे गाँधी के दुहाई देने वाले।

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आजकल अचानक महात्मा गाँधी जी का टीआरपी बढ़ गया है। हर तरफ गाँधी गाँधी और गाँधी की तलाश जारी है। जब से देश में NRC और CAA कानून पास किया गया है। पक्ष तथा विपक्ष दोनों गाँधी जी की नाम कि दुहाई देने में लगे है लेकिन सवाल यह उठता है कि हम गाँधी जी को जानते कितने है।

सरकार लगातार गाँधी जी के नाम को ऊपर रखकर NRc और CAA पर सफाई दे रही है वही विपक्ष तथा कुछ तथा कथित पत्रकार शब्दों को तोड़ मरोड़ करने में लगे है।

सरकार गाँधी जी के दिए गए उस आखासन को रेखोकित कर रही है, जिसमे पाकिस्तान तथा बंगाल देश में रह रहे अल्पसंख्यकों को भारत में रहने का अधिकार देने की बात कही गयी है। जब कमी भी पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को लगे की उसके साथ मुस्लिम शासन अनौतिक दुराचार कर रही है, तो भारत के सरकार उसे नागरिकता प्रदान कर सकती है।

विपक्ष और तथा कथित पत्रकार इस पर अपना तर्क दे रहे है, कि गाँधी जी ने कहाँ लिखा है कि मुसलमान इस देश में आकर नहीं रह सकते है, लेकिन सवाल इस बात उठता है कि तथा कथित मुस्लिम समर्थक पत्रकार को पहले समझने होगा कि यह गाँधी का देश है तो यहाँ गाँधी वादी लोगों का ही रहने भी अधिकार है।

गाँधी के पूज्यनीय गाय के साथ हिंसा करने वाले लोग गाँधी के कैसे हो सकते है। गाँधी के प्रिय शब्द है राम से नफरत करने वाले गाँधी के परम विचार अहिंसा परमो धर्म के इस देश में हिंसक लोगों के लिए जगह क्यों होनी चाहिए।

जब आप नहीं राम को मानते नहीं गाय को नहीं गंगा को सबसे बड़ी बात आप हिंसा करने की धमकी दे रहे है तो आपके लिए जिन कि देश पाकिस्तान में जगह हो सकता है, हॉ जो अहिंसा परमो धर्म को स्वीकारता हो उससे किसी को और दुनिया में कही भी रहे किसी भारत वासी को एतराज नहीं होनी चाहिए।

हिंसा के समर्थन करने वालों को गाँधी का नाम लेने से पहले सौ बार सोचना चाहिए। गाँधी जी ने भारत के युवा क्रान्तिकारी भगत सिंह खुदीराम बोस और सुखदेव को भी समर्थन नहीं किया। अगर गाँधी जी चाहते तो उसे बचा सकते थे।

अभी जो सरकार है, उसकी विचारधारा हर तरह से गाँधी जी से मेल खाता है। सरकार राम के पूजारी है। गाय को माँ मानती है और अहिंसा परमो धर्म उसका विचारधारा है। लेकिन अब सिर्फ इतना फर्क है कि वह एक गाल पर थप्पर मारने वालों को पलटकर दोनों हाथों से चाटा मारती है गाँधी के प्रिय रामभक्तों को बचाने और भारत के सम्यता। संस्कृति को पून: जामृत करने में लगी है। जिन्ना जिसका मंशा था सता प्राप्त करना। उसे गाँधी से बराबरी नहीं किया जा सकता है। भारत में रहना है तो गाँधी बनकर सब रहे। जिन्ना बनकर रहने वालों के लिए यह समय सही नहीं है।

मैं नहीं कहता हूँ कि सारे मुसलमान ऐसे है, लेकिन जो कुछ भी है उन्हे गाँधी विचारधारा को सनझने की जरुरत है। दुनिया में एक नजर उठाकर देखने की जरुरत हैं कि मुस्लिम देशों की हालत क्या है।

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