दो गज की दूरी, क्या है मजबूरी

Spread the love

दो गज की दूरी मास्क है जरूरी, क्योंकि आज संसार के सबसे ज्यादा बुद्धिजीवी जी मानव पर खतरा आन पड़ा है। यह मानव आज स्वयं से साथ साथ समस्त ब्रम्हाण्ड के लिए एक खतरा बन गया है। जब मनुष्य का शुरुआती दौर रहा होगा तो उनकी दूरी पता नही कितनी रही होगी, लेकिन धीरे-धीरे मनुष्यों ने चिंतन किया और प्रकृति के नियमानुसार मानव जीवन के लिए भी नियम बनाया। जिसे आप वेद, पुराण और शास्त्रो के रुप मे जानते है। मनुस्मृति जिसमें मनुष्य के जीवन कैसा हो इस पर विशेष ध्यान दिया गया है। लेकिन धीरे-धीरे मत बदलते गए और इतने बदले की इंसान को इंसान खाने लगा है। इस कलयुग में भी नरभक्षी मौजूद है जो कि समस्त मानव के लिए कलंक है।

लेकिन मनुष्य का विकास यात्रा इतनी तेजी से बढता जा रहा है कि मनुष्य अपने आपको बुद्धिजीवी मानते हुए प्रकृति के नियम को ही अनदेखी करने लगा है या यह कहे कि ठेंगा दिखा दिया है। कहते है ना “विनाश काले विपरित बुद्धि” वही आज मनुष्य़ पर सवार है। प्रकृति ने समय समय पर अपने को संतुलित किया है और संतुलन बनाये रखने के लिए विभिन्न प्रकार के कण उत्पन्न किया है जिसें साइंस के भाषा में आज हम वायरस कहते है।

वेद शास्त्र में समय समय पर प्रकृति में परमात्मा का अवतरण हुआ है, जिसे दशम अवतार कहते है। यह वर्णन भी मिलता है कि 11वां अवतार कल्कि अवतार के रुप में हो सकता है।

अगर हम दसो अवतार की बात करे। मत्स्य , कूर्म, वराह, नरसिंह, वमन, परशुराम, राम, कृष्ण, बलराम और बुद्ध अवतार माने जाते है।

कल्कि अवतार इस कलयुग में होगा या हो चुका है कहना मुश्किल है। लेकिन जिस प्रकार से कोरोना मानव जीवन पर असर डालना शुरु कर दिया है। उससे तो लगता है कि कल्कि अवतार कोरोना के रूप में हो चुका है। खैर छोड़िय़े ये तो धर्म की बात है।

मै यहाँ पर दो गज की दूरी मास्क है जरूरी के बारे में बता रहा हूँ।

यहाँ यह भी समझना होगा की दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी कोई नयी बात नही है। अगर हम सनातन धर्म के बारे में बात करे तो देखेंगे की सब कुछ पहले से ही चला आ रहा था जिसे आज के मानव समाज ने ध्वस्त कर दिया। लिपटना चिपटना औरते मर्द बन गयी और मर्द औरते। जबकि सबके लिए एक बेहतरीन सिस्टम बनाया गया था। किस प्रकार से संबंध बनाकर मानव जीवन को राक्षसी होने से बचाने का उपाय किया गया।

प्रणाम पैर छुकर करना है और आशीर्वाद माथे के ऊपर से मिलते थे। इसके अलावा कोई भी शारीरिक स्पर्श नही था। सिर्फ पत्नी और पति का एक ही एक मात्र संबंध ऐसा बनाया गया जिसमें दो गज की दूरी मिट जाती है। इसके लिए सामाजिक रिति रिवाज से वैवाहिक संस्कार किये जाते है या थे। एक मां अपने जवान बच्चे के शरीर को स्पर्श नही करती है, या एक पिता के साथ भी यही है। इसके अलावा किसके सामने कौन ही बात नही करनी है, या कौन सी शब्द नही बोलनी ही है यह भी बताया गया है।

लेकिन मानव संसार के सबसे ज्यादा बुद्धिजीवी होने के कारण या बाद भी प्रकृति के संदेश को समझने में पूरी तरह से विफल रहा है। खासकर के वो समाज और देश जो अपने आपको एडवांस समझते है। एक वो समाज जो जाहिल और जानवर है,, और जानवर और इसानों की हत्या करना उसका मजहब सिखाता है। वैवाहिक संबंध के अलावा औरौ से भी शारीरिक संबंध बनाने लगे। यहाँ तक की अपनी खास बेटियों तक को नही छोड़ा जा रहा है।

चलिए अब आते है मुख्य मुद्दे पर। आज से 50 साल पहले प्रकृति नें मानव को एडस के रूप में यह संदेश दिया था। आपको शायद याद होगा कि किस प्रकार से लोगों में एडस के प्रति एक नफरत की भावना और बीमारी के प्रति भय व्याप्त था। किसी को एडस हो जाने का मतलब सीधे-सीधे उसका चरित्र भी उजागर हो जाया करता था।

लेकिन धीरे-धीरे लोगों को जागरुक किया गया। यह बीमारी कैसे एक दूसरे में फैलता है इसके बारे में बताया गया। जिसमें इस बीमारी को फैलने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदारी या कारक असुरक्षित यौन संबंधों को माना गया। इसके अलावा और भी कारण बताये गए जिसमें इंजेक्शन और नाई ब्लैड का माना गया। लेकिन 90% यह बीमारी यौन संबंधों के कारण ही फैला है। 1981 में आये य़ह बीमारी अभी तक लगभग पिछले 50 सालों में 30 करोड़ से ज्यादा लोगों का जान ले चुका है, सबसे बड़ी बात यह लाईलाज बिमारी है।

मनुष्य के विकसित हो रहे खोपड़ी ने इसका भी निचोड़ ढुंढ लिया। एक प्लास्टिक्स का कवर बना लिया जो कि यौन संबंध बनाने से पहले प्रयोग करने की जाती है। लेकिन दुनिया में इससे और ज्यादा नाजायाज यौन संबंधो में वृद्धि हुई । नानजायज इसलिए कि समाज सिर्फ शादीशुदा पति प्तनी को ही इसके लिए अनुमति देती है। यह प्लास्टिक की थैली इस बीमारी को बचाने में तो नाकामयाब रहा लेकिन मेडिकल के दुनिया में अच्छा खासा बिजनस करने वाली प्रोडक्ट बना है।

यहाँ पर प्रकृित नें मनुष्य को एक बार दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी का संदेश दिया।लेकिन मानव इसे समझने में नाकामयाब रहा। दो गज की दूरी यानि कि किसी से भी दो गज की दूरी बनाकर रखनी है। सिर्फ पत्नी के अलावा। इसके अलावा मास्क यानि मुख से मुख को नही सटाना है। सरल भाषा में इसे चुंबन कहते है और आज के अंग्रेजी भाषा में इसे किस्स कहते है।

लेकिन मानव ने माना नही और सिलसिला बढ़ता ही चला गया। एक विशेष मजहब के लोग तो पूरे दुनिया पर फतह करने के लिए बच्चा पैदा करना है, हर रोज नाजायज संबंधों को जोड़ते है, भला एक बाप अपने बेटी से निकाह करे यह तो जानवर में ही हो सकते है।

खैर एडस नें अपना रूप दिखाया और सभी सरकारों नें जोरो-शोरो से जागरुकता अभियान चलाकर इस बात को बताने में लग गया कि एडस फैलता कैसे है।

उसके बाद टीवी नामक बीमारी ने दस्तक दिया जिसमें लोगों को दूररियाँ बनाकर रखने की सलाह दी गयी। इसके अलावा टीवी के मरीज के लिए मास्क अनिवार्य कर दिया गया। जिससे की टीवी दूसरों में नही फैले। अब कोरोना आ गया है और लोगो मास्क को अपने जीवन का सबसे बड़ा हिस्सा बना लिया है।

लंगोटी से धोती और धोती से साड़ी, साड़ी से सूट तक विकास करने वाला मानव आज फिर से कच्छा रुपी लंगौट में लौटा है। अब तो कपड़े इतने छोटे हो गये है कि चार मास्क की जरूरत है। बांकि पूरे शरीर को नंगा कर लिया है।

बात यही तक नही रूका है यह लोग अपने आपको समाज में सबसे ज्यादा विक्सित मानव भी समझने लगे है। लंगौट से कच्छे तक की सफर करने वाले मानव अपने इस सफर में चरित्रहीनता के हजारों तमगा लेकर लौटा है।

प्रकृति ने एक बार फिर से कोरोना के रूप में मानव को संदेश दिया है। अब दो गज की दूरी बना लो या फिर अर्घी को चुनों। आज मानव अपने जीवन को बचाने के लिए त्राहिमान है। आपको चुनना है क्या चुनते है। दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी में आज इतना ही है। कल फिर मिलेंगे एक नये विषय के साथ।

विडियों अच्छा लगा हो तो लाईक एंड सब्सक्राईव जरूर कीजिए और हाँ शेयर भी कीजिए क्योंकि प्यार बांटने से ही बढ़ता है।

%d bloggers like this: