घर खरीदार पर लटका दो धारी तलवार, बिल्डर पर चुप क्यों है सरकार

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जब बिल्डर ने जमीन खरीदा ही नही है तो बेच कैसे सकता है? क्या बिल्डर के स्टांप शुल्क कम करने की बात की जा रही है या घर खरीदार की। क्योंकि बिल्डर पर भी स्टाम्प शुल्क बांकि है जो 1000 करोड़ से ज्यादा हो सकते है ।

नोएडा ग्रेटर नोएडा में लाखों घर खरीदार सड़को पर है जिसका मुख्य कारण है उनको घर नही मिलना। जिनकों घर मिल भी चुके है उनका रजिस्ट्रेशन नही किया जा रहा है क्योंकि बिल्डर ने प्राधिकरण को जमीन का पैसा नही दिया है। इसके साथ ही आज तक प्राधिकरण के प्लानिंग और फाईनेंस विभाग को ये नही पता कि कितना एफऐआर बिल्डर को दिया गया है। जिसके कारण बिल्डरों नें स्टाम्प भी जमा नही किया हुआ है। जब बिल्डर ने जमीन अभी तक खरीदा ही नही है तो बेच कैसे सकता है

नोएडा के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता श्री अनिल के गर्ग (RISE) RIGHT INITIATIVE FOR SOCIAL EMPOWERMENT सरकार के मांग किया है कि कि बिल्डर बायर्स एग्रमीमेंट किया जाना चाहिए ताकि घर खरीदारों के पास कुछ न कुछ कागज तो हो। पिछले दिनों विशाल इंडिया के माध्यम से उन्होने सरकरा के मांग किया था कि 1% स्टाम्प शुल्क लेकर बायर्स बिल्डर एग्रीमेंट कराया जाय। एआईजी स्टाम्प ने भी 2% सहमति जतायी थी।इस बात पर कमोबेश रेरा भी सहमत होते दिख रही है संभवत: सरकार को इस बारे में सुझाव भी भेजें गये थे। लेकिन सरकार घर खरीदारों के सुनने के बजाय बिल्डरों की हित साधनें की हर संभव कोशिश कर रही है।

आखिर क्रेडाई क्यो मांग करने लगी है कि रजिस्ट्रेशन फिस और स्टाम्प ड्यूटी कम होनी चाहिए। क्रेडाई वेस्टर्न यूपी की टीम ने स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फिस कम करने की मांग राज्यमंत्री स्टांप शुल्क रविन्द्र जायसवाल और जिला गौतमबुद्धनगर से सांसद महेश शर्मा से मिलकर यह मांग रखी रखी।

स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फिस में कमी करने वाली कदम स्वागत योग्य है लेकिन सबसे बड़ी बात सरकार को घर खरीदारों से राजस्व वसूलने की इतनी जल्दी क्यो है ? क्यों नही बिल्डर से हजार करोड़ से ज्यादा की स्टांप शुल्क लिया जा रहा है। जिसके लिए प्राधिकरण के प्लानिंग और फाईनेंस विभाग अभी तक स्टांप विभाग को ब्यौरा उपलब्ध कराने मे नाकामायाब रही है जिसके कारण स्टाम्प पेपर लेना संभव नही हो पा रहा है जो कि संभवत: 1 हजार करोड़ से ज्यादा राजस्व की प्राप्ति करने मे सरकार नाकाम हो रही है। जबकि 2015 मे इसके लिए स्पेशल मीटिंग बुलाये गये थे जिसमें दोनो प्राधिकरण को बिल्डर को दिये गये अतिरिक्त एफएआऱ की जानकारी देने को कहा गया ।

इसके अलावा बात करें रजिस्ट्री की तो बिल्डर ने अभी तक प्रादिकरण के द्वारा आवंटित भूमि का बकाया जमा नही किया है जो कि अनुमानित 3 हजार करोड़ से ज्यादा की। अकेले 300 करोड़ तो सुपरटेक बिल्डर पर ही बकाया है। यह भी संभव है कि जब तक प्राधिकरण को बकाया नही मिले प्राधिकर रजिस्ट्री करने को तैयारी नही हो। क्योंकि रजिस्ट्री पर तीन पार्टी के हस्ताक्षर किये जाने है। प्राधिकरण , बिल़्डर और बायर्स। दूसरी जो सबसे अहम बात है कि ज्यादातार प्रोजेक्ट को अभी तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट नही दिये गये है और बहुत सारे तो अधूरे ही है।

बिना कंपलीशन सर्टिफिकेट के स्टाम्प कैसे ?

नोएडा ग्रेटर नोएडा के सैकड़ों प्रोजेक्ट आधा अधूरे ही पड़े है जो थोड़ा बहुत रेडी टू मूव है उनको भी कंपलीशन सर्टिफिकेट नही मिले है। हाल ही मे सुपर एरिया और कारपेट एरिया को लेकर भी विवाद उभरा है जिसमें जिलाधिकारी कार्यालय के तरफ से किसी भी प्रकार के गड़बड़ी के लिए प्राधिकरण को जिम्मेदारी लेने की बात कही। उसके बाद से प्राधिकरण ने रजिस्ट्री पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है क्योंकि अगर प्राधिकरण को जिम्मेदार बनाया जायेगा तो निश्चित ही उसे कागज से निकलकर प्रोजेक्ट पर जाना होगा। बताना होगा कि किस प्रोजेक्ट कितना एफएआऱ दिया गया है और कितना बनाया गया है। ऐसे मे प्राधिकरण के लिए एक नयी उलझन उत्पन्न हो चुका है और घर खरीदारों के लिए मुसीबत बढ़ा है।

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