बीस साल बाद……

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-राजेश बैरागी-
यह अतीत की चर्चित डरावनी हिंदी फिल्म का शीर्षक नहीं है जिसके उपसंहार में कातिल का राज खुल जाता है। यह विष्णु नामक शख्स की कहानी है जिसे बीस साल जेल में बिताने के बाद बताया जाता है कि वह निर्दोष है। ललितपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी विष्णु के विरुद्ध 16 सितंबर 2000 को दलित महिला से बलात्कार करने के आरोप में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। वह तब मात्र 16 वर्ष का था। वहां के सत्र न्यायालय ने विचारण के बाद उसे बलात्कार व दलित उत्पीड़न में दोषी मानकर बीस साल कैद की सजा सुनाई। वह तब से जेल में है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसकी जेल अपील पर उसके मामले का परीक्षण करने के पश्चात उसे निर्दोष करार दिया। न्यायमूर्ति द्वय डॉ के जे ठाकर व गौतम चौधरी की खंडपीठ ने महिला के पति व ससुर द्वारा कथित घटना के तीन दिन बाद रिपोर्ट लिखाने, महिला के साथ जबरदस्ती का साक्ष्य न होने को अपने निर्णय का आधार बनाया। न्यायमूर्तियों ने सत्र न्यायालय द्वारा सुबूतों की अनदेखी कर सजा के फैसले को गलत ठहराया। निचली अदालतों के फैसलों को गुण-दोष के आधार पर पलटने और बरी किए गए आरोपियों को सजा देने तथा सजा से दंडित लोगों को उच्च न्यायालयों द्वारा दोषमुक्त किया जाना आम बात है।

परंतु इस मामले में खास बात यह है कि उच्च न्यायालय की इस खंडपीठ ने 10 से 14 वर्ष जेल में बिता चुके सजायाफ्ता कैदियों की रिहाई पर विचार न करने के लिए राज्य सरकार को फटकार लगाई। खंडपीठ ने कहा कि राज्य व केंद्र सरकारों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 व 433 में तथा राज्यपाल को अनुच्छेद 161 में ऐसे कैदियों को रिहा करने की शक्ति प्राप्त है। खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश के विधि सचिव को राज्य के सभी जिलाधिकारियों को ऐसे कैदियों की सूची बनाकर सरकार को भेजने का निर्देश देने का भी आदेश दिया।

हालांकि इस प्रकरण में उच्च न्यायालय की इस खंडपीठ ने स्वयं को कोई दोष नहीं दिया जहां सत्र न्यायालय के फैसलों को चुनौती दी जाती है। उच्च न्यायालय में ऐसे मामलों की संख्या अनगिनत है जो बीस बीस साल से दफ्तर दाखिल हैं और जिनका परीक्षण किया जाना है। उच्च न्यायालय में पुराने मामलों के पेशी पर न आने से विष्णु जैसे निर्दोष सजा पूरी कर लेते हैं तो अनेक अपराधियों के लिए यह सजा से बचे रहने की सुविधा है। यह भी सत्य है कि अदालतों में पर्याप्त न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का दायित्व भी राज्य का ही है परंतु निरीह विष्णु की जवानी के बीस साल को गारत करने का असल दोषी कौन है?(नेक दृष्टि हिंदी साप्ताहिक नौएडा)

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