अफगानिस्तान के तीन जिले हाथ से निकले, 60 तालिबानी ढेर: रिपोर्ट

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अफगानिस्तान में दशहत और प्रतिरोध के बीच हालात के बदलने से संबंधित कुछ खबरें आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि तालिबान विरोधी शक्तियों ने मुल्क के कुछ जिलों को तालिबान के कब्जे से छुड़ा लिया है। तालिबान के साथ हुई इस लड़ाई में लगभग 60 तालिबानी भी मारे गए हैं, जबकि कई तालिबानी हताहत भी हुए हैं। वहीं, देश भर में तालिबान के विरोध में मुल्क के विभिन्न हिस्सों में लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं और इसका विरोध कर रहे हैं।

अफगानिस्तान की Aśvaka’ – آسواکا News Agency ने बताया है कि तालिबान के साथ हुई लड़ाई के बाद पब्लिक रेजिस्टेंस फोर्सेज ने बघलान प्रांत के तीन जिलों- बानु, पुल-ए-हेसार और दे सलाह को अपने कब्जे में ले लिया है। इस लड़ाई में कई तालिबानी भी मारे गए हैं, जबकि कई घायल भी हुए हैं। वहीं, लोकल सोर्सेज ने बताया है कि इस लड़ाई में लगभग 60 तालिबानी मारे गए हैं।

तालिबान के कब्जे से छुड़ाया गया पुल-ए-हेसर जिला काबुल के उत्तर में पंजशीर घाटी के करीब स्थित है। यहाँ तालिबान के प्रभाव को खत्म करने के लिए रेजिस्टेंस फोर्स अपने लड़ाकों को इकट्ठा कर रही है। पंजशीर घाटी हिंदूकुश पर्वत के नजदीक है, जो अभी भी तालिबान के कब्जे से मुक्त है। अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह यहीं के रहने वाले हैं और काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से वे यहीं रह रहे हैं। उन्होंने रेजिस्टेंस फोर्स के कमांडर अहमद मसूद के साथ मिलकर तालिबानी शासन से अफगानिस्तान को मुक्त कराने के लिए संघर्ष करने की बात कही है।

वहीं, खबर ये भी आ रही है कि तालिबान के प्रतिनिधि रेजिस्टेंस फोर्स के कमांडर अहमद मसूद से मुलाकात कर रहे हैं। अहमद मसूद पुनः कब्जा करने से ठीक पहले एक वीडियो में कहा था, “अगर कोई, चाहे उसका कुछ भी नाम हो, हमारे घरों, जमीनों और हमारी आजादी पर हमला करने की कोशिश करेगा तो हम राष्ट्रीय नायक अहमद शाह मसूद और अन्य मुजाहिदीन की तरह अपनी जान देने तैयार हैं, लेकिन अपनी जमीन और अपनी गरिमा को नहीं लूटने देंगे।” उन्होंने आगे कहा, “मैं आप सभी को आपकी शुद्ध भावनाओं और इरादों के लिए धन्यवाद देता हूँ। ईश्वर की इच्छा से हम स्वतंत्रता सेनानियों, कमांडरों और हमारे विद्वानों के साथ मिलकर अपना प्रतिरोध जारी रखेंगे।”

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