इस बार कोरोना

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-राजेश बैरागी-
कोरोना ने साल बदल लिया है। अब वह 21 का हो चला है। पिछले साल इन्हीं दिनों में उसके आगमन को मजाक समझा गया था।जब तक लोग गंभीर हुए, वह गंभीरता की सीमा को लांघ चुका था।देश में लॉकडाउन लगा दिया गया था परंतु रोजी से महरूम और रोटी से भयभीत औरतों मर्दों बच्चों का रेला सड़कों पर निकल पड़ा। हजारों मील लंबे रास्तों को लोगों ने अपनी टांगों से नाप दिया था। महामारी से घबराये धनिकों ने अपनी तिजोरियों के मुंह खोल दिए और जरूरत से ज्यादा खाना व खाने का सामान बांटा जाने लगा।

मैं और मेरे जैसे असंख्य लोग खुश हो सकते हैं कि उनके जीवनकाल में महामारी के दर्शन हुए और यह प्रार्थना है कि ऐसा मंजर फिर न देखने को मिले।साल बीतते-बीतते कोरोना भी बीतने लगा था कि कुछ दिनों की सुस्ती के बाद कोरोना ने फिर सिर उठाना शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र, केरल, पंजाब और दिल्ली समेत छह सात राज्यों में कोरोना की भयंकरता बढ़ रही है।देश में एक बार फिर लॉकडाउन लगने की आशंकाएं जताई जा रही हैं

हालांकि ऐसा होगा नहीं। परंतु लापरवाही से उस हाल में पहुंचने में देर भी नहीं लगेगी। वैक्सीन लगाई जा रही है, उससे बहुत भरोसा है। बाजार हाट में संभलकर जाएं।कोरोना 21 का है तो हमें क्यों पिछली सदी का पिछड़ा बने रहना है। समझदारी, सतर्कता और प्रचलित उपायों से कोरोना से निश्चित ही बचा जा सकता है। यदि नहीं बचे तो अबकी बार बचने का अवसर नहीं मिलेगा।(नेक दृष्टि हिंदी साप्ताहिक नौएडा)

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