नोएडा स्वच्छ भारत और स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलती ये सदरपुर की तस्वीरें।

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नोएडा देश के स्मार्ट सिटी में बेशुमार है, लेकिन यह सिर्फ सेक्टरों को लेकर। नोएडा के गाँव में आज भी विकास की खोज में राह देख रहे है गाँव के लोग। वही गंदगी के अंबार, वही खुली हुई नाली, मच्छर को पनपाते गंदी नालियाँ और जल भराव है। नोएडा सेक्टर में भले ही सड़क के ऊपर ही सड़क बनते हो लेकिन गाँव में तो वही टुटी गलिया देखने को मिल जाते है। विकास पागल है या विकास अभी तक हुआ ही नही, अगर विकास हुआ है तो कहाँ है यही सवाल नोएडा के गाँव वाले पूछ रहे है।

नोएडा सेक्टर 45 सदरपुर गाँव को अगर आप जानते है यह भी अवश्य जानते होंगे कि यह गाँव स्मार्ट सिटी नोएडा सेक्टर 18 से सिर्फ 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अम्रपाली से इसकी दूरी 100 मीटर की है। गाँव के गली नंबर 7 के सामने वर्षों से नाली खुली पड़ी है या कहे कि नाली बनी नही है खुले मे ही गंदगी बह रही है। यह नाली गाँव के गली गलियों से जुड़ती है वहाँ कि सारी गंदी पानी इसी नाली के जरिये बहती है।

नाली के ठिक 10 मीटर के दुूरी पर दूसरी साईड में लोगों के घर बने हुए है। जिसमें ज्यादातर मध्यम वर्गीय या फिर रोज देहारी मजदूरी करने वाले सामान्य लोग रहते है। बरसात होते ही नाली के सारा पानी सड़कों पर उफनने लगते है। सड़क पर जल भराव के कारण लोगों को नंगे पाँव वहाँ से बाहर निकलना होता है। अधिकतर लोग यही से जाते है अपने काम-काज पर। इस समय स्कूल बंद है अन्यथा बच्चों को भी यही से जाना पड़ता है।

इस समय मे कोरोना के महामारी के कारण इस जल भराव के लेकर लोगों में काफी दशहत का माहौल है। खुली नाली में बहती गंदी पानी के कारण इसमे मक्खी मच्छर पैदा हो रहे है जो कि आने वाले समय में या बरसात में यहाँ के निवासियों के लिए काफी परेशान कारण बन सकता है। गाँव वालों का कहना है कि कई बार शिकायत की गयी है लेकिन प्राधिकरण इस पर ध्यान ही नही दे रही है। यहाँ के प्रतिनिधियों को तो सेक्टरों से छुट्टी नही है इसलिए गाँव की हालत देखते ही नही है। नेता तो सिर्फ गाँव में वोट लेने ही आते है।

इसी गली के निवासी ने नाम नही बताने के शर्त पर बताया कि शाम के समय में गली के बाहर बहुत सारे असमाजिक तत्व घुमते रहते है, यही पर दारू शराब पीकर गंदी-गंदी गाली देते रहते है। पुलिस प्रशासन इस पर कभी संज्ञान नहीं लेती है। हम लोग कुछ बोलेंगे तो हो सकता है हम पर ही हमला कर दे। अब परिवार के साथ रहने में यह सब भी सोचना पड़ता है।

नोएडा के यह पहला गाँव नहीं जहाँ पर इस प्रकार की समस्या है, नोएडा के गाँव के लोग हमेशा ही अपेक्षित रहे है। जबकि 60-70 % आबादी इन्ही गाँव में रहती है। एक तरफ जहाँ यहाँ क मूल निवासी है वही दूसरी तरफ मध्यम वर्गीय व देहारी मजदूर लोग इसी गाँव में किराये पर कमरा लेकर रहते है। क्योंकि यहाँ उनको सस्ता पड़ता है और साथ में गाँव वालों का अपनापन भी।

अगर आपके गाँव में भी किसी प्रकार की समस्या है तो हमें टवीट कीजिए। @vatankiawaz आप हमें मेल भी कर सकते है vatankiawaz@gmail.com

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