चारों तरफ लूट है, कहने को महामारी

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कलम की सूखती स्याही

कोरोना काल में एक नेताजी मास्क वितरित कर रहे थे। सामने से दो-तीन पत्रकार नये नवेले से धरा-धर फोटो क्लिक करने में लगा था। शर्त लगी थी कि कौन सबसे ज्यादा फोटो खिचता है और कौन अच्छा विडियों बनाता है, ताकि नेताजी को खुश करे। एक पत्रकार अपने मोबाईल से फोटो शुट करने में मशगुल था। सभी ने मिलकर फोटो और विडियो बना लिया। हर बार की तरह यहाँ भी गरीब लोग थे जिसे नेताजी मास्क वितरित कर रहे थे, जैसा कि अक्सर देखा जाता है। मदद की हर गाड़ी का ठिकाना झुग्गी झोपड़ी होता है फिर भी वह लोग गरीब ही रहते है। खैर बात करते है नेताजी और पत्रकार की।

कैमरा मैन नेताजी के फोटो ऐसा शुट करने में मशगूल जैसे कि नेताजी मास्क नही बांट रहे, कोरोना काल में माॅडलिंग कर रहे है, सभी एंगल पर ध्यान रखा जा रहा था, कही नेताजी यह कहकर नाराज ना हो जाये कि मेरा वों वाला फोटों क्यों नही लिया। खैर कार्यक्रम खत्म हुआ। अब बारी था नेताजी से बाईट लेने की, और तीनों पत्रकार मिलकर नेताजी से बाईट लिया। सवाल वही था आपको कोरोना काल में क्या कहना है। नेताजी भी चुकने वाले कहाँ थे कुछ अपना तारीफ किया बांकि के सभी दूसरे पार्टी के मथे मढ़ दिया। खैर कोरोना काल में सवाल पूछने का समय कहाँ था। कार्यक्रम के समाप्ति पर तीनों पत्रकार बंधुओं के हाथ में मास्क और सेनेटाईजर रहित किट पकड़ाया।

तीनों पत्रकार नें रख लिया। इसके बाद कोरोना में बंद कारोबार और बेरोजगार पत्रकार नेताजी से कुछ कहना ही चाहा कि नेताजी का जबाब मिला क्या तुम लोग भी कोरोना काल में भी उ्म्मीद रखते हो। अभी तो सेवा का समय है और सभी लोग सेवा में लगे हुए है। जो मिला उसे ले जाओ।

अब करना क्या था पत्रकार बंधू ने सोचा शायद नेताजी सही कह रहे है सेवा इसी को कहते है। लोग सेवा में लगे हुए है और हम लोग ही खाली है, जो अपना पेट्रोल खर्चा करके ऐसे आ जाते है जैसे कि हमे किसी नें शादी का निमंत्रण देकर बुलाया हो। फोटों और विडियों ऐसे ही बना रहे थे जैसे की शादी समारोह मे हो। यहाँ तो सब सेवा कर रहे है।

नारियल वाले ने 40 का नारियल 100 का बेच दिया, यह सेवा है, अस्पताल वालों नें लाखों लूटा यह सेवा है।

मेडिकल वालों नें 950 की इंजेक्शन को 50 हजार की बेच दिया यह सेवा है

सब्जी वालों नें 10 की सब्जी 50 के बेचा यह भी सेवा है।

एनजीओ वाले ने जाने कितने डकार गए यह भी सेवा है। नेता जी जनता सेवा के नाम पर मास्क बांट गए यह भी सेवा है।

सरकारी राशन डीलर राशन में से चना गायब कर दिया यह भी एक बड़ा सेवा है।

विपक्ष के नेताओ ने जनता को वेक्सीन नही लेने की सलाह दिया यह भी एक बड़ा जागरूकता अभियान था जिसके चक्कर में करोड़ो टीका बर्बाद हुआ, लेकिन यह भी सेवा है।

किसी नें आक्सीजन की कालाबाजारी की जिसके कारण सैकड़ो लोगों की जान चली गयी यह भी एक सेवा है।

बांकि बचे हम लोग यानि तीनों पत्रकार। मुफ्त में लोगों के फोटो विडियों चलाते रहे, यह कोरोना काल के समय में सबसे बड़ा अपराध था। डाक्टर ने अपना कर्तव्य निभाया, पुलिस नें अपना कर्तव्य निभाया, सफाई कर्मचारियों ने बेहतरीन काम किया। सबके सब फ्रंट-लाइन वर्कर बन गए। इन सबके बीच में कैमरा लेकर घुमते रहे। कालाबाजारी की खबरे दिखाया। लोगों के हालचाल पूछते रहे, जरूरतों को सरकार तक पहुँचाया। लूट कालाबाजारी को उजागर किया। कहने को महामारी था, लेकिन जिसकों जहाँ भी मौका मिला लूट मचाय़ा, जिसे मौका नही मिला उसकी कोई गलती नही।

बस हम तीनों पत्रकार का यही कसूर है कि हम पत्रकार है। तीनों पत्रकार के आँखों में आंसू और हाथ में माईक । इस समय में कुछ और तो कर भी नही सकते , क्योंकि सब लाॅक डाउन है। मुफ्त में हाइलाइट करने के बजाय समाजिक मुद्दो पर बात करें। मुद्दे बहुत है।

कृप्या कोई भी इस पत्रकार का नाम न पूछे।

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