कुछ काम ऐसे है जिसे घर मे बैठकर पूरा किया जा सकता है

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कल अपने भाभी जी (कार्यकर्ता की पत्नी) का फोन था। पूछने लगी आप घर से बाहर निकलते है क्या संघकाम के लिए। मैंने कहा आज से निकलना शुरू किया है। लेकिन हर स्वयंसेवक की जिम्मेदारी अलग है, जिन्हें बताया गया है के घर से बाहर निकल आप को वस्ती में जाना है, किन बंधुओ को भोजन आदि की जरूरत है ये देखना, कुछ स्वयंसेवक सब्जी लेने भोजन बनाने उसे pack करने हेतु जा रहे है, ऐसे अनेक काम कर रहे है जो घर मे बैठकर नही होंगे।

कुछ काम ऐसे है जिसे घर मे बैठकर पूरा किया जा सकता है तो ऐसे भी बहुत सारे स्वयंसेवक है जो वह कर रहे है।

भाभी जी का कहना पूरी तरह गलत नही था। आज की परिस्थिति में अपना पति या भाई या पिताजी घर से बाहर रहे इस से भाभी जी बहन बेटी चिंता करेंगी। क्यो जा रहे हो जरूर पूछेंगी, वो पूछना जरूरी है, क्या किया बाहर जाकर ये प्रमाणिकता से घर लौटने के बाद बताना भी जरूरी है।

बिना काम के बाहर रुकना गलत है। शासन प्रशासन के नियम सभी के लिए है। हम स्वयंसेवक है तो काम का बहाना बनाकर घूमकर आएंगे ऐसी सोच गलत है। स्वयंसेवक सब से पहले देश का नागरिक है बाद में संघ का हिस्सा। नागरिक के रूप में सभी नियम कठोरता निभाना अपनी जिम्मेदारी है।

आज की महामारी में स्वयं की सुरक्षा और घर परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी के दृष्टि से मास्क पहनना, सभी से दूरी बनाकर रखना, मुह नाक आँखे आदि को हात न लगाना, बाहर इधर उधर कही हात न लगाना, घर से निकलने से पहले नाक में नारियल तेल की बूंदे डालना या एक चमच नारियल तेल पीना, बालो को तेल लगाना।
बाहर किस अवकाश में रहे तो वापिस आने के बाद तुरंत नहाना, पहने हुए कपड़े धोना।
रोज घर के सदस्यों के साथ प्राणायाम योगासन व्यायाम करना। और हम संघ विहिप आदी रूप में जो कार्य कर रहे है उसकी जानकारी घर मे अपने करीबी रिश्तेदार को बताना जरूरी है।

निस्वार्थ भाव से निर्मोही बनकर दुसरो को अपना बनाते हुए उनकी सेवा का महत्व बताना।

संघ ने बताया वो काम पूरा करने का शरीर मन बुध्दि को आदत लगाई यह गुण है…. संघशरण होना। संघ स्वयंसेवक का विकास हो इसलिए, उसकी क्षमता बढ़े लिए उसकी क्षमता के अनुसार कुछ काम देता है, वो हम सभी बंधुओ ने प्रमाणिकता से करने का निरंतर प्रयास करते है तो अपने व्यक्तित्व का विकास होता ही है। धन्यवाद।

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