दिल्ली में मंदिर बिकाऊ है, हरिजन बस्ती दिल्ली 96 का मामला।

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नमस्कार आप देख रहे है वतन की आवाज , मै हूँ आपका दोस्त रमन कुमार

दिल्ली देश की राजधानी में है, हम सभी जानते है कि किसी भी देश के राजधानी को सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। देश के बिगड़ते हालात के लिए हमेशा देश के राजधानी से सुरक्षा व्यवस्था या और भी किसी प्रकार के व्यवस्था अक्सर किये जाते है। लेकिन आज मैं आपकों भारत के राजधानी दिल्ली लिए चलता हूँ । जहाँ पर देश के बहुसंख्यक आबादी अपने घर और मंदिर बेचकर पलायन करने को मजबूर है। दिल्ली दंगों का शहर बनता जा रहा है यह भी कहना कोई अतिश्योंक्ति नही होगी।

दिल्ली अब दंगों का शहर बनता जा रहा है। जहाँ पर देश के बहुसंख्यक अपने ही देश में सुरक्षित नही है। देश के राजधानी और राजधानी के पुलिस देश के गृहमंत्री के आदेश से चलते है। यह वही गृहमंत्री है जिस पर हिंदुओं को बहुत अभिमान था। लेकिन दिल्ली में हुए लगातार दो दंगे और गृहमंत्री के ढुलमुल रवैया से हिंदुओं के मन में संशय होने लगा है। क्या अमित शाह वही गृहमंत्री है जो जिसकों लोग गोधरा 2002 के नाम से जानते है। अगर देश के राजधानी दिल्ली से हिंदुओं का पलायन शुरू है तो देश के बांकि हिस्सों का तो भगवान ही मालिक है। लेकिन भगवान भी कहाँ मालिक है वह तो खुद ही मंदिर बेचने को मजबूर है।

ये हिन्दुस्तान की तस्वीर है, वही हिंदुस्तान जहाँ के प्रधानमंत्री हिन्दू के हृदय सम्राट नरेन्द्र मोदी है, जहाँ की गृहमंत्री अमित शाह है। जहाँ के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह है। उसी दिल्ली की ये हालत है। मामला दिल्ली सेक्टर 96 स्थित हरिजन बस्ती की है, जहाँ पर एक मंदिर के द्वारा पर लिखा है कि यह मंदिर बिकाऊ। मंदिर जिस बस्ती में है वो बस्ती हरिजन बस्ती है। अब सवाल उठता है कि आखिर क्यों मंदिर को बेचने की नौबत आ गयी है ? दूसरा सबसे बड़ा सवाल है कि क्या अब मंदिर भी बेचने के लिए बनाए जा रहे है ?

लेकिन यहाँ कि मामला कुछ और है यहाँ पर जिहाद तंत्र की भीड़ लग चुकी है, जिससे निपटने में दिल्ली पुलिसअसमर्थ है। अब ऐसे मे इस बस्ती में रहना मतलब मौत को दावत देना है। जिन माता जी का यह मंदिर उनके सामने में दो विकल्प है या तो मंदिर छोड़कर चली जाये, या इस्लाम कबूल कर ले ? लेकिन ज्यादातर हिंदुओं की यह खासियत रही है कि पहले वह भागना चाहता है फिर अगर भागने में सफल नही हो तो धर्म परिवर्तन कर लेते है। लड़ना उसके बुते की बात नही है। लड़ने के लिए पड़ोसी के धर से निकले।

इससे पहले भी दिल्ली के सराय काले खां में एक हरिजन बस्ती में एक हिंदू लड़के ने एक मुस्लिम लड़की से प्रेम पूर्वक विवाह कर लिया था। जिसकी सजा उस पूरे मोहल्ले वालों को भूगतना पड़ा था। मुस्लिम उपद्रवियों नें गली में तोड़-फोड़ के साथ-साथ मार पीट भी किया। दर्जनों गाड़ियों में आग लगा दिया। आखिर बाद में हिंदू के संगठन के नींद खुले और कमान संभाला।

उसके बाद ही सदियों से सोई हुई दिल्ली पुलिस जागी और आनन फानन में कुछ कारवाई किया। लेकिन उसके बाद दबाब बनाया गया। यह हालात दिल्ली की है। देश की राजधानी दिल्ली की। बीजेपी वाले भले ही इस मामले को केजरीवाल के सिर मढ़े लेकिन यह फेलियर तो देश और दिल्ली के गृहमंत्री अमित शाह की है। सिर्फ कानून बना कर क्या कीजिएगा जब उसे कोई मानता ही नही है। देश में बनाये जा रहे हर कानून हिंदुओ के लिए ही जी का जंजाल बनता जा रहा है।

देश के गृहमंत्री जी देश के जनता और बहुसंख्यक को न्याय दीजिए ताकि फिर कोई मंदिर न बिके। फिलहाल यहाँ पर हिंदू संगठन के लोगों नें कमान संभाल लिया है लेकिन कब तक बकरे की मां खैर मनायेगी। जल मे रहकर कब तक मगरमच्छों से बैर किया जा सकता है।

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