शाहबेरी हादसे को एक साल हो गया है,हालांकि निर्माण की गति थोड़ी धीमी जरूर हुई है

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नोएडा: शाहबेरी हादसे को एक साल हो गया है, लेकिन हालात आज भी जस के तस हैं। हालांकि निर्माण की गति थोड़ी धीमी जरूर हुई है, लेकिन आज भी यहां अवैध इमारतों के बनने का सिलसिला जारी है। इन अवैध इमारतों में डर के साए में लोग जिंदगी बिताने को मजबूर हैं। हालांकि इन बिल्डिंगों में रहने वाले लोग अब किसी तरह की कार्रवाई नहीं चाहते हैं। लोग चाहते हैं कि उनके घरों को वैध कर दिया जाए। प्रशासन और अथॉरिटी जहां एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, वहीं जनप्रतिनिधि इन इमारतों को रेग्युलराइज कराने की मांग उठाने लगे हैं। कानून के लिहाज से ये बिल्डिंग अवैध हैं, लेकिन सबकी नजर शासन के रुख पर है।

वहीं, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के चेयरमैन अनूप चंद्र पांडेय ने साफ कर दिया है कि वे शाहबेरी को लीगलाइज नहीं करेंगे। यहां रहना असुरक्षित है। यहां बनी इमारतों में सेफ्टी के नियमों का पालन नहीं हुआ है। फायर सेफ्टी के इंतजाम भी नही हैं। इस एरिया को अवैध घोषित किया जा चुका है, जिसके चलते यहां हो रहे निर्माण पर कार्रवाई होगी।

भूले नहीं भूलता उस रात का मंजर

खसरा नंबर-5 के आसपास की इमारतों में रहने वाले लोग 17 जुलाई की उस रात के मंजर को याद कर आज भी कांप जाते हैं। हालांकि डर के साए में रहना उनकी मजबूरी भी है। वह चाह कर भी यहां से जा नहीं सकते। अधिकांश लोग लो और मिडिल इनकम ग्रुप के हैं। वे अपनी पूरी जमा-पूंजी लगा यहां लगा चुके हैं। बैंक से लोन लिया हुआ है। ऐसे में वे चाहते हैं कि यहां के निर्माण को रेग्युलराइज कर दिया जाए। उन्हें भी सीवर, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं दी जाएं।

मीडिया से दूरी रखना चाहते हैं लोग

यहां रहने वाले लोग नहीं चाहते कि मीडिया शाहबेरी में कोई भी कवरेज करे। वे शांति से जीना चाहते हैं। वे नहीं चाहते कि यहां का अवैध निर्माण मीडिया में हाईलाइट हो और उससे किसी तरह की कार्रवाई हो जाए। उन्हें सुविधाओं से अधिक अपने घर को बचाने की चिंता है। शाहबेरी में किसी भी मीडियाकर्मी को देखते ही यहां रहने वाले लोग एकत्र होकर उसे घेर लेते हैं। कई रिपोर्टर के साथ मारपीट भी हो चुकी है। एनबीटी के रिपोर्टर को भी घेरकर उनके मोबाइल से सारे फोटो डिलीट करा दिए गए थे। चर्चा है कि यहां निर्माण करने वाले बिल्डरों ने भी रेजिडेंट्स से कहा है कि अगर उन्हें अपने घर बचाने हैं तो इस जगह पर मीडिया को न आने दें।

वैध नागरिक बनने की कवायद जारी

यहां के रेजिडेंट्स अलमास चौधरी कहते हैं कि वे अवैध कैसे हैं, जब उन्हें यूपीपीसीएल ने बिजली का कनेक्शन दिया है। बैंकों ने लोन दिया है। गैस की पाइप लाइन तक बिछ रही है। उनके घरों पर डाक पहुंचती है। वोटर कार्ड हैं। यहां के करीब 3 हजार लोगों ने लोकसभा चुनाव में वोट डाला था। अब वे यहां के वैध नागरिक बनना चाहते हैं। इसके लिए स्थानीय लोगों ने पिछले माह ग्रेटर नोएडा आए सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की थी। सीएम ने मानवीय रुख अपनाने का भरोसा दिया था। सांसद डॉ. महेश शर्मा ने भी उनकी पीड़ा को उठाते हुए सीएम से इस एरिया को वैध करने की मांग की है।

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