जारी है निजी वाहनों की डग्गामारी

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प्रयागराज। डग्गामारी के धन्धे में मोटा मुनाफा होता है। जो पार्टी सत्ता में आती है उसके स्थानीय नेता अपने-अपने इलाकों में डग्गामार वाहन चलवाते हैं। आरटीओ और पुलिस इन वाहनों को पकड़ने का साहस भी नहीं कर पाती है। इन बसों के सामने और पीछे लिखे नाम विशेष लिखा रहता है, जिससे अंदाजा लगाया जाता है कि बसें किस नेता से संबंधित हैं। डग्गामारी ऐसे रूटों पर होती है जहां पर रोडवेज के अलावा अन्य बसों का संचालन प्रतिबंधित है। इन रूटों पर बस संचालक आरटीओ और स्थानीय पुलिस से सांठगांठ कर बसों का संचालन करते हैं और जगह जगह से सवारियां उतारते और बैठाते हैं।

बता दें कि डग्गामारी करने वाले बसों के पास अमूमन आल यूपी और आल इंडिया परमिट होता है। नियम यह है कि इस तरह की बसों के संचालक एक जगह से सवारियां बुक करेंगे और दूसरे स्थान पर उसे उतार देंगे। रास्ते में न तो सवारियां उतारेंगे और न ही बैठाएंगे। लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से डग्गामार बसों के संचालक सरकारी बस अड्डों के आसपास से और सार्वजनिक स्थलों से बेखौफ होकर पुकारते हुए सवारियां बैठाते और उतारते हैं। आल इंडिया और इंटरस्टेट परमिट वाली डग्गामार बसों को अगर आरटीओ द्वारा पकड़ा जाता है तो दस हजार रुपए का जुर्माना है। अगर परमिट नहीं है तो जुर्माने की राशि चालीस से पैंतालिस हजार है। खुले आम चल रही यह बसें आम लोगों को नजर आती हैं

लेकिन आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस को नजर नहीं आ रही हैं। अगर कभी चेकिंग होती भी है तो अधिकारी मोटी रकम लेकर छोड़ देते हैं और यह फिर सड़कों पर नजर आने लगती हैं। कई बार ऐसी बसों से हादसे भी हो चुके हैं लेकिन सब कुछ जानते हुए भी संबंधित विभाग के अफसर आंखें मूंदे बैठे हैं। प्रयागराज के सिविल लाइंस रोडवेज़ बस स्टैंड के पास की सड़कों से दूसरे शहरों को जाने के लिए डग्गामार वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं। डग्गामार बसों के चलते रोडवेज बसों की आय प्रभावित होती है। और यात्रियों को भी बहुत सी परेशानियों का सामना करना पडता़ है। सड़कों के अलावा बस स्टैंड परिसर के बाहर डग्गामार वाहन कब्जा जमाये रहते हैं। बिना किसी परमिट के एसी कार, टेंपो, वैन, मैजिक, मिनी बस से लेकर एसी बस तक यात्रियों को ढो कर परिवहन विभाग को चूना लगा रही है।

दलाल लोग बस स्टैंड के बाहर आवाज लगाकर सवारियों को बुलाकर वाहन में लाते हैं। रोडवेज बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों तैयार खड़े हुए डग्गामार वाहनों में रोडवेज से कुछ कम किराया लिया जाता है, जिससे यात्री लालच में आकर वाहन में बैठ जायें। यह पता चला है कि हर रूट का ट्रिप के लिए निश्चित पैसा है, जिसको देने वाले को अवैध डग्गामार वाहन चलाने दिया जाता है। घाटा पूरा करने और कमाई करने के लिए इन वाहनों में क्षमता से ज्यादा सवारियों को बैठाया जाता है। चूंकि हर रूट और हर ट्रिप के लिए कमीशन के रूप में निश्चित किया गया पैसा सही जगह पर वाहन संचालकों द्वारा पहुंचा दिया जाता है, इसलिए रास्ते में उनकी चेकिंग भी नहीं की जाती। अगर कभी मजबूरी में चेकिंग करनी भी पड़े, तो पैसा देने वालों को फोन करके बता दिया जाता है और वे बचने का रास्ता निकाल लेते हैं और पैसा न देने वाले पकड़ लिए जाते हैं।

पता चला है कि जितनी लंबी दूरी की बस होती है, उतना ही मुनाफा अधिक होता है। यह डग्गामारी परिवहन विभाग की नाक के नीचे हो रही है। सबको सब पता है, लेकिन कौन अपनी कमाई बन्द कराये। इसीलिए सारा खेल चुपचाप होता रहता है। शिकायत करने से भी कोई फायदा नहीं होता। चालान करने की जिम्मेदारी आरटीओ प्रवर्तन की होती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बीच-बीच में चेक किया जाता है। इसके साथ ओवरलोड सवारियों पर भी कार्रवाई की जाती है। जब तक कड़ाई नहीं की जाएगी और कमीशनखोरी का खेल बन्द नहीं होगा, तब तक रोडवेज को इसी तरह से घाटा उठाना पड़ेगा। डग्गामार वाहन मतलब खतरे में जान। यह केवल प्रयागराज ही नहीं, लगभग सभी शहरों का रोना है। लेकिन रोकथाम के नाम पर खानापूरी कर दी जाती है। जिम्मेदार लोग पूरी तरह आंख बन्द किये रहते हैं। सारा खेल चलता रहता है, और बस।

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