गांव की बिटिया कर गई जिले का नाम रोशन

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कटिहार। जी बता दे कि बिहार प्रदेश के कटिहार जिले का एक सुदूर गांव नक्कीपुर है जहां शैक्षणिक वातावरण के नाम पर, सिर्फ सरकारी मध्य विद्यालय के अलावा कुछ भी नहीं है। इसके बावजूद, उसी सरकारी स्कूल के हिंदी माध्यम से प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत करने वाली, उसी गांव की बिटिया सुमन लता बीपीएससी में अच्छे रैंक प्राप्त कर‌, ब्लॉक पंचायत राज्य ऑफिसर के रूप में एक सरकारी अधिकारी बन गई। जिसने बिहार लोक सेवा आयोग की 64वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा उत्तीर्ण की है। सरकारी अधिकारी पद प्राप्त करने वाली उस गांव की यह पहली छात्रा हैं जो आने वाली अगली पीढ़ी के बच्चों के लिए अब से एक आदर्श बन चुकी है। अर्थात गांव में आगे पढ़ने-लिखने वाले बच्चों के लिए सुमन लता एक प्रेरणादायी स्रोत कायम कर चुकी है।

…कहते हैं ना कि जब हौसलों में जान हो तो, हर मुश्किल राहें भी आसान हो जाती हैं। यही कहानी सुमन लता की रही है। जब उसने बचपन की पढ़ाई शुरू की थी तो शहर से दूर उस गांव में बिजली तक नहीं थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु उपयुक्त वातावरण एवं सुविधाओं की हमेशा कमी रही है। फिर भी गांव की इस बेटी का पढ़ाई के प्रति लगन और मेहनत, आखिर आज एक दिन सूनहरा रंग लेकर आया है।

सुमन लता के पिता श्री राजेंद्र प्रसाद गांव के एक किसान रहें हैं और किसानों की हालात क्या होती है, आज फसलों में लागत और बचत का अंदाजा सबको है। फिर भी उन्होंने बच्चों को उच्चतर शिक्षा प्राप्त करने के हेतु समय और सहयोग बच्चों के प्रति प्रयत्नशील होकर दिया है।

सबसे बढ़कर, पढ़ाई का लक्ष्य प्राप्त करने हेतु बच्चों में लगन और मेहनत की जरूरत होती है जो हर बच्चों में होनी ही चाहिए। .. कहते हैं ना कि “होनहार बिरवान के चिकने पात” यह लोकोक्ति सुमन लता पर पूर्णतः लागू होती है। क्योंकि सुमन लता के स्वजन तथा बचपन में पढ़ाने वाले शिक्षक व गृह-शिक्षक सब का अनुभव रहा है की वह बचपन से ही प्रतिभा पूर्ण छात्रा रही है। बचपन से ही उसमें पढ़ाई के प्रति पूरी-पूरी लगन रही है। इसी का देन है कि आज वह बिहार लोक सेवा आयोग में अच्छे पद प्राप्त करने वाली, नक्कीपुर गांव के अबतक के सभी विद्यार्थियों के बीच यह पहली छात्रा सुमन लता ही है।

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