सरकार को सख्ती की भाषा आनी चाहिए। वर्ना हालात बिगड़ सकते है

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एक तरफ पूरे देश लगभग धीरे-धीरे भूखमरी और अराजकता की तरफ बढ़ती जा रही है। वही दूसरी तरफ लगातार सरकार को ठेंगा दिखाया जा रहा है। सरकार भी इतना मासूम है जैसे की कुछ जानता ही नही हो। अगर हालात ऐसी ही बनी रही तो कुछ जेहादी भारत के लिए समस्या खड़ी कर सकते है। ऐसे मे सरकार को चाहिए की वो चाईना की तरह डाक्टर मे हाथ मे भी बंदूक पकड़ा दे।

लोकतंत्र की आड़ मे हम किसी के अराजकता और साजिश को बर्दास्त करते रहे तो एक दिन न लोक रहेंगे न ही लोकतंत्र। देश मे नेतागिरी करने वालों का क्या वोे तो निकल लेंगे। देश भर मे लाँक डाउन है और लोगों को अपने घर में ही रहने की सलाह दिये जा रहे है। लेकिन इसी बीच कई तस्वीर सामने आ रहे है जो हैरान करने वाली है। लोग जगह-जगह इक्ट्ठे हो रहे है और बिना सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन किये ही अपने धर्म की पालन कर रहे है।

इस समय नवरात्री है और देश मे सभी छोटे बड़े मंदिर और मस्जिद गुरूद्वारे बंद है। नवरात्री होने बावजूद भी हिन्दू संगठन अपने आप को रोक रखा है और सरकार के द्वारा निर्देशित लाँक डाउन के पालन किये जा रहे है। लेकिन वही दूसरी तरफ बार बार ऐसे तस्वीर सामने आ रहे है की मस्जिद मे आज भी लोग इक्ट्ठा होकर नमाज अदा कर रहे है।

अभी दिल्ली मरकज तब्लीगी निपटा भी नही है । 2 हजार से अधिक लोगों के जाँच के लिए भेजा गया है जिसमे से बड़ी संख्या मे कोरोना पाजिटिव पाये जा रहे है। पूरे देश हैरानी मे है कि ऐसा हो कैसे ग्या। खुद मुस्लिम समाज आगे आकर ऐसे आयोजनों का विरोध कर रहे है। लेेकिन इसी बीच नोएडा के सेक्टर 16 जे.जे कालोनी से फिर एक तस्वीर सामने आ गया जो हैरान करने वाली है। 20-25 लोग शाम के समय मे एक छत पर इक्ट्ठा होकर नमाज पढ़ते हुए देखे गये जिस पर बाद मे पुलिस ने एक्शन लिया और कुछ लोगों के गिरफ्तार किया गया।

मजहब के आर मे मानव बम बनता जा रहा है लोग।

मजहब नही सिखाता आपस मे बैर करना। ऐसा कहते हुए ही अच्छा लगता है। ऐसा है नही शायद। या कहे तो सही होगा की मजहब बना ही इसिलिए है। ये तो मजहब ही हो सकता है जो लोगों के जान की कीमत नही समझते है । अपने मानव होने की महत्व को नही समझते है । मजहब के आर मे ये पहले मुसलमान के ही दुश्मन बनते जा रहे है। मजहब मानव बम बनता जा रहा है। हालाँकि ये भी सच है कि युवा पीढ़ी के लोग समझने लगे है और इनके छुपने की जगह को उजागर करने लगे है। जब इंसान बचेगा तभी को हिन्दू या मुसलमान बचेगा। मेरठ और कई जगहों पर मुस्लिम युवाओं के मदद से विदेशी लोग पकड़े जा रहे है जो छुपे हुए है।

वोट बैंक भी कही न कही उन्माद की जड़ है।

एक तरफ जहाँ देश और राज्य के सभी सरकार कोरोना से लड़ने मे लगी है। इस समय मे लगभग सभी सरकारें मिलकर काम कर रही है। लेकिन इसी मे केजरीवाल सरकार के चरित्र भी सामने आने लगी है। लोगों के सहायता के नाम लोगों के धोखा दे रही है। एक बार भी केजरीवाल सरकार के जुबान उन मजहबी उन्मादी के खिलाफ नही खुलती है जो दिल्ली को नर्क बनाने पर तुली हुई है।

गुरुद्वार से निकले 200 से अधिक लोग।

हम सभी जानते है कि गुरूद्वारा हमेशा से मानव की रक्षा और मानव सेवा के लिए आगे आती रही है। सिख समुदाय के साथ पाकिस्तान में कितने भी कत्लेआम किये गये हो लेकिन फिर भी शाहीन बाग मे बिरयानी बाँटने ने से पीछे नही हटती। अब जब मंजनू कुटीला गुरूद्वारे से 200 से ज्यादा लोग निकले है तो लोग मरकज से तुलना करने लगे है। लेकिन इस बात को भूल गये है कि गुरूद्वारे की चरित्र कभी भी ऐसा नही रहा है। ये 200 लोग वो थे जो घर जाने के लिए निकले थे लेकिन किसी कारणवश नही फंस गये। गुरुद्वारे में ऐसे लोगों को सहायता प्रदान किया गया। उनको रहने का आश्रय दिया गया था और वहाँ भी सोशन डिस्टेंस मेंटेंन करवाया गया।

डाक्टर की शिकायत आईसोलेशन मे कर रहे है बदतमीजी

दिल्ली निजामुद्धीन मरकज से जिन 2 हजार से ज्यादा लोगों के पकड़ा गया है। उनको आईसोलेशन के लिए रखा गया है। लेकिन प्रशासन और डाक्टर कि शिकायत है कि वो लोग लगातार बदतमीजी पर उतर आये है और चेक करने वाले डाक्टर टीम के ऊपर थूक रहे है। जिससे हमे इन राष्ट्र रक्षकों के लिए जान की खतरा बनता जा रहा है। सरकार ऐसे लोगों पर सख्त कारवाई करे राष्ट्र रक्षकों को बचायें।

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