सच कहने और लिखने का साहस एक कलम का”…………

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सच कहने और लिखने का साहस एक कलम का”………… ….
किसी कवि ने कहा है ” या बदचलन हवाओं का रुख मोड़ देंगे हम,या खुद को वाणी पुत्र कहना छोड़ देंगे हम। जिस दिन भी हिचकिचाएंगे लिखने में हकीकत, कागज को फाड़ देंगे कलम तोड़ देंगे हम”।आज कलमकार के उसी कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सत्य लिखने का पुनः दुस्साहस कर रहा हूँ।


अगर सत्य सुनने का साहस हो तो सुनो “अहले सियासत” लॉक डाउन में शराब के ठेके,दूकानें खोलने का आदेश तुमने चाहे किसी विवशता में दिया हो मगर सम्पूर्ण मानवता एवम मानव जाति के साथ एक ऐसा अपराध किया है जिसके लिए इतिहास कभी भी क्षमा नहीं करेगा। क्या अभी भी यह महसूस नही कर रहे हो कि जाने अनजाने तुमने कोरोना का साथ निभाने की भूमिका का निर्वाह कर दिया है कोरोना का मूर्त स्वरूप यदि कहीं विद्यमान होगा तो तुम्हारी इस नादानी पर अट्टहास कर रहा होगा ।


शराब के ठेके खुलने के बाद जिस तरह लॉक डाउन की धज्जियां उड़ी हैं उड़ाई गई हैं उसने कोरोना के अश्वमेध घोड़े के निष्कंटक घूमने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है हाँ इस “सैलानी नागरिक” की अब यह भी एक सलाह है की ठेके खुलने के बाद social distance व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन या पुलिस की होने का कुतर्क मत दे बैठना वो तो पहले से ही जान हथेली पर रख कर जिस तरह कार्य कर रहे है उन कोरोना वारियर्स डॉक्टर,पुलिसजन, सफाई कर्मी,बैंक कर्मी,प्रशासनिक अधिकारीगण एवम स्वयं सेवी संस्थाओं के अच्छे कार्यों की सराहना न केवल न्याय प्रिय जनता बल्कि तुम भी पहले ही कर चुके हो अब अपनी भूल के लिए अपने गिरहबान में झांक कर आत्म चिंतन करो जिससे भविष्य में कोई और आत्मघाती त्रुटि न कर बैठो वरना “एक भूल काफी है उम्र भर रुलाने को”और कोरोना से लड़ने के मामले में केवल उम्र भर नही वरन सदियों को रुलाने हेतु काफी होगी।


हाँ चिंतन मनन की प्रकिया में आत्म मंथन के बाद यदि सैलानी के सुझाव से सहमत हो तो तत्काल प्रभाव से अपने इस आत्मघाती फैसले को वापस लेते हुए इस मुसीबत की घड़ी में न केवल आम जनता वरन इंसानियत की मदद करने का काम करो। क्या लगता नही कि इस फैसले से हमने रातोरात कोरोना को संजीवनी बूटी दे दी है। ठेके बन्द करने के आदेश से यह अभी भी सम्हल जाने का वक्त होगा आम जनता ही नही वरन हम सब अपने प्रधान मंत्री से भी यह अपेक्षा रखते है कि तत्काल प्रभाव से हस्तक्षेप कर इस भूलसुधार को क्रियान्वित करने में सहायता करेंगे ।

राजस्व की हानि की भी बात जो कहते हों वो समझ ले कि इंसानी जान की कीमत की तौल कभी भी तराजू पर धन के बाँट से न कभी की जा सकी है न ही कभी किसी भी परिस्थिति में की जा सकेगी। और फिर हिंदुस्तान तो ऐसा देश है जहां भामा शाहों ने हमेशा आगे बढ़ कर देश का साथ दिया है अभी हाल में ही प्रधानमंत्री केयर फंड में भी मुक्त हस्त से दान दिया है।राजस्व हानि के इस यक्षप्रश्न से कहीं बड़ा प्रश्न कोरोना के राक्षस से लड़ने का है।


कुछ थोड़ा स्थिरचित्त होकर विचार करो कि जो अपनी गलती महसूस कर भूलसुधार कर लेता है इतिहास भी उसका सम्मान करता है।एक नागरिक के नाते मेरा सुझाव भी है और आग्रह भी कि तत्काल प्रभाव से शराब के ठेके पुनः बन्द करने सम्बन्धी व्यवस्था की जानी चाहिए।जय हिंद।
अनिल मिश्र एडवोकेट
फर्रुखाबाद उ०प्र०
मो०9455065444

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