उत्त्तर प्रदेश सरकार द्वार लागू फीस नियंत्रण कानून जो की प्राइवेट स्कूलों की संरक्षित

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सादर सूचनार्थ – जैसा आप सभी भलीभांति अवगत है की उत्त्तर प्रदेश सरकार द्वार लागू फीस नियंत्रण कानून जो की प्राइवेट स्कूलों की संरक्षित लूट-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अप्रैल 2018 में प्रदेश में लागु किया गया था ,आज लगभग 450 [1 वर्ष ३ माह बीत चुके है ] दिन बाद भी उसका अमल स्कूलों में नहीं हो पा रहा है यदि बात नोयडा -गौतमबुद्ध नगर की करे तो लम्बे समय से नोयडा में अभिभावक स्कूल -शाशन -प्रशसन के बीच कठपुतली की तरह घूम रहें है ,लेकिन एक अजीब से संदिघ्ध व्यवस्था है

जो इस सब पर हावी है और अभिभावक आज तक न्याय की गुहार में आशान्वित है,स्कूल से लेकर ,DFRC कमेटी,DIOS ,जिलाधिकारी महोदय कोई भी संतोषजनक उत्तर देने में असमर्थ फिर समाधान की सोचना तो व्यर्थ ही है, 15 जून 2019 को जिलाधिकारी द्वारा 31 स्कूलों पर कार्रवाई का निर्देश दिया गया ,इसमें कितने स्कूलों ने इसका पालन किया और सुधार किया इस पर जवाब केवल और केवल जिलाधिकारी के पास है , चूँकि लगतार आग्रह के बावजूद DFRC -DIOS कार्यालय से एक ही जवाब मिलता है की हमने जानकारी आगे भेज दी है अब इस पर जिलाधिकरी महोदय ही निर्णय लेंगे लेकिन कब 🤔🤔😔 ?

🤔 आखिर क्या मजबूरी है जो स्कूलों की इस संरक्षित व्यवस्था पर हमारे जनप्रतिनिधि विधायक -संसद महोदय मौन रूप धारण किये हुए है कौन लेगा संज्ञान -कब होगी सुनवाई और समाधान ?
एक तरफ जिलाधिकारी महोदय इस मुद्दे का रजनीतिकरण न करने की बात करते है और अभिभावकों पर कार्रवाई का ध्यान दिलाते हुए हुए मीडिया में न जाने की हिदायत भी दे रहे है वही दूसरी तरफ न स्वयं कोई जवाब दे पा रहे है और न ही अभी तक कोई समाधान कर पा रहे है 😔😔
ऐसे में अभिभावक करे तो क्या करें , चूँकि इस संबंध में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री महोदय आदरणीय दिनेश शर्मा जी(जिनका इस नियम को बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है ) को भी विभिन माध्यमों से इस समस्या से अवगत कराया गया है लेकिन जवाब -समाधान आज तक लंबित है
किसी अभिभावक के पास इतना समय नहीं की बार बार स्कूल ,DFRC ,DIOS ,डीएम कार्यालय के चक्कर लगाए ??
यदि नियम का पालन समय रहते नहीं होना है तो फिर सरकार द्वारा व्यर्थ नियम बनाने का क्या औचित्य है 😔😔??

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