प्रशासन को नोएडा के बीच के गाँवों पर देना होगा ध्यान।

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कोरोना वायरस को लेकर सरकार ने 21 दिनों के लिए लाँक डाउन कर दिया है। जो कि अति आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी जी के एक आह्वान पर जिस प्रकार के समर्थन मिला है उससे ये लगा कि भारत जल्द ही कोरोना से लड़कर इस संकट से बाहर निकलने मे कामयाब होगा। लेकिन उसके बाद ही नोएडा के बीच बसे ग्रामीण क्षेत्रों मे लोग ऐसे घर से बाहर निकले जैसे भारत पाकिस्तान के क्रिकेट मैच खत्म हुआ हो।

प्रधानमंत्री मोदी जी के 21 दिन के लाँक डाउन के आह्वान के बाद बाजार में राशन के दुकानों पर जिस प्रकार से लंबी लाईन देखी गयी जैसा नोटबंदी के समय मे देखा गया था। यह बहुता बड़ी चिंता की विषय है। नोएडा के माननीय कमीशनर और प्रशासन के समस्त अधिकारीगण को अवगत कराने हेतु ।

कुछ समस्या जो लोगों के लिए चिंता की सबसे बड़ा विषय बन रहा है :

गाँव के क्षेत्र मे बहुत से लोग बाहर के रहने वाले है किरायेदार है समस्या उनके लिए खड़ा हो चुका है । रोज कमाने और खाने वाले है। उनके छोटे-छोटे बच्चे है। उनके लिए भूख भी तो कोरोना जैसा ही है। बाजार मे अचानक से सब्जी के दाम बढ़ गए है। राशन की दुकान से ना समझ लोग जिनके पास मे पैसे थे पर्याप्त मात्रा मे राशन उठा लिया है। अब गरीब लोग खासकर जो किरायेदार है उनके लिए एक समस्या खड़ी है।

नोएडा के इन गाँवों मे सप्लाई चैन मजबूत करने की जरुरत है:

नोएडा के बीच मे कई गाँव है जहाँ पर लाखों के संख्या मे छोटे और मध्यम कामगार नौकरी पेशा वाले लोग रहते। छलेरा , सदरपूर , बरौैला, भंगेल, सलारपूर, हरौला, नोएडा फेस-2 मे कई गाँव है। जो लोग हाजरी कम्पलेक्स मे काम करते है। नया गाँ, इलाहाबास और भी कई गाँव है। यहाँ पर प्रशासन को सप्लाई सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

मकान मालिक नही किरायेदार को मिले सहायता: नोएडा के इस गाँव मे जो भी मकान मालिक है उनका जान पहचान भी अच्छा है लेकिन मकान मे रहने वाले किरायेदार जिसे इस अजनबी शहर में कोई नही जानता वो कहाँ जाए। अगर कोई सहायता मिलता भी है तो वो मकान मालिक को मिलेंगे। मकान मालिक हो सकता है कि उन्हे देने के बजाय उसे बेचे। क्योंकि जिस प्रकार से रात मे 100 रुपये किलों प्याज बिका उससे ये तो नही लगता है कि लोग सामाजिक संवेदनाओं को समझते हो।

प्रशासन सुनिश्चित करे कि सहायता मकान मालिक के बजाय किरायेदारों को मिले। हालाँकि अभी तक प्रशासन के पास ऐसा कोई भी मास्टर प्लान नही है। अगर कोई प्रभावी कदम नही उठाया गया तो न जाने कितने गरीब भूख के मारे दम तोड़ने को मजबूर हो जायेंगे या फिर बाहर निकलकर लाँक डाउन के उल्लंघन मे जेल काटेंगे। योगी सरकार को शहरी ग्रामीण क्षेत्र मे रहने वाले लोगो पर ध्यान देने की अति आवश्यता है।

एक प्राईवेट स्कूल के टीचर इस बात को लेकर चिंतित दिखे क्या स्कूल उन्हे स्कूल बंद होने पर उनको तन्खा मिलेगा। उन्होंने बैंके से लोन ले रखा है जिसका EMI पैमेंट करना है। महीने के आखिरी है मकान मालिक किराया भी मांगेगा। क्या सरकार के पास ऐसा कोई विकल्प है जिससे कोरोना के लाँक डाउन पालन करने वाले लोगों के चिंता मुक्त कर सके । क्या बैंक लोगों के तीन महीने की EMI बाद मे नही ले सकता है।

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