स्पैम रोकने गए थे, बैंकों के OTP ही रुक गए; जानिए ट्राई के नए नियम

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आजकल रोज ही हजारों स्पैम मैसेज मोबाइल पर आ रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए जब भारत के टेलीकॉम रेगुलेटर, ट्राई ने 2018 में जारी पॉलिसी लागू की तो सोमवार को बवाल मच गया। टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने इस रेगुलेशन का पालन किया और नतीजा यह हुआ कि बैंकों के साथ-साथ कोविड-19 वैक्सीनेशन और अन्य सेवाओं के 40 करोड़ वेरिफिकेशन (OTP) एसएमएस (SMS) भी ठहर गए। अब ट्राई ने सात दिन के लिए नई पॉलिसी को लागू करने का फैसला टाल दिया है।

आइए, जानते हैं कि क्यों और कहां रुक गए थे ये जरूरी SMS? क्यों बनी गफलत की स्थिति? अब आगे क्या होने वाला है?

सोमवार को क्या और क्यों हुआ?

बैंकों के ट्रांजैक्शन से लेकर वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन तक, कई OTP सोमवार को डिलीवर ही नहीं हुए। बैंकिंग के साथ-साथ कई ई-कॉमर्स कंपनियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। दरअसल, यह सब हुआ दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले की वजह से। हाईकोर्ट ने पिछले साल मई में दाखिल पेटीएम की एक याचिका पर ट्राई को निर्देश दिए थे कि वह 2018 के रेगुलेशन को लागू करे।
पेटीएम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई है कि ट्राई ने 2018 का नोटिफिकेशन लागू नहीं किया, इस वजह से लोग इसका गलत तरीके से फायदा उठा रहे हैं। लोगों को पेटीएम प्रतिनिधि बनकर फोन करते हैं और SMS करते हैं और उनके साथ धोखाधड़ी करते हैं। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 के रेगुलेशन को सख्ती से और पूरी तरह लागू करने का फैसला सुना दिया।
इसका असर यह हुआ कि जिन कंपनियों ने कॉमर्शियल कम्युनिकेशन का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था और SMS का टेम्प्लेट भी रजिस्टर नहीं कराया था, उनके SMS रास्ते में ही रोक लिए गए। रोज तकरीबन 100 करोड़ कॉमर्शियल कम्युनिकेशन के SMS भेजे जाते हैं और सोमवार को सिर्फ 40 करोड़ ही भेजे जा सके।
ये कॉमर्शियल मैसेज क्या हैं और यह हमें कैसे परेशान करते हैं?

बैंकों से लेन-देन की पुष्टि के लिए भेजे जाने वाला OTP हो या ई-कॉमर्स के ऑर्डर या गैस सिलेंडर बुक करने पर आने वाला वेरिफिकेशन मैसेज भी कॉमर्शियल कम्युनिकेशन के दायरे में आता है। इसी तरह किसी कंपनी के नए प्रोडक्ट, नई स्कीम की जानकारी आपके लिए गैरजरूरी हो सकती है। साफ है कि कुछ SMS आपके लिए जरूरी होते हैं और कुछ गैरजरूरी।
यह इस बात से तय होता है कि मैसेज किसने और क्यों भेजा है? वित्तीय लेन-देन की जानकारी देने या पुष्टि करने वाला मैसेज जरूरी होता है। इसी तरह ई-कॉमर्स साइट पर किए गए ऑर्डर का कंफर्मेशन भी जरूरी होता है। पर रियल एस्टेट डील्स और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स से जुड़े गैरजरूरी मैसेज अवांछित या स्पैम की कैटेगरी में आते हैं। पिछले कई वर्षों से मोबाइल फोन यूजर्स की शिकायत रही है कि उन्हें गैरजरूरी कॉल्स और मैसेज मिल रहे हैं। ये धोखाधड़ी और साइबर अपराध को भी बढ़ा रहे हैं।
इस संबंध में टेलीकॉम रेगुलेटर ने क्या किया है?

2012 में मोबाइल कंपनियों ने SMS की बढ़ती लोकप्रियता से पैसे कमाने की सोची थी। स्पेशल टैरिफ वाउचर लेकर आए और अनलिमिटेड SMS पैक भी दिए। तब टेलीकॉम रेगुलेटर ने तय किया कि 100 से ज्यादा मैसेज नहीं भेजे जा सकेंगे। अगर भेजा तो इसके बाद के प्रत्येक मैसेज पर 50 पैसे चुकाने होंगे।
पर बाद में ट्राई ने यह नियम खत्म कर दिया। उसने कहा कि स्पैम मैसेज रोकने के लिए नई टेक्नोलॉजी आधारित नियम अच्छे हैं। ‘डू-नॉट-डिस्टर्ब’ नियम भी जारी किए। कहा कि कंज्यूमर को जो मैसेज और कॉल चाहिए, तो उस कैटेगरी को चुन सकता है। इसके बाद भी उसे अनचाहे मैसेज या कॉल्स आए तो वह उसकी शिकायत करे। वैसे, इन नियमों ने भी अनचाहे कॉमर्शियल कम्युनिकेशन को रोकने में प्रभावी काम नहीं किया।
फिर, 2018 में ट्राई ने टेलीकॉम कॉमर्शियल कम्युनिकेशन कस्टमर प्रिफरेंस रेगुलेशंस (TCCCPR) जारी किए। इसमें तीन स्तरों पर चेकपॉइंट बनाए। हर स्तर पर टेक्नोलॉजी बेस्ड नियम लागू किए। कंसेंट रजिस्टर, टेलीमार्केटिंग कंपनियों का रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए लेजर रखने को कहा गया।
नए नियम का किस पर क्या असर पड़ेगा?

SMS भेजने वाले के लिएः कॉमर्शियल कंपनियों को खुद को रजिस्टर करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बिना कॉल या मैसेज किया तो उसे प्रतिबंधित कर देंगे। कंपनी को खुद के रजिस्ट्रेशन के साथ ही टेम्प्लेट को भी रजिस्टर कराना होगा। ताकि एक ही फॉर्मेट में सभी मैसेज भेजे जा सकें।
टेलीकॉम ऑपरेटर के लिएः SMS भेजने वाली संस्था या कंपनी SMS भेजने के लिए जिन नंबरों की सूची देगी, उसकी जांच करनी होगी। यह देखना होगा कि कस्टमर्स ने इस तरह के मैसेज को प्राप्त करने की अनुमति दी है या नहीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि मैसेज तय टेम्प्लेट में है या नहीं। अगर यह कंफर्म नहीं होता है तो मैसेज यहीं पर रोक दिया जाएगा।
कस्टमर के लिए: उन संस्थाओं या कंपनियों को चुनना होगा, जिनसे कॉमर्शियल मैसेज प्राप्त करने हैं। इसकी सहमति देनी होगी। टेलीमार्केटिंग कंपनियां बिना रजिस्ट्रेशन के मोबाइल या लैंडलाइन नंबरों से कॉल कर सकती हैं। उस पर कार्रवाई बाद में होगी। पहले रोकने की व्यवस्था की गई है।
तो अब आगे क्या होगा?

सोमवार को नए नियम को लागू करने पर हजारों कस्टमर्स परेशान हुए। इसके बाद मंगलवार को ट्राई ने कहा कि नई गाइडलाइन सात दिन बाद लागू होगी। तब तक SMS भेजने वाली कंपनियां अपना और अपने टेम्प्लेट का रजिस्ट्रेशन करा लें। ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों से भी कहा है कि वे प्रमुख कंपनियों को तत्काल कदम उठाने को कहें और समयबद्ध तरीके से रजिस्ट्रेशन कराएं।

bhaskar.com

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