बेटे का थप्पड़

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-राजेश बैरागी-
उस मां की मौत महज एक हादसा भी हो सकती है। अन्यथा थप्पड़ से कौन मरता है। मौत के अनगिनत कारण बन सकते हैं।ठोकर से लेकर गोली तक,छींक से हृदयाघात तक कुछ भी। परंतु बेटे का थप्पड़ खाकर यदि वह मां जीवित भी रहती तो किस गैरत से। दिल्ली के बिंदापुर क्षेत्र में रणबीर सिंह नामक पुत्र ने अपनी 76 वर्ष की मां को मार देने के इरादे से थप्पड़ नहीं मारा था। लेकिन थप्पड़ खाकर मां गिर गई और फिर नहीं उठी।

मां उसे एक झगड़े से बचने के लिए कह रही थी जब उसे उसके बेटे ने थप्पड़ मारा। मौका ए वारदात के एक वीडियो के आधार पर पुत्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके विरुद्ध गैर इरादतन हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मुकदमे का निष्कर्ष क्या निकलेगा? मौके की चश्मदीद गवाह उसकी पत्नी अपने पति के हित में झूठी गवाही देगी। वीडियो कितना टिकेगा क्या मालूम। पूर्व अनुमान लगाया जा सकता है कि शीघ्र ही वह जमानत पर रिहा हो जाएगा और एक दिन आरोप से भी बरी हो जाएगा।

इस मामले का कानूनी असर इतना ही होने की संभावना है। बड़ा प्रश्न है मां को थप्पड़ मारना। पूज्य संत विजय कौशल जी महाराज एक प्रवचन में कह रहे थे कि जिसकी गोद में आंखें खोली हैं उसे ही आंखें दिखाओगे? मां की मौत बेटे के थप्पड़ से लिखी हो सकती है परंतु बेटे की आत्मा की मौत भी उसी थप्पड़ से हो गई, इससे कौन इंकार कर सकता है।(नेक दृष्टि हिंदी साप्ताहिक नौएडा)

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