बड़ा अजीब लगता है कुछ बातें

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बड़ा अजीब लगता है।

कांग्रेस के महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी प्रियंका गांधी मंदिर जाती है, कुंभ स्नान करती है लेकिन उनके कार्यकर्ता जय श्रीराम के नारे नहीं लगा सकते है। इसी को कहते है हाय-हाय रे मजबूरी, ये मौसम और ये दूरी। तेरी दो टकिया की नौकरी मेरा लाखों की सावन जाय। खैर यह तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं के ऊपर ही छोड़ना चाहिए। पार्टी में ये कैसा लोकतंत्र है जहाँ पर एक धर्म विशेष को अल्ला हू अकबर कहने की इजाजत है , लेकिन जय श्री राम का नही।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार है लेकिन शराब पीने और बनाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। क्योंकि राम राज्य शराब से प्राप्त राजस्व से चलाए जाते है, जैसा की बीजेपी वाले कहते है। जनता भी बहुत बेरहम और वेशर्म है। शराब के दाम बढने तो चुप और तेल की दाम बढा तो हंगामा वो भी दारू पीकर। लेकिन हम तो यही कहेंगे। बड़ी महंगी हुई शराब थोड़ा थोड़ा पीया करों। शराब के पैसे बचाकर उससे तेल भरवा लिया करों।

पर्यावरण को बचाने के लिए प्रधानमंत्री हर बार आम जनता से सहयोग मांगते है और कहते है प्लास्टिक हमारे पर्यावरण के लिए बहुत खतरनाक है और जलवायू मे हो रहे परिवर्तन इसका दुष्परिणाम है।

माननीय मोदी जी आपको एक बात कहना चाहता हूँ अगर अच्छा लगे तो मन की बात में हमारे मन की बात भी कर लिजियेगा। आप एक आदेश पर हस्ताक्षर क्यों नहीं कर देते है कि आज से भारत में किसी भी फैक्ट्री में सिंग्ल युज प्लास्टिक का उत्पादन नही किया जायेगा, जैसा कि आपने नोटबंदी में किया था कि रात के बारह बजे के बाद से 1000 और 500 के नोट बंद।

क्योंकि नगर निगम और प्राधिकरण गरीब लोगों को चालान काट रहे है और कंपनी मस्त होकर प्लास्टिक बनाये जा रही है। आखिर क्यों न बनाए ‘जब सईया भए हवलदार तो डर काहे कि ‘

मजे तो एनजीओ वाले की है हजारों करोड़ प्लास्टिक्स मुक्त भारत बनाने के नाम पर डकार लिया लेकिन प्लास्टिक मुक्त नही करवा पाये। सेल्फि से थोड़े ही न काम होता है, काम तो करना पड़ता है। है न मोदी जी। फिर कुछ अखबार वाले भी पीछे नही रहते सेल्फि को ही अपना न्यूज हेडलाईन बना लेते है। क्यों नही आखिर होली दिवाली भी तो देखनी है।

ये कहानी भी वैसा ही है जैसा कि ग्रेटा थमबर्ग की। जिसकों पराली जलाने की नुकसान के बारे में पता नही है वो दुनिया के सबसे बड़ा पर्यावरणविद है , जिसका नाम है ग्रेटा थमबर्ग और काम है किसानों को भड़काना। वो भी खालिस्तानियों के कहने पर।

एक और बात मोदी जी आडवाणी जी के जन्मदिन पर केक काटते है। लेकिन इसका विरोध कोई नही करता है न पार्टी के लोग और नही तो विपक्ष के लोग। क्योंकि केक भारतीय संस्कृति का हिस्सा नही। लेकिन अगर मोदी जी कभी हवन करने बैठ जाते है तो विपक्ष की तो लग जाती है————-आग और फिर छुटता है विरोध काम बम। लेकिन केक काटने पर किसी ने विरोध नही किया क्योंकि लिवरल लोग चाहते यही है कि भारतीय संस्कृति का विनाश हो।

मोदी जी आप हिंदू नेता होने के बाद केक काटते है तो आपको टोपी भी पहन लेना चाहिए था। कही ऐसा न हो कि आप भी शिवसेना की तरह अजमेर दरगाह पर चक्कर पर चक्कर लगाने लगे। क्योंकि राजनीति है सब चलता है। लेकिन इस बार जो आपने अजमेर के लिए चादर भेजा है भगवा रंग का देख कर मजा आ गया लेकिन यह समझ मे नही आया कि आपने भेजा क्यों ??

अब धरती बचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ धर्म गुरुओ के शरण में है। उनका कहना है कि अगर 2030 तक जलवायु परिवर्तन होने से नही रोका गया तो दुनिया तबाह हो जायेंगे। लेकिन यह तो भारत के ऋषि मुनियों नें पहले ही वेद में बता दिया है। वेद सिर्फ एक पंथ या मजहब के लिए नही है यह तो समस्त मानव और प्रकृति के कल्याण के लिए है। खैर दुर्घटना से देर भली, दुर्घटना तो टली। सुबह का भटका शाम को वापस लौटा तो उसे भूला नही कहते। यहा तो यही कहना होगा “देर लगी आने में लेकिन शुक्र है आये तो ”

पंजाब में किसान मजदूर एकता पर बड़े बड़े भाषण दिये जा रहे है। यही लोग अब से पहले बिहार और पूर्व से आने वाले लोगों को गाली देते थे। अब इनको किसान और मजदूर एकता समझ मे आने लगे है। असली किसान तो वह मजदूर है जो खुन पसीने से आपके खेत को सीचता है और अनाज उपजाकर आपको अमीर बना दिया लेकेिन उसको क्या मिला बाबा जी का ठुल्लू। अब मत समझाओं किसान मजदूर एकता।

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