कम्बल ऐसे बाटे जा रहे, जैसे आस्कर पुरस्कार ||

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आज कल सर्दियों की मौसम है दिल्ली तथा एन सी आर में कड़ाके की सर्दि पड़ने से गरीब और असहाय लोगों के लिए हर रात पुष की रात की तरह से गुजरती. मासूम तथा असहाय जिंदगी कई बार दम तोड़ने लगी है।

इसी बीच हर तरफ अखबार , टीवी सोशल मिडिया में कंबल बाटने की खबरे सुनने, देखने और पढने को मिल जाते है । लेकिन आप शाम या रात को सड़कों पर निकल परिये तो आपकों सैकड़ो की संख्या में मजबूरी में कहे या अव्यवस्था के कारण सिसकती जिदंगी देखने को मिल जाएगे| लेकिन यहाँ कोई नहींं आते है जो इनके कपकपाती जिदंगी पर कंबल डालकर इन्हे बचा लेे| शहर में बने रैन बसेरा तो चोरों और नीचों का अडुा बना हुआ है पता नहीं आँख झपकते आपकी कंबल गायब हो जाये।

दिन के दोपहरिया खनकते धूप में टेंट लगाकर बॉटी जाती है कंबल| कंबल बाटने के लिए एक ठेकेदार को ठेका मिलता उसके अनुसार ठेकेदार गरीब लोगों को लेकर आता है। क्षेत्र भाषा तथा धर्म का भी विशेष ध्यान रखा जाता है कहाँ लक्ष्य लगाना है। साथ ही बेचारे मिडिया वाले पत्रकार और युट्यूबर की टीम को निमंत्रण पत्र भेज दिया जाता है। रात होते सारे सोशल मिडिया पर खबर ऐसे चलती है जैसे कंबल नहीं आस्कर अवार्ड बाँटी गई हो|खैर किसी भी कारण से गरीबो का भला होता रहे |

पत्रकार भी बेचारा एड लेने के चक्कर में इन खबरों को ऐसे ही चलाते है, जैसे की बाबा साहेब फालेक पुरस्कार दिया गया हो| सबसे बड़ी बात ये समझ में नहीं आते की लोग गरीबो के साथ मज़ाक क्यों करते है | जो कम्बल लेकर जा रहा है उसको बाकई जरुरत है या फिर ये कमबल किसी के हाथ बिकने के लिए चले जाते है |

लोग गरीबों का सम्मान करते है या अपमान करने के लिए ये सब करते है एक कंबल उसे चार आदमी पकड़कर फोटो ऐसे शूट किया जाता है जैसे कम्बल नही बाबा साहेब फाल्के पुरस्कार दिए जा रहे हो |

(1) शास्त्र के मुताबिक दान वो होता है, जो समय स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाये (2) एक हाथ से दूसरे हाथों को यह पता न लगे कि किसने दिया है।

दान देने वालों को घमंड नहीं होना चाहिए और लेने वालोें को पता नही चले| ताकि उसको नजर झुकाने की जरूरत नहीं पड़े और वो भी समाज में शान से जिये। आज सोशल मीडिया के जमाना फोटो शेयर किया जायेगा| जिसने लिया उसके परिवार वाले के मन मे किस प्रकार की हिन्दू भावना पैदा होगा इस बात की भी ध्यान रखा जाना चाहिये | इसीलिए न्याय व्यवस्था मे अपराधियों के चेहरे ढक दिए जाते की कभी अगर वो समाज के अच्छे लोगों मे बेसुमार हो तो कोई उसे आइना नही दिखाए.

लेकिन दान राजनीतिक से प्रेरित होकर किया जा रहा है। समाज में अपना चेहरा चमकाने के लिए। गरीवों को एहसान तले दबाने के लिए आस्कार अवार्ड (कंबल) बाँटी जा रही है।

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