क्या सरकार और प्रशासन से मांग करने तक सीमित है विपक्ष की भूमिका।

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विश्व वैश्विक कोरोना वायरस से लगातार जुझ रहा है। हर तरफ प्रयास किये जा रहा है केैसे इस महामारी के निपटे । इस महामारी ने अमेरिका , ईटली और स्पेन जैसे देशो को घुटने के बल चलने को मजबूर कर दिया है। दुनिया के सभी देश के नेता राजनेता और अभिनेता अपने सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। लेकिन भारत की राजनीति इन सबसे अलग और अनोखा हैै। ऐसा क्यों है किस कारण से है ये बाते तो सभी जानते ही होंगे लेकिन कम से कम इस समय में ऐसा नही होना चाहिेए।

जहाँ एक तरफ पुलिस प्रशासन सरकार और मिडिया इस समय कंधा से कंधा मिलाकर काम कर रही है, वही इस समय में भी भारत के विपक्षी राजनैतिक पार्टी के लोग सिर्फ मांग करने मे लगे है। इनकी मानवता इस कदर गिरी हुई है। दिन रात गुंगा मिडिया के जरिये अपने सवाल चिपकाने की कोशिश और इस समय मे भी अपने रोटी को सेकने मे लगे है। बजाय इसके की लोगो की सहायता करें। सुबह से शाम तक ऐसे कई पत्र देखने को मिल रहे है जिसमे सिर्फ सरकार और प्रशासन से मांग किये जा रहे है।

अक्सर घर या समाज जो कि संगठित है उसमे देखा गया है कि गरीब से गरीब व्यक्ति अपना आहुति देता है। भारत आज विकास हुआ है ऐसा कुछ नही भारत कई हजार सालों से विकसित है जिसे अब लुटने की काम किया है जा रहा है। भारत के विकास के मुख्य कारण था संगठित होना। जहाँ उसमें फूट पड़ी वही कोरोना वायरस जैसे मुगल लुटेरों ने भारत पर आक्रमण किया।

अगर किसी घर मे किसी प्रकार के संकट आ जाये तो सभी का दायित्व होता है उससे निपटने की उस समय किसी को भी यह कहने की अधिकार नही होता है कि उसको करना चाहिए और उसको नही। अगर किसी के जमा पूंजी हो तो उस तत्काल उपयोग मे लाया जाता है। आज देश और मानव का मामला है। मानव जीवन दम तोड़ने पर लगा है और इस समय मे भारत के विपक्ष सरकार से सवाल करने और मांग करने मे लगा है।

कई दिनों के बाद आज सोनिया जी जागी और प्रधानमंत्री जी को सहयोग की आश्वासन दी। धन्य होना चाहिए ऐसे विपक्ष के नेता के भी कम से कम कांग्रेस के लोग विरोध तो बंद करेंगे। भले ही सहयोग न करे। केजरीवाल सरकार जिसके पास गाजिबाद इतना बड़ा राज्य है और उसे ही नही संभाल पा रहा है। तो सोचिये देश के प्रधानमंत्री की हालत क्या होगी। हालाॅकि पंजाब सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है इसमे कोई दो राय नही है। कई तस्वीरे पंजाब की दूसरे राज्य के लोगों के लिए प्रेरणादायक है।

आखिर पार्टी फंड कब काम आयेंगे?

भारत के नागरिक को भली भांति ज्ञात है कि राजनीतिक पार्टी के पास कई कई हजार करोड़ रूपये पार्टी के फंड मे परे हुए है आखिर वो किस दिन काम आयेंगे। आज इंसानी जीवन दम तोड़ रहा है और राजनीतिक पार्टियों को सवाल और शिकायतों के अलावा कुछ भी नही सूझ रहा है। आज जरूरत है कि राजनीतिक पार्टियाँ धन और बल दोनोे से सरकार के साथ खड़े रहे। अपने पार्टी फंड से भले ही सरकार की मदद नही करे लेकिन उनका मदद करें जो इस लाँक डाउन मे रोजी रोटी गँवा चुके है। रोज कमाने खाने वाले जो इस समय बेरोजगार है उसकी मदद करे।

जब कोई राजनीतिक पार्टी के रैली या जलसा हो उस समय तो करोड़ो रुपये दारु और मुर्गें पर पार्टियाँ खर्चे कर देती है क्योंकि उस समय कुर्सी दिखता है और करोड़ों की कमाई भी। लेकिन उस समय जब इंसान की जिंदगी दम तोड़ रही है मानवता को चरितार्थ करने की समय है लोग सवाल पूछ कर अपना भी और सरकार का भी समय खराब करने मे लगे है।

समाज के बीच मे रहने वाले लोगों को चाहिए की वो सामाजिक जिम्मेदारी को निभाये और लोगों को घर बाहर निकलने से रोकने के साथ-साथ जो लोग एक समय की भोजन नही जुटा सकते उनके लिए अपने पार्टी फंड से व्यवस्था करें। सरकार के पास मेडिकल एमेरजेंसी जैसी काम जो महत्वपूर्ण है उस तरफ ध्यान लगाने दे। कुछ स्वयं सेवा संस्थान स्वत: इस कार्य को कर रहे है और धन्यवाद के पात्र है। राजनीतिक पार्टियों को भी इस समय इस ध्यान देना चाहिए और धन और बल दोनों से सरकार के साथ खड़े हो।

राजनीतिक पार्टियों को मिडिया से भी सीखने की जरूरत है बहुत सारे भाई बिना लोभ लालच के दिन रात देश दुनिया के सही तस्वीरों को दिखाने मे लगे हुए है। कई लोगों को वेतन मिलता है उससे कही ज्यादा वो लोग है जो निस्वार्थ सेवा कर रहे है। उनको भी साधुवाद है। लेकिन यह सुझाव भी है किसी मिडिया के काम सिर्फ सरकार से पूछना नही विपक्ष से भी सवान पूछे जाने चाहिए। विपक्ष के भूमिका पर भी बहस होनी चाहिए।

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