‘स्वास्थ्य का अधिकार’ सिर्फ आयुर्वेद से ही संभव है : गुरु मनीष आयुर्वेदाचार्य

Spread the love

आयुर्वेद भारत का सनातन चिकित्सा पद्धति है लेकिन इतना सबकुछ होने के बाद भी भारत सरकार से मान्यता नही मिल पाया है क्योंकि लैब टेस्ट में आयुर्वेद खड़ा नही उतरता है जिसके लिए सर्टिफिकेट नही दिये जा रहे है। आज के समय में गुण से ज्यादा डिग्री की जरूरत है जिसका एक उदाहरण आयुर्वेद के साथ हो रहे भेदभाव को भी माना जा सकता है।

नोएडा प्रेस क्लब सेक्टर 29 मे आयोजित प्रेस वार्ता में आयुर्वेदाचार्य गुरू मनीष नें आनलाईन याचिका वेब पोर्टल राईट2हैल्थ.इन का अनावरण किया। उनका मानना है कि यह वेब पोर्टल भारतीय तथा विदेशों के लोगों को भी स्वास्थ्य के अधिकार दिलाने में मददगार साबित होगा। आनलाईन याचिका का उद्देश्य भारत को स्वस्थ्य बनाना है। इसके जरिये भारतीयों को सशक्त करने के तरीके के बारे में लोगों में जागरुकता फैलेगी।

आचार्य मनीष ने कहा कि स्वास्थ्य के अधिकार सिर्फ और सिर्फ आयुर्वेद के जरिये ही मिल सकते है। उन्होने इसके लिए आज एक हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया। आाचार्य ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला दिया और कहा कि 21 के अनुसार सभी व्यक्तियों को जीवन का अधिकार है और इस अधिकार को ‘स्वास्थ्य के अधिकार’ स्वास्थ्य के अधिकार के बिना प्राप्त नही किया जा सकता है।

उन्होने कहा कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार स्वास्थ्य की परिभाषा है स्वास्थ्य पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक भलाई की एक अवस्थाय है न कि केवल बीमारी की अनुपस्थिति। उसमे यह भी बताया गया है कि स्वास्थ्य के अधिकार प्रत्येक व्यक्ति के जन्मसिद्ध अधिकार है जो कि सिर्फ आयुर्वेद के माध्यम से ही संभव है। क्योंकि आयुर्वेद चरक संहिता के आयुर्वेद का मुख्य लक्ष्य स्वस्थ्य शरीर को बीमारी से मुक्त रखना है और रोग ग्रस्त शरीर से बीमारी को जड़ से हटाना है।

राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार 90 प्रतिशत आबादी अभी भी एलौपैथिक चिकित्सा की पक्षधर है और यही समय है जब भारत को आयुर्वेद पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। भारत सरकार के वोकल फाॅर लोकल थीम के जरिये भी आयुर्वेद का प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए। दवाई उद्योंग भारतीय को स्वास्थ्य देने का नाम पर भारी मुनाफा कमा रहे है।

गुरु मनीष ने कहा कि आयुर्वेद भारत के प्राचीन चिकित्सा पद्धति है लेकिन आज भी एक आयुर्वेदिक चिकित्सक को एक साधारण प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नही है। आयुष्मान भारत के तहत सरकार 5 लाख के एलौपेथिक इलाज के लिए सुरक्षा कवर दे रही है। जबकि आयुर्वेदिक अस्पतालों में भर्ती के लिए मरीजों को किसी प्रकार के बीमा कवर नही दिया जा रहा है जो कि आयुर्वेद के साथ सौतेला व्यवहार है। यह भी कहा जा सकता है कि अपने ही देश में प्रदेशी और अपने ही घर में अजनबी की तरह से व्यवहार किया जा रहा है।

%d bloggers like this: