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भनवारटंक में रेल पटरी के किनारे बसी माँ मरही माता की महिमा अपार,दर्शन व मन्नत को लेकर कोरबा जिले से रोजाना जाते है श्रद्धालु

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कोरबा:- बिलासपुर-कटनी रेल पटरी के किनारे जंगली वादियों के बीच विराजमान माँ मरही माता की महिमा अपार मानी जाती है।जहां से गुजरते ट्रेन की रफ्तार भी धीमी हो जाती है और यात्री हाथ जोड़े रास्ता पार करते है।मान्यता है कि यहां पहुँचने वाले हर श्रद्धालुओं की मुरादे माँ मरही माता पूर्ण करती है जहाँ लोग मंदिर में नारियल बाँध सच्चे मन से अपनी मुरादे पूरी होने की कामना माता दरबार में करते है।जिले से भी श्रद्धालु रोजाना यहाँ जाते है व माता के दर पे मत्था टेक अपनी मुरादों की झोली फैलाते है।

जिला मुख्यालय से पाली और सिल्ली-परसदा के रास्ते बेलगहना होते हुए लगभग 145 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एवं बिलासपुर से कटनी रेल मार्ग पर भनवारटंक में पटरी किनारे विराजित माँ मरही माता के मंदिर में प्रतिदिन भक्तों का सैलाब उमड़ा रहता है।जहाँ प्रातकाल से ही दूर-दूर से भक्तों की भीड़ मंदिर में मातारानी के दर्शन के लिए पहुँचती है।यह मंदिर भनवारटंक रेलवे स्टेशन के कुछ दूरी पर पटरी के किनारे स्थित है।मान्यता है कि माता के दरबार में कामना की झोली फैलाये पहुँचने वाला सख्स खाली हाथ वापस नही जाता।वहीं माँ का आशीर्वाद यात्रियों को मिल सके इसके लिए ट्रेनों की रफ़्तार भी मंदिर के समीप पहुँचते ही धीमी हो जाती है और यात्री हाथ जोड़ मंदिर पार करते है।माँ की महिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर हर श्रद्धालु मन्नत पूर्ण होने की ख़ुशी में मत्था टेकने अनेको बार पहुँचते है।कहा जाता है कि सन 1984 में यहाँ बड़ा रेल हादसा हुआ था जहाँ इंदौर-बिलासपुर-नर्मदा एक्सप्रेस में हादसे के बाद यहां पर रेलवे कर्मचारी और वन विभाग की टीम ने मरही माता की मूर्ति को स्थापित किया था और एक छोटे से मंदिर का निर्माण कराया गया था।और तब से आज तक यहाँ किसी प्रकार का कोई हादसा नही हुआ।

जिसमे एक मान्यता यह भी है कि मरही माता के आशीर्वाद से ही बिलासपुर-कटनी रेल रूट की जंगली और पहाड़ी क्षेत्र भनवारटंक में हादसों से रक्षा होती है।पटरी किनारे जंगलों के बीच स्थित माँ मरही माता मंदिर में भी अन्य देवी मंदिरों की तरह शारदीय एवं चैत्र नवरात्र पर विशेष पूजा अर्चना होती है तथा श्रद्धालुओं की ओर से जंवारा व ज्योति कलश प्रज्वलित कर पूरे नौ दिनों तक होने वाली विशेष पूजा अर्चना में भारी संख्या में लोग शामिल होते हैं।दूसरी ओर माता दरबार में मन्नत पूरी होने पश्चात बलि देने की परंपरा भी वर्षों से चली आ रही है।

लेकिन नवरात्र के 9 दिनों तक बलि पर रोक रहती है।रोजाना सुबह से ही यहां दूर दराज से पहुँचने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगता है जहां लोग मन्नत के लिए नारियल बांधकर दुआएं मांगते हैं।जिले से भी रोजाना बड़ी तादाद में लोग यहाँ जाते है।जिसमे कोई परिवार माता दर्शन तो कोई मन्नत को लेकर और कोई मन्नत पूरी होने की ख़ुशी में माँ मरही माता के दरबार में उपस्थित होते है।जहाँ दिन प्रतिदिन माँ के प्रति बढ़ती आस्था की भीड़ ही माँ की महिमा बतलाने के लिए काफी है।

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