कोरोना से ज्यादा भयावह स्थिति राजनीतिक पार्टियों की है।

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देश और दुनिया आज जिस परिस्थिति से गुजर रही है, मानवीय हृदय जिस तरह से विचलित हो रहा है। हर तरफ चिख पुकार की स्थिति है। न जाने कितने परिवारों नें इस महामारी में अपनों को खोया है, न जाने देश नें कितन रत्न खोये है। कोरोना महामारी और बढ़ते बेरोजगारी से देश और दुनिया कराह रही है। कोरोना से बच भी गये तो भूख उसके सामने मुंह बाये खड़ी है। सरकार प्रयास कर रही है उसके प्रयास के भी अपनी सीमा है।

देश में कोरोना महामारी के साथ-साथ अराजकता का माहौल बनया दिया गया है। इस महामारी के समय में एक दूसरे को मदद करने के बजाय लोगों के बीच में अफवाहों फैलाये जा रहे है। वर्तमान सत्ता को कैसे हटाया जाय उसके लिए तरह तरह के प्रयास किये जा रहे है। 65 साल तक देश के राज करने वाली मुस्लिम लीग समर्थित कांग्रेस 7 साल वाली बीजेपी से सवाल पूछ रही है। इस महामारी के समय में भी देश को बदनाम करने और अफरातफरी कैसे मचे इस पर गिद्धो की लगातार बैठक चल रही है। कुछ दलाल को बार-बार पीटने के बाद भी अपने आदत से बाज आना तो दूर नित्यदिन नये नये झुठ की कहानी गढ़ते जा रहे है।

ऐसा कहना गलत होगा की सरकार हर जगह पर सफल रही है। लेकिन ऐसा कहना भी बिल्कुल ज्यादती होगा कि सरकारे बिल्कुल विफल रही है। इसके बजाय यह करना ज्यादा उचित होगा कि इस महामारी के समय में भी देश के राजनीतिक के गंदे सोच और बिगड़े मानसिकता उभर कर आये है, और सरकार ज्यादातर जगह विफल रही नही है बल्कि उसे विफल किया गया है।

शमशान से मुर्दों को दिखाना और हाय तौबा मचाना तो ठिक था लेकिन एक टीवी पत्रकार तो शमशान घाट में ही बैठकर सीधे लाइव रिपोर्टिंग करने लगी। खैर पत्रकार का काम तो होता है कि लोगों को हकीकत से रूबरू करवाया जाय। लेकिन इतना भी रूबरू नही करवाने चाहिए कि आम जनता दहशत में भी आ जाये। हमें थोड़ा था देश और देश के बदनामी का भी ख्याल रखना चाहिए था जो कि नही रखा गया।

आईएमए इंडिया आर्गेनाईजेशन से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक 420 डाक्टर्स का कोरोना से मृत्यु हुए है, जिसमें सबसे ज्यादा 100 सिर्फ दिल्ली में हुए है। निश्चित तौर पर और भी हुए होंगे. क्योंकि सरकार रिपोर्ट उस हिसाब से बनाये जाते है कि लोग ज्यादा दहशत में न आने पायें और प्राईवेट टीवी चैनल की रिपोर्ट इसलिए होते है कि ज्यादा से ज्यादा दहशत दिखाकर टीआरपी बटोरे जायें। दूसरी तरफ जिसनें ऐड दिया है उस मालिक को भी तो खुश करना होता है अन्यता सिर्फ न्यूज पढ़ने वाले एंकर के लाखों रुपये की सैलरी कहाँ से आयेंगे।

महामारी के समय में आम नागरिक अपेक्षा रखता है कि देश के पक्ष हो या विपक्ष उसके इस दुख के घड़ी में उसके साथ हो। लेकिन क्या आपको लगा कि आपके प्रतिनिधी आपके साथ खड़ा है। बहुत सारे लोग इस समय में असहाय और अकेला महसूस कर रहे है। ऐसे में जरूरत था कि उनके प्रतिनिधी उनके इस दुख के समय में उनको भरोसा दिलाये। लेकिन ऐसा कही भी देखने को नही मिला है।

पहले जिस प्रकार से वेक्सीन पर अफवाहे फैलाकर कोरोड़ों डोज वेक्सीन को बर्बाद हो जाने दिया गया। बर्बादी यह दौरा अभी भी जारी है। देश के सरकार ने बर्बादी को रोकने के लिए वेक्सीन को देश के बाहर भेजना शुरु कर दिया। सबसे ज्यादा वेक्सीन की बर्बादी कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान में 11 लाख डोज हुआ है। अब वेक्सीन वेक्सीन करने वाले राजनीतिक कम और पारिवारिक पार्टियों के कारण यह बर्बाद कही न कही देश के लिए बड़ी क्षति है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में ऐसा लगता है कि शर्मिदंगी या फिर माफी जैसी किसी शाब्दिक तत्व की महत्व रही नही है। माफी मांगने के बजाय उल्टे सरकार से उलझने में बेहतर समझा जा रहा है वह सरकार जो दिन रात एक करके लोगों के जान बचाने की हर संभव कोशिश करती दिख रही है।

क्या कमी रही और कहाँ असफल रहे इस बात पर तो बाद में भी बहस की जा सकती थी। लेकिन विपक्षी पार्टियों के द्वारा हर प्रयास सरकारी कार्य में बाधा और बदनामी करने के लिए किया गया। सभी जानते है कि जनता कि जान माल की रक्षा करना राज्य सरकार के अधिन आते है। अगर वह विफल रहे तो उनका ठिकरा केन्द्र पर क्यों फोड़ा जा रहा है। अगर राज्य सरकारे लोगों के जान माल की रक्षा नही कर सकती है तो उन्हे राज्य बने रहने का कोई अधिकार नही है। आखिर क्यों जनता के टेक्स के पैसे को मंत्री और उनके ताम झाम पर खर्चा किया जा रहा है। उस पैसे से स्कूल और अस्पताल बनाये जा सकते है।

पिछले दिनों आये डाटा जो कि अपने आप मे एक चौकाने वाला था, देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 400 एमटी आक्सीजन की मांग थी जबकि दिल्ली को 700 एमटी। उत्तर प्रदेश की आबादी 23 करोड़ की है और दिल्ली की राजधानी 2.5 करोड़ की है। आक्सीजन पर मचे बवाल तो मिलार्ड ने भी पूछ लिए कई सवाल, आडिट के बात आते ही न सामने आये मिलार्ड न केजरीवाल। आडिट के बातों से ही आक्सीजन ही आक्सीजन हो गयी दिल्ली। कर्नाटक मे 150 कोविड मरीज की फर्जी बेड रखने की खबर हो या फिर दिल्ली में आक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी हो, सभी ने सुर्खियाँ बटोरा है लेकिन उनका हुआ कुछ नही। जिनके परिजन चले गये उनका हाल तो पूछते मिलार्ड और फांसी पर चढ़ाते आक्सीजन के कालाबाजरी करने वालो को जैसा कि मिलार्ड ने स्वयं ही घोषणा की थी कि हम कालाबाजारी करने वालो को फांसी पर चढ़ा देंगे। जिम्मेदारी राज्य सरकार की और गिरफ्तारी केन्द्र सरकारी की वाली रवेया एक बार माननीय न्यायालय को भी संदेह के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया।

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