पायलटों के साहस और एटीसी ने बचाई 370 यात्रियों की जान

4 months ago Vatan Ki Awaz 0

। विमान का ईंधन खत्म हो रहा है।हम बुरी तरह फंसे हुए हैं। एयर इंडिया के सीनियर कमांडेंट रुस्तम पालिया के न्यू यॉर्क के जॉन एफ केनेडी (जेएफके) एयरपोर्ट एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को बोले गए ये कठोर शब्द काफी डरावने थे। घटना 11 सितंबर की है। पालिया और कैप्टन सुशांत सिंह एयर इंडिया की दिल्ली-जेएफके AI 101 नॉनस्टॉप बोइंग 777 विमान उड़ा रहे थे। विमान में 370 यात्री थे। लैंडिंग से ठीक पहले विमान के कई उपकरणों ने काम करना बंद कर दिया था। तकनीकी खराबी के कारण विमान हवा में ही करीब डेढ़ घंटा घूमता रहा।

इस दौरान दोनों पाटलटों ने अपने साहस और कंट्रोलर की मदद से स्थिति को संभाला। इन्स्ट्रमन्ट लैंडिंग सिस्टम (ILS) अंतिम समय में फेल हो गया। जिसके कारण कैप्टन पालिया और सिंह को जेएफके पर विमान को उतारने का इरादा छोड़ना पड़ा। ILS वह सिस्टम होता है जिसकी मदद से पायलट रात या दिन या फिर खराब मौसम में भी रनवे पर विमान को सही तरीके से उतार सकते हैं। विमान को इसके बाद करीब डेढ़ घंटा तक हवा में ही रहना पड़ा। इस दौरान विमान के पायलट समस्या के समाधान और विमान को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए न्यू यॉर्क के एक एयरपोर्ट जेएफके एटीसी से बात करते रहे। न्यू यॉर्क में खराब मौसम के कारण पायलट किसी नजदीक के दूसरे एयरपोर्ट पर बेहतर दृश्यता के साथ उतरने की संभावना पर भी बात कर रहे थे।

विमान में ईंधन की कमी के कारण उसके तुरंत लैंड करने की जरूरत थी। ILS फेल हो जाने के कारण लैंडिंग के लिए बेहतर दृश्यता वाले रनवे की जरूरत थी। AI 101 के कॉकपिट और जेएफके एटीसी के बीच बातचीत का ट्रांसक्रिप्ट से पता चलता है कि कैसे दोनों पायलटों ने साहस दिखाया और कैसे जेएफके के कंट्रोलर उन्हें भरोसा दिला रहे थे कि खराब स्थिति के बाद भी प्लेन सुरक्षित रूप से लैंड कर जाएगा।

जेएफके पर AI 101 लैंडिंग क्रम में एक विमान के पीछे था। तभी कॉकपिट में चेतावनी की घंटी बज उठी। चेतावनी के बाद प्लेन ने एक और चक्कर लगाया और दूसरे प्रयास में फिर नीचे उतरने की कोशिश कर रहा था। तबतक सिटस्ट की खराबी दूसरे उपकरणों में फैल गई थी।

कैप्टन पालिया और सिंह ने शांतिपूर्ण तरीके से और बिना घबराए एटीसी को बताया कि लोकलाइजर खराब हो चुका है। विमान में कई तरह की दिक्कतें पैदा हो गई हैं। अगर हम इसके बाद भी आगे बढ़ते हैं तो पता नहीं चीजें ठीक हो पाएंगी या नहीं। तब जेएफके कंट्रोलर ने उन्हें समस्या के समाधान का तरीका बताया।

तब एयर इंडिया के पायलट ने बेहतर दृश्यता की उम्मीद में स्टुअर्ट एयरपोर्ट पर दृश्यता के बारे में जानकारी मांगी। पायलट ने कहा, ‘हमारे विमान में कुछ दिक्कतें आ गई हैं और इसके कारण हम ILS नहीं कर पा रहे हैं। हम आगे क्या करें इसके बारे में सोच रहे हैं।’

पालिया ने एटीसी से कहा, ‘ऑटोलैंड नहीं है क्योंकि हमारे दो रेडियो अल्टिमीटर भी फेल हो गए हैं। ट्रैफिक कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम भी फेल हो गया है। विमान के कई उपकरण खराब हो गए हैं।’ तब पायलट ने एटीसी से किसी ऐसी जगह के बारे में पूछा जहां वे सुरक्षित उतर सकें।

जेएफके एटीसी ने कहा, ‘ओके, मैं कुछ रिसर्च करके आपको कुछ सेकंड्स में बताता हूं।’ जेएफके कंट्रोलर्स और एयर इंडिया ने अन्य विकल्पों पर भी चर्चा की। न्यू यॉर्क के नजदीक नेवार्क, बोस्टन लोगान, वॉशिंगटन डलास जैसे विकल्पों पर चर्चा की गई। कैप्टन पालिया ने एटीसी से कहा, ‘हम बोस्टन में भी चेक कर रहे हैं। हमारे पास काफी कम ईंधन बचा है, इसलिए हमें जल्दी फैसला लेना होगा।’

इसके बाद एटीसी ने कहा, ‘AI 101 आपके पास कितने मिनट का ईंधन बचा है।’ तभी नेवार्क EWR में दृश्यता का स्तर बेहतर हो गया। पायलट और एटीसी ने नेवार्क में उतरने का फैसला किया और विमान वहां के लिए बढ़ गया।

कैप्टन पालिया ने कहा, ‘जैसे ही मुझे विजुअल मिला, मैं आगे बढ़ गया। ILS का व्यवहार अप्रत्याशित था।’ तब एटीसी ने पूछा और कौन-कौन से सिस्टम काम नहीं कर रहे हैं। कंट्रोलर ने कैप्टन पालिया से पूछा, ‘दोनों ILS, दोनों रेडियो अल्टिमीटर के अलावा विमान के और कौन-कौन से उपकरण काम नहीं कर रहे हैं।’ जवाब मिलने के बाद कंट्रोलर ने कहा कि जब आपको मौका मिले तब आप विमान में सवार यात्रियों की संख्या और ईंधन की जानकारी दें।

विमान में उस समय 7,200 किलोग्राम ही ईंधन बचा था। करीब 14 घंटे की उड़ान के बाद यह काफी कम था। तब कंट्रोलर ने AI 101 से पूछा किया आपको मुझसे किसी और प्रकार की मदद की जरूरत है। जब कैप्टन पालिया ने कंट्रोलर को उनकी मदद के लिए धन्यवाद कहा, तब कंट्रोलर ने कहा, ‘काश मैं आपके लिए कुछ और भी कर पाता।’

EWR टावर ने पायलटों से कहा कि वे नीचे आ रहे हैं। इसके बाद विमान के पायलटों ने जरूरी कदम उठाते हुए और अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए विमान को सुरक्षित उतार लिया। विमान में कैप्टन पालिया और सिंह के अलावा कॉकपिट में दो और पायलट डी एस भट्टी और विकास भी थे। लंबी यात्रा के कारण कॉकपिट में दो और क्रू की सीट होती है।

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘विमान की जांच की जा रही है। इस तकनीकी मुद्दे को एयर इंडिया के पायलटों द्वारा बेहतरीन तरीके से सुलझाने के लिए उनकी तारीफ भी की गई है। पायलटों का यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए विमान को EWR ले जाना बेहतरीन फैसला था। एयर इंडिया के लिए उसके यात्रियों की सुरक्षा सर्वप्रथम है।’

 

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