एक तरफ ‘सेवा ही संगठन है’ दूसरी तरफ आपदा में अवसर की तलाश।

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मोदी सरकार के 7 साल पूरे होने पर देश भर में ‘सेवा ही संगठन है’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है तो दूसरी तरफ विपक्ष आपदा में अवसर की तलाश में है। कुछ दिन पहले ही देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में मिली बड़ी शिकस्त से यह तो साफ हो गया है कि सेवा और संगठन के बीच में स्वयं पार्टी के लोग भी अवसर की तलाश में है। कही न कही बंगाल में चुनाव के बाग हुए हिंसा और पार्टी की चुप्पी भी लोगों को असुरक्षित भावना को जन्म दिया है। आखिर देश के सबसे चर्चित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपने ही प्रदेश के पंचायत चुनाव में अगर शिकस्त झेलना पड़े तो इससे क्या समझा जाना चाहिए ?

कोरोना काल में प्रदेश में 3 मंत्रियों ने जान गवाये है, उनकी जगह पर किसी नये चेहरे को लाने की जरुरत है या फिर पार्टी के पूराने कर्णधार को इस पर लगातार बैठकों की दौर चल रहा है। इसी बीच में एक नया नाम अरविन्द शर्मा का उभरा है, बताया जा रहा है कि अरविन्द शर्मा मोदी के काफी करीबी रहे है और कोरोना काल में प्रधानमंत्री मोदी नें उनका तारीफ काशी माॅडल कहकर किया है। तो क्या समझा जाना चाहिए कि देश के शीर्ष नेतृत्व अब प्रदेश में बीजेपी का नया चेहरा अरविन्द शर्मा को बनाने जा रहा है। इसे ब्राह्मण वोट साधने की कवायद भी माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के दावेदार केशव प्रसाद मौर्य और योगी आदित्यनाथ के बीच भी काफी तल्खी रही है। माना जाता है कि योगी आदित्यनाथ केशव प्रसाद मौर्य को जो दर्जा देना चाहिए था नही दिया। इसको लेकर दोनों के बीच में काफी मनमुटाव है। केशव प्रसाद मौर्य को ओबीसी वोट बैंक माना जा रहा है। यह बात बिल्कुल सत्य है कि बीजेपी को वोट बैंक का ध्यान भी रखना होगा। लेकिन केशव प्रसाद मौर्य जो कि आरएसएस से जुड़े रहे है लंबे समय तक क्या चाहेंगे की पार्टी में केशव VS मौर्य हो जाये। क्या यह आरएसएस संस्कृति के लिए घातक नही होगा। जबकि आरएसएस के लिए पद कोई मायने नही रखता है।

सोशल मिडिया की बात करे तो योगी V/S मोदी का भी ट्रैंड चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस समय में मोदी से ज्यादा योगी के चाहने वाले है। तो क्या योगी को अगला प्रधानमंत्री के रुप में प्रोजेक्ट किया जायेंगा ? इसका जबाब अभी बांकि है। सत्ता में शाख बहुक महत्वपूर्ण है, क्या मोदी जी चाहेंगे कि उनकी शाख योगी जी के सामने बौना साबित हो जाये ? केन्द्र में नीतिन गडकरी नामक मंत्री है जो दिन रात अपने मेहनत और बेहतरी मैनेजमेंट के लिए जाने जाते है। लोगों का यह भी मानना है कि वो देश के अगला प्रधानमंत्री हो सकते है।

हिंदुओं के लिए एक मात्र विकल्प है बीजेपी

सबसे बड़ी बात बीजेपी में हो रहे कुठराघात की है। अगर बीजेपी वाले आपस में ओबीसी ठाकुर ब्राह्मण में बट जाते है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान उनके समर्थकों को होगा जैसा कि बंगाल के चुनाव में हुआ है और हो रहा है। उसके बाद वोटर की। अगर लोगो का माने तो हिंदुओं के लिए एक मात्र विक्लप है बीजेपी। अगर बीजेरी बंट जाता है तो निश्चित तौर पर भारत के सनातनी के लिए बहुत बड़ा संकट खड़ा होगा। 1400 सालों से लगातार चल रहे लूट-पाट हत्या बलात्कार को और हवा मिलेगा।

पार्टी में परिवार या परिवारिक पार्टी है बीजेपी।

पिछले दिनों बीजेपी के लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर के भाई के बीडीसी चुनाव में निर्विरोध जीत के बाद यह सवाल उठा था कि कौन कहता है कि बीजेरी परिवारवाद को बढावा नही देता है ? सवाल तो जायज था ?

लेकिन यहाँ पर कुछ भिन्नता है बांकि के पार्टियों से, बीजेपी एक राष्ट्रीय पार्टी है और इसमें भी एक ही परिवार के कई लोगों को बड़े बड़े पद मिले हुए है। बात बिल्कुल सत्य है, नंदकिशोर खुद विधायक हैं, ग्राम प्रधान उनका भाई है और अब दूसरे भाई को प्रमुख बनाना है। इसे बिल्कुल परिवारवाद नहीं कहते भाजपा की नजर में।

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी सुल्तानपुर से भाजपा सांसद हैं। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा वित्त राज्य मंत्री हैं। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत राजे झालावाड़ से भाजपा सांसद हैं। गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह नोएडा से भाजपा विधायक हैं हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पीके धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर भाजपा सांसद यूपी के पूर्व सीएम और कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह भाजपा सांसद हैं। कल्याण सिंह के ही पोते संदीप सिंह योगी सरकार में मंत्री।

दूसरी तरफ भी हमे देखने की जरुरत है : सबसे बड़ी पार्ची कांग्रेस में सिर्फ गांधी परिवार है बांकि सब बेकार है, पूरी पार्टी इन्ही परिवारों के चारों तरफ घुमता दिखता है। पार्टी के कल्याण से ज्यादा गांधी परिवार के कल्याण की चिंता है। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी, के सुप्रिमों बहन मायावती, कुर्सी पर जन्मसिद्ध अधिकार है। समाजवाद में जन्में परिवारवाद का सबसे बड़ा उदाहरण है समाजवादी पार्टी। यह सामाजिक नही अपितु एक परिवारिक पार्टी है, यह तो सही है कि इसकी स्थापना समाज के लिए हुई थी, लेकिन अब परिवार पहले और समाज वाद में हो गया है।

बिहार के आर जे डी को देख लिजिए। पूरे परिवार के कब्जे में है क्या किसी पार्टी से कार्यकर्ता की मजाल भी है कि इसके खिलाफ आवाज उठा सके। जनता दल से टुटकर बने राजद में लालू के पूरा परिवारिक विरासत है और वही स्वयं-भूम है। नीतिश कुमार की पार्टी जदयू फिलहाल इन परिवारवादियों के गिरफ्त से बाहर है हालाँकि इस पर भी नीतिश कुमार का कब्जा है। कई बार जदयू को भी परिवारवादी बनाने की कोशिश राजद के द्वारा किया गया लेकिन अभी तक सुरक्षित है।

बंगाल के ममता बनर्जी टीएमसी के अकेली मालकिन है। नेता की क्या औकात की आवाज उठा लेे, वोट नही देने वाले जनता तक को नही बख्श रही है। हाल के चुनाव और उसके बाद हो रहे चुनावी हिंसा को आप इस परिपेक्ष्य में देख सकते है।

महाराष्ट्रा में शिवसेना और प्रदेश के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनका पुत्र आदित्य ठाकरे शिव सेना के लिए एक मात्र विकल्प है। इसके अलावा भी पार्टी में जनता के बीच में काम करने वाले लोग होंगे लेकिन पार्टी के संविधान परिवारवाद के कलम से लिखा गया है। इसी प्रकार से भारत के तमाम पार्टियों के इतिहास या वर्तमान को देखिये तो आपको समझ में आयेगा कि हिदुओं के लिए बीजेपे के अलावा कोई विकल्प नही है।

परिवार बीजेपी में भी है लेकिन बीेजेपी किसी एक परिवार की पार्टी नही है। यह बात बीजेपी के नेता और कार्यकर्ताओं को भी समझना चाहिए कुर्सी के लिए भागा दौड़ी करने के बजाय राष्ट्र निर्माण के लिए कार्य करना चाहिए। जिस प्रकार से विपक्ष के लोग आपदा में अवसर की तलाश में है , जरुरत है कि बीजेपी एक बार पुन: आत्म मंथन करे।

बीजेपी के नेताओं को अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहना चाहिए अन्यथा कोई भी आपके झंडा को लेकर खड़ा नही रहना चाहेगा। जिस प्रकार से बंगाल में कार्यकर्ताओं मे निराशा है , उन्हे घर छोड़कर भागना पड़ा है। उससे कही नही कही बीजेपी के प्रति भी लोगों के मन में आशंका जन्म लिया है, लोग कहने लगे है क्या बीजेपी भी 1947 की कांग्रेस बनने जा रही है। बीजेपी सबका साथ सबका विकास का नारा दे रहे है लेकिन आपका विकास सबको नही चाहिए। 30 प्रतिशत आपको कभी वोट नही देने वाला है जिसके लिए आप 80 प्रतिशत को अनदेखी करने में लगे है।

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