अब लीज रेंट 4 किस्तों में देना होगा आसान, प्राधिकरण पार्दशिता के साथ करे गणना : राईज

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नोएडा ग्रेटर नोएडा के घर खरीदारों को राहत देने को लेकर प्राधिकरण लेने जा रही है बड़ी निर्णय। आगामी 18 जनवरी को होने वाली बोर्ड बैठक में लिया जायेगा। जिसमें घर खरीदारों को लीज रेंट चार किस्तों में भुगतान करने की छुट दिये जा सकते है।

नोएडा शहर के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता अनिल के गर्ग (RISE) Right initiative for social Empowerment) ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे घर खरीदारों को अवश्य ही राहत मिलेंगे। लेकिन लीज रेंट को पार्दशी तरीके से प्राधिकरण के प्लानिंग और फाईनेंस डिपार्टमेंट के द्वारा निर्धारित किया जाना चाहिए। क्योंकि यह पैसा प्राधिकरण के खाते में जाते है इसलिए इसका निगरानी भी प्राधिकरण को ही करना चाहिए।

अगर प्राधिकरण इसका गणना बिल्डर के ऊपर छोड़ता है तो संभव है कि बिल्डर यहाँ भी घर खरीदार के साथ धोखा कर सकता है। इसलिए प्राधिकरण स्वयं ही बिल्डर को लीट रेंट का गणना करके भेजें। कई बार देखा गया है कि बिल्डर घर खरीदारों से 50 के जगह 75 वसूलते है। उसमें बहुत से चार्ज अलग से लगा लेते है। जबकि प्राधिकरण जो लीज रेंट लेती है उसमें सारे सुविधा, सीवर, पानी, सड़क सब जोड़कर लेती है।

प्राधिकरण बिल्डर को गणना करके दे।

प्राधिकरण अगर किसी ग्रुप हाउसिंग को जमीन आवंटन करती है 10 हजार स्क्वाईरमीटर। तो उसकी गणना कुछ इस प्रकार से किए जा सकते है। कुछ एरिया 10 हजार sqmt, जो कि 30 हजार प्रति sqmt के दर से बिल्डर को दिया जाता है तो कुल कीमत होगा 30 करोड़। अगर उसका लीट रेंट प्रति वर्ष 1% के हिसाब से है तब एक समय में 15 % के हिसाब से 30ंCR x 15% = 4.50 करोड़ होगा।

अब अगर इस आवंटित प्लाट पर FAR 3.5 के हिसाब से अनुमति है तो कुल FAR 3500 sqMT होगा यानि 3,76600 SQFT । कुल कारपेट एरिया तथा इस एरिया का वन टाईम रेंट 4.50 करोड़ है तब उसकी गणना होगा। इस प्रकार से 119.49 रुपये प्रति SQFT के हिसाब से एक हजार sqmt पर 1 लाख 20 हजार लिया जाना चाहिए। प्राधिकरण को लीज रेंट सिर्फ और सिर्फ कारपेट एरिया पर ही लेना चाहिए सुपर एरिया पर लेना गलत है और इस अभ्यास को बदलना चाहिए। इस राशी का जिक्र लीज डीड में भी किया जाना चाहिए।

प्राधिकरण की जिम्मेदारी है कि बिल्डर को इस प्रकार की गणना से अवगत करवाये। क्योंकि लीज रेंट को प्राधिकरण को लेना है तो बिल्डर को बीच में क्यों शामिल किया जा रहा है। वह स्वयं से वसूली करे ताकि बिल्डर किसी भी प्रकार से मनमानी नही कर पाये और घर खरीदारों को राहत मिले।

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