नोएडा यातायात पुलिस का सराहनीय कदम, सवारी आटो का कलर कोडिंग

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नोएडा यातायात पुलिस का सराहनीय कदम। सवारी आटो के चेकिंग के बाद अब कलर कोडिंग करने का योजना मंजूर। कलर कोडिंग के जरिये रूट होगा डिसाईड, यातायात पुलिस को भी ट्रैस करने में होगा आसान। राईज एनजीओ लगातर उठा रहे है आवाज।

नोएडा यातायात पुलिस के द्वारा अब नोएडा को स्मार्ट सिटी बनाने और स्मार्ट परिवहन व्यवस्था सुचारू करने के लिए सवारी आटो का कलर कोडिंग करने की घोषणा किया है। जिसका राईज एनजीओ ने स्वागत किया है। शहर के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता श्री अनिल के गर्ग राईज ( RIGHT INTIATIVE FOR SOCIAL EMPOWERMENT) जो कि समय समय पर जनहित में आवाज उठाते रहे है। उनका कहना है कि यह कदम सराहनीय है और इस व्यवस्था को बहुत पहले ही बहाल किया जाना चाहिए था लेकिन अब भी अगर हो रहा है तो उसका हम स्वागत करते है।

हाल ही में विशाल इंडिया नें शहर में वैध और अवैध तरीके से चल रहे आटो रिक्शा पर सवाल उठाते हुए समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें शहर के यातायात व्यवस्था पर सवाल उठाया गया था। समाचार के मुताबिक शहर में चल रहे आटों में से 25 प्रतिशत आटों वालों के लिगल कागजात पूरे नही है। जिस गाड़ी को सड़क पर चलाए जा रहे है उसकी दशा देखकर ऐसा नही लगता है कि इन गाड़ियों का फिटनेस कभी भी चेक किया गया होगा। एक ही स्टैण्ड पर बहुत सारे आटों का एक साथ खड़ा होना और सवारी के लिए और सवारियों के साथ गाली गलौच करना एक स्वभाव सा बन गया है। एक साथ बहुत सारे सवारी आटो के एक साथ खड़े होने से सड़क पर ट्र्रैफिक व्यवस्था को सुचारू तरीके से चलाने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। एक 6 सीटर आटों में 10-11 सवारी लेकर जाते है मना करने सवारियों के साथ गाली गलौच किए जाते है साथ ही ओवरलोंडिंग भी होते है।

खबर का तेजी हुआ असर

इस खबर का तेजी से असर हुआ अगले दिन ही नोएडा यातायात पुलिस के द्वारा नोएडा सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन के पास एक अभियान चलाकर 200 से ज्यादा आटो वालों का चलान किया गया तथा कुछ आटो को सीज भी किया गया। इसके साथ ही कुछ आटों चालक को सवारी के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए इसके बारे में जागरुक भी किया गया।

नोएडा के प्रतिष्ठित अखबार में छपी खबरों के मुताबिक अब नोएडा पुलिस नें इन आटो को व्यवस्थित करने के लिए कमर कस लिया है। अब इन सवारी आटों का कलर कोडिंग किया जायेगा। लेकिन इससे पहले शहर में चल रहे सभी सवारी आटो के बारे में डाटा जमा किया जायेगा।

राईज एनजीओ के द्वारा इस बात की सराहना करते हुए कुछ सुझाव दिये गये है। जिसमें सभी आटों का रूट निश्चित करने और किसी भी स्टाप पर आटों का जमा होने का परमिशन नही होना चाहिए। सवारी होगा तो अपने आप बैठ जायेगा अन्यथा आगे चलते रहना चाहिए। इसके अलावा सवारी आटों का स्टाप भी मुंबई के तर्ज पर बनाना चाहिए। शहर में बहुत सारे गाड़ी समाजवादी शासन के दौरान खरीदे गये थे जिनका कागज पूरा नही उनका फिटनेस चेक करके उनकों अनुमति देना चाहिए , जिससे सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी। फिटनेस भी एक स्मार्ट सिटी के तरह दे चेक होनी चाहिए। आटों ड्राईवर का भी युनिफार्म निर्धारित किये जाने चाहिए।

समय-समय पर सामाजिक जागरूकता जरूरी

चालक समाज के वह हिस्सा है जो हमेशा समाज के बीच में रहता है और सबसे ज्यादा लोगों से उसका मेलजोल रहता है। ड्राईवर सबसे उत्तम पेशा होने के बाद भी बहुत बदनाम है जिस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। हमेशा किसी न किसी के जान उसके हाथ में होता है। सबसे ज्यादा नशे की लत भी इन्ही लोगों के बीच में होते है जो दुर्घटना के कारण भी बनते है। जरूरी है कि इनका समय-समय पर यातायात पुलिस के निगरानी में समाजिक जागरुकता हो। क्योंकि एक ड्राईवर एक ड्राईवर ही नही एक बाप है, एक पिता है, एक पति है एक पुत्र है। समाज में इनकी जिम्मेदारी सबसे ज्यादा है इसलिए इनका जागरुक होना बहुत जरूरी है।

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