नोएडा: घर में आईसोलेट मरीजों को जोमेटो से कोविड मेडिसिन किट भेजे जा रहे है।

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जिला गौतमबुद्धनगर में लगातार प्राप्त हो रहे शिकायत को देखते हुए अब नोएडा शासन तथा प्रशासन के द्वारा घर में आईसोलेट कोविड पेशेंट को जोमेटों के माध्यम से मेडिसिन किट सप्लाई किये जायेंगे। जिससे समय पर दवाई मिल सके और मरीज को कही भागना दौड़ना न पड़े।

राईज एनजीओं के द्वारा लगातार इस बात को लेकर शासन प्रशासन से मांग थी कि मेडिसिन डिस्ट्रीब्यूशन और उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। श्री अनिल के गर्ग नें कहा कि कोविड पेशेंट को मेडिसिन कोविड किट के लिए एक सक्रिय पहल होनी चाहिए। ऐसे पेशेंट एक तो बाजार नही जा सकते है, अगर जाते भी है तो उनका मेडिसिन मिलते नही है। दूसरी बात बाजार में कालाबाजारी के दौर चल रहे है। 10 पैसे कि टेबलेट को 5 रुपये वसूले जाते है।

15 अप्रैल कि सरकार के आदेश होने के बावजूद लोगों को उनके घर मेडिसिन नहीं जा रहा था। लेकिन अब जिलाधिकारी , और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा यह कदम उठाये गए है तो निश्चित ही स्वागत योग्य है। बस ऐसा ना हो कि एक दो दिन करने के बाद बंद कर दिया जाय। इसे सुनिश्चित करना चाहिए।

इसके लिए प्राधिकरण, पुलिस और रेजिडेंसियल वेलफेयर एसोसिएशन का भी सहयोग लिये जाने चाहिए। इसके अलावा अगर किसी को बेड या आक्सीजन की जरुरत पड़ती है तो भी इन लोगों से सहायता लिया जा सकता है। क्योंकि इनको ज्यादा जानकारी होते है कि किसको जरुरत है और किसको नही। इस तरह से मरीज की रिकवरी रेट भी बढ़ेगी और शासन प्रशासन पर जोर भी कम पड़ेंगे। किट वितरण के लिए कुछ मेडिकल स्टाफ बहाल नियुक्त करे इस काम के लिए। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग को होम आईसोलेशन में रह रहे मरीजों पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

नोएडा शहर में पथ विक्रेता को भी नजर में रखा जाय।

रेहड़ी पटरी संचालक एसोसिएशन के महासचिव श्री श्याम किशोर गुप्ता ने कहा है कि जो मेडिकल किट 20 दिन पहले आनी थी वो आज आ रही है। लेकिन देर आये दुरुस्त आये अब इसका सप्लाई सुनिश्चित किये जाने की जरूरत है ताकि कोई भी मरीज परेशान न हो। इस शहर में बड़ी संख्या में रेहड़ी पटरी वाले है जो कि हमेशा लोगों के बीच रहते है उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि कोरोना को फैलने से रोका जा सके। इसके साथ ही उनको वेक्सीनेशन भी किया जाना चाहिए। एक वर्ग जो लगातार साल भर से रोजी रोजगार से परेशान है।

स्वास्थ्य विभाग तथा पुलिस के माध्यम से छोटे मोटे लक्षण वाले मरीजों का निगरानी होनी चाहिए। अगर छोटे मोटे लक्षण दिखता है तो उनको मेडिकल किट के माध्यम से इलाज शुरु हो सके। अगर शुरुआत में ही काबू कर लिया जायेगा तो निश्चित तौर पर हम इस प्रसार को रोक पायेंगे। अगर किसी को जरूरत पड़ता है कि आक्सीजन लगाना ही पड़ेगा, या वेटिंलेटर की आवश्यकता है तो स्वास्थ्य विभाग अपनी निगरानी में उसे भर्ती कर सकेगा और ज्यादा पैनिक भी नही होगा। इसके अवाला वेक्सीनेशन के कार्य भी जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

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