नोएडा बिजली विभाग की मनमानी.. उल्टे चोर कोतवाल को डांटे

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21 जनवरी 2021, नोएडा

नोएडा के सेक्टर 45 स्थित कांशी राम कॉलोनी की है। जहां फ्लैट नंबर 91-बी में रमाकांत दुबे नाम से निवासी परिवार सहित रहते हैं जिनका बिजली बिल जमा करने की अंतिम तिथि (ड्यू डेट) 21 जनवरी से पहले ही 19 जनवरी को क्षेत्रीय बिजली कार्यालय नोएडा सेक्टर-44 के लाइनमैन द्वारा घर का बिजली कनेक्शन काट दिया जाता है। तब से उपभोक्ता रमाकांत दुबे बेवजह, आज 21 जनवरी तक बिना बिजली के अंधेरे में परिवार सहित समय काट रहे हैं जबकि इस मामले में इनकी नाम मात्र भी गलती नहीं है।

कारण जानकर आपको भी आश्चर्य होगा की.. 14 जनवरी को मीटर रीडिंग करने वाला युराज नाम से कर्मचारी आता है और गलती से वास्तविक यूनिट से 1000 यूनिट अधिक का बिल निकाल कर रमाकांत दुबे के घर में डाल कर चला जाता है जिस बिल भुगतान की अंतिम तिथि 21 जनवरी होती हैं उपभोक्ता रमाकांत दुबे ने जब उस बिल को देखा तो पाया कि मीटर की अंतिम संख्या 8544 की जगह 9544 के हिसाब से सिर्फ 23 यूनिट की जगह 1023 यूनिट का बिल निकाल कर दे दिया गया है। उपभोक्ता ने जब मीटर रीडिंग करने वाले उस युराज नाम के कर्मचारी से बात की तो गलती स्वीकार करते हुए, उसने कहा कि मुझसे गलती हुई है जिसमें मेरी गलती की वजह से 8544 की जगह 9544 का निकल गया था। और उसने, उसी बिल पर हस्तलिखित सुधार करते हुए 8544 लिखा, और सिर्फ 23 यूनिट का बिल देने की व बिल सुधार करवाने की बात कह कर चला गया।

लेकिन यहां मामला और दिलचस्प हो गया कि बिल सुधार करवाने की जगह 19 तारीख को संबंधित कार्यालय सेक्टर-44 बिजली घर के लाइनमैन द्वारा उपभोक्ता का कनेक्शन काट दिया जाता है तब से बिजली उपभोक्ता रमाकांत दुबे बिजली दफ्तर का चक्कर काट-काट कर परेशान हैं। उन्होंने लाइनमैन व संबंधित जेई से बात की… तो जेई ने उल्टे उपभोक्ता को डांटते हुए और बिजली चोर कहते हुए ..बिल जमा करने की बात कही और कहा कि यह बिल भरोगे तभी तुम्हारा कनेक्शन जोड़ा जाएगा, यह बात आज, उपभोक्ता रमाकांत दुबे ने मीडिया को बताई। और आगे कहां की मैं 8-9 हजार महीने वेतन पाने वाला व्यक्ति, 23 युनिट की जगह 1023 यूनिट का बिजली बिल कैसे भरूं और क्यों दुं।

आगे रमाकांत दुबे ने यह भी कहा कि हमारे इसी काशीराम कॉलोनी में बहुत से उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके बिजली के कनेक्शन मेन लाइन से काट कर, मीटर के पीछे से, बिजली विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की मिली-भगत और रिश्वत की लेन-देन की जुगाड़ से उनके घरों में बिजली पहुंचाई जा रही है और मनमानी मात्रा में बिजली का उपयोग कर सरकार को चुना लगाया जा रहा है। और हम इमानदार उपभोक्ता अपने अधिकारों को खोकर, अपनी कीमती समय बर्बाद करते हुए दर-दर की ठोकरें खाने को परेशान रहते हैं और उल्टे मुझे ही बिजली विभाग के जेई द्वारा चोर कहा जाता है।

युं माने तो, बिजली विभाग की ऐसी लापरवाही की घटना कोई पहली घटना नहीं है ऐसे बहुत से उपभोक्ता सुधार करवाने के नाम पर बिजली दफ्तर का चक्कर काटते रहते हैं और कई बार थक हार कर सिस्टम और सरकार को कोसते हुए अपने नुकसान की भरपाई स्वयं सहन कर चुपचाप शांत हो जाते हैं।

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