गरीबों के सर पर छत नही, अमीरों के लिए 700 करोंड़ के गोल्फ कोर्स

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नोएडा नोएडा प्राधिकरण ने लोगों के सुझाव मांगे है, 700 करोड़ की लागत से बनने वाली गोल्फ कोर्स का क्या नाम होना चाहिए। नोएडा प्राधिकरण के सीओ श्रीमी रितु महेश्वरी ने अपने टवीटर हैण्डल से इस टवीट को किया है और लोगों से सलाह मांगे कि अमीरों के लिए बनने वाली इस गोल्फ कोर्स का क्या नाम दे। खैर अच्छा है गरीबों के लिए किसी सोसायटी के नाम मांगे गये होते तो हम लोग भी कुछ सलाह दे देते लेकिन यह तो अमीरों के लिए है इसका नाम तो कुछ इंग्लिश मे ही होना चाहिए। अच्छा है कि सलाह देने का मौका नही मिला नही तो हम तो लोग देहाती आदमी कुछ देशभक्ति मे आकर शहीद भगत के नाम दे देते।

चलिये अब आगे बात करते है 700 करोंड़ के इस गोल्फ कोर्स के बारे मे जो अमीरों के लिए है। जाहिर सी बात है कि इस में क्लब मेंबरसिप भी होंगे। वो भी इतना जितना हम लोग कमा नही पाते है महीने मे , शायद साल कि बात करे तो हो सकता है। भले ही देश के वितमंत्री कहे कि 6 लाख कमाने वाला मिडिल क्लास है लेकिन संभवत: उनकों नही पता कि 50 हजार तक पहुँचते-पहुँचते उम्र गुजर जाते है।

आपकों बता दे कि यह जो 700 करोड़ की गोल्फ कोर्स है यह नोएडा सेक्टर 151A में बनायी जानी है जिसके लिए नाम चाहिए। अच्छी बात है कि जनता से सलाह मांगी गयी है और आम जनता को आगे बढ़कर नाम देना चाहिए। राईज एनजीओ वाले पता नही क्यों गरीबों के मुद्दा को उठा लेते है। पत्र लिखते रहते है भले कोई जबाब न मिले। कही गरीबों के सस्ते मकानों को लेकर तो कभी भ्रष्ट्राचार को लेकर।

राईज एनजीओ (Right initiative Empowerment) यही नाम है शायद संस्था की जो बार-बार सवाल उठाते रहते है। सर आप सिर्फ सलाह दीजिए, सवाल मत उठाईये। गरीबों के लिए सस्ते मकान नही बने तो क्या हुआ अमीरों के लिए बनने वाली गोल्फ कोर्स के नाम दीजिए। शहर मे बड़े लोग है उनकों गोल्फ कोर्स की जरूरत है आप गरीबों के सिर छिपाने वाली सस्ती मकानों की बाते करने लगे।

तो उठाईये अपना कलम और लिख डालिये 10 नाम । नाम अच्छा होना चाहिए। इंग्लिश मे होना चाहिए। लेबर मजदूर और गरीबों के बात करने के बजाय अच्छा नाम रखने मे नोएडा प्राधिकरण की मदद कीजिए। गरीब लोगों की बात मत कीजिए। अच्छा हुआ कि लोग पहले ही गाँव चले गये वरना अमीरों की इस शहर मे गरीबों की क्या काम है।

2 लाख मकान किसके लिए बनाने है जब सभी गरीब लोग शहर से पलायन कर गये है। जो बचे है वो पहले कि तरह ही कही किसी गाँव मे किराये पर रह लेगा। 1976 बनी इस नोएडा मे राष्ट्रीय आवास नीति की क्या जरूरत है। चलिये अब कलम रख दीजिए और सीओ मैडम के टवीटर हैण्डल पर अच्छा सा नाम बता दीजिए। जब कभी हम भी इसके पास से गुजरेंगे तो देखकर अच्छा लगेगा और याद भी आयेंगे की 700 करोड़ की लागत वाली गोल्फ कोर्स यही है। सेक्युरिटी गार्ड अन्दर तो जाने नही देगा लेकिन बाहर से ही देखकर मन को तसल्ली कर लेंगे।

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