हार की जीत का नवीन संस्करण

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-राजेश बैरागी-
कहा जा सकता है कि बंगाल के लोग किसी को धोखा नहीं देते और बंगाल के लोगों को कोई धोखा नहीं दे सकता।2021 में ममता बनर्जी को अगले पांच वर्षों के लिए फिर सत्ता सौंपने वाले बंगालियों ने भाजपा को भी कुछ कम नहीं दिया है। उसकी सीटें तीन से तीस गुना हो गई हैं और वोट प्रतिशत पांच गुना हो गया है।

लंबे राजनीतिक व्यापार के निहितार्थ भाजपा की यह उपलब्धि बिल्कुल छोटी नहीं है। ममता बनर्जी के लिए सत्ता संभालने का यह तीसरा मौका ज्यादा जिम्मेदारी भरा होगा।दो तिहाई बहुमत से पुनः सरकार बनाने वाली दीदी को परिवारवाद के आरोपों से ईमानदारी से बचना होगा। इसके साथ ही उन्हें वर्ग विशेष के तुष्टिकरण की नीति का त्याग भी करना होगा, जैसा उन्होंने मजबूरीवश इस चुनाव में किया।

भाजपा इस चुनाव की बदौलत बंगाल में अपना मजबूत आधार बनाने में सफल रही है।वह बंगाल में हारी नहीं है बल्कि ममता बनर्जी ने पुनः बंगाल जीत लिया है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए बंगाल चुनाव का स्पष्ट संदेश यही है कि उन्हें राजनेता होने के अलावा भाग्य विधाता होने का मुगालता नहीं पालना चाहिए।शेष चार चुनावी राज्यों क्रमशः असम, केरल, पुडुचेरी व तमिलनाडु में अपेक्षित नतीजे ही प्राप्त हुए हैं।देश में कोरोना की तेज रफ्तार जारी है। लिहाजा केंद्र और राज्य सरकारों को चुनावी खुमार से बाहर आकर आम नागरिकों की जान की परवाह करनी चाहिए। राजधर्म का यही तकाजा है।(नेक दृष्टि हिंदी साप्ताहिक नौएडा)

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