न कोई छोटा , न बड़ा

4 months ago Vatan Ki Awaz 0
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न कोई छोटा , न बड़ा

 

वर्धमान नगर मे एक सेठ दतिल रहता था , जो गांव का मुखिया भी था । दंतिल समाजसेवी और अच्छे स्वभाव का व्यक्ति था । उसे मुखिया एवं गरिबो से बड़ी हमदर्दी थी । यही कारण था कि वह राजा और जनता दोनो की नजरो मे अच्छा माना जाता था ।
राजा का हित करने वाला जनता मे हित नही माना जाता और जनता का पक्षपात करने वाले को राजा लोग अच्छा नही मानतें । इस प्रकार राजा और प्रजा के बिच मे कोई कोई व्यक्ति ही अपने आप को दोनो की नजरो मे अच्छा सिध्द कर पाता है ।

इस प्रकार कुच्छ समय बितने पर दतिल का विवाह हुआ उस खुशि के अवशर पर उसने राजा और उसके परिवार को भी निमंत्रण भेज कर आमंत्रित कीया । विवाह के पश्चात उसने राजा को परिवार सहित घर मे बुलाकर भौज करवाया उस अवसर पर आए वे राजग्रुह की सफाई करने वाले गोरव नामक एक नौकर को अनुचित स्थान पर बैठने के कारण धंका देकर निकाल दिया ।
कई रातो तक बेचारा यही सोचता रहा कि मे अपने अपमान का बदला सेठ और राजा से कैसे चुकाऊ इस शरीर को सुखाने से क्या लाभ मुझे तो जितनी जल्दी हो सके तो उनसे बदला लेना होगा । किसी ने ठिक ही कहा है –
जो किसी का कुछ बिगार सकने मे अस्मर्थ हो वह निर्लज्ज मनुष्य को क्यो कोध करता है ।
क्या उछल कुद करके कोई चना भार को फोड़ सकता है ? एक रात राजा पलंग पर लेटे हुऐ थे वह गोरव वहा सफाई कर रहा था अपने आप बोलने लगा

अरे उस दतिंल की यह मजाल की वह रानी का आलिंगन करे । राजा जो उस समय पलंग पर लेटा हुआ था गोरंव के मुह से यह शब्द सुनकर उठकर बैठ गया और गोरंव से पुछने लगा
अरे गोरंव क्या जो कुछ तु कह रहा है यह ठिक है ?
राजन वास्तव मे बात यह है की रात भर मे भजन करता रहा जिसके कारण निंद पुरी नही हुई।
अब सफाई करते करते मेरी आँख लग गई । मुझे नही पता की मे क्या कुछ कह गया राजा को यह पता था की यह ही एक नौकर है जो खुले आम मेरे महलो मे आता जाता है . उसी प्रकार दंतिल भी आ जाता है । इसने जो रानी का आंलिगन करने की बात कही है । यह किसी हद तक ठिक हो सकती है झुठ नही ।
प्राणी दिन मे जो चाहता (सोचता ) देखता अथवा करता है , वही नींद मे बड़बड़ाया करता है और जो भी अच्छी बुरी बात मनुष्य के दिल मे रहती है , वह निंद या नशे के हालत मे अपने आप ही बाहर आ जाती है । और रह गई स्त्रियो की बात , इनके दिल की गहराई मेँ झांकना बड़ा कठिन है ।
लकड़ी से आग की , नदियों से सागर की ,पुरुषो से स्त्रियो की , कभी भी तूप्ति नही होती ।
जो मुर्ख पुरुष यह समझता है कि यह मेरी स्त्री मुझसे प्रेम करती है , वह उसके फंदे मे सदा पक्षी की भांति फंसा रहता है ।
पुरुषो के व्दारा न चाहे जाने पर परिवार वालो के भय से मर्यादा मे न रहने वाली औरते के लिए भी अगम्य नही ,

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