ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा एक दिन में सबसे अधिक 1000 मीट्रिक टन से ज्यादा ऑक्सीजन सहायता पहुंचाई गई

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ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा एक दिन में सबसे अधिक 1000 मीट्रिक टन से ज्यादा ऑक्सीजन सहायता पहुंचाई गई

13 राज्यों को 11030 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सहायता पहुंचाई गई

महाराष्ट्र में 521 मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश में लगभग 2858 मीट्रिक टन, मध्य प्रदेश में 476 मीट्रिक टन, हरियाणा में 1427 मीट्रिक टन, तेलंगाना में 565 मीट्रिक टन, राजस्थान में 40 मीट्रिक टन, कर्नाटक में 480 मीट्रिक टन, उत्तराखंड में 200 मीट्रिक टन, तमिलनाडु में 350 मीट्रिक टन, पंजाब में 81 मीट्रिक टन, केरल में 118 मीट्रिक टन और दिल्ली में लगभग 3794 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचाई गई

भारतीय रेल सभी बाधाओं को पार करते हुए तथा नए समाधान निकाल कर देश के विभिन्न राज्यों में तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाना जारी रखे हुए है। भारतीय रेल द्वारा अभी तक देश के विभिन्न राज्यों में 675 से अधिक टैंकरों में 11030 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन(एलएमओ) पहुंचाई गई है।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस पिछले कुछ दिनों से रोजाना लगभग 800 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन पहुंचा रही है।  

ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने ऑक्सीजन पहुंचाने का काम 23 दिन पहले 24 अप्रैल को प्रारंभ किया था और उस दिन महाराष्ट्र को 126 मीट्रिक टन एलएमओ पहुंचाई गई थी।

24 दिनों से कुछ अधिक समय में भारतीय रेल ने ऑक्सीजन पहुंचाने का काम बढ़ा कर 13 राज्यों को 11030 एमटी मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी की है। 
 

पूरे देश से जटिल परिचालन मार्ग नियोजन परिदृश्य में भारतीय रेल ने पश्चिम में हापा तथा मुंदड़ा, पूर्व में राउरकेला, दुर्गापुर, टाटा नगर, अंगुल से ऑक्सीजन लेकर उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश को ऑक्सीजन की डिलीवरी की है। 

ऑक्सीजन सहायता तेज गति से पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ऑक्सीजन एक्सप्रेस माल गाड़ी चलाने में नए और बेमिसाल मानक स्थापित कर रही है। लंबी दूरी के अधिकतर मामलों में माल गाड़ी की औसत गति 55 किलोमीटर से अधिक रही है। उच्च प्रथमिकता के ग्रीन कॉरिडोर में आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मंडलों के परिचालन दल अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं ताकि तेज संभव समय में ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। विभिन्न सेक्शनों में कर्मियों के बदलाव के लिए तकनीकी ठहराव (स्टॉपेज) को घटाकर 1 मिनट कर दिया गया है।

रेल मार्गों को खुला रखा गया है और उच्च सतर्कता बरती जा रही है ताकि ऑक्सीजन एक्सप्रेस समय पर पहुंच सकें।

यह सभी काम इस तरह किया जा रहा है कि अन्य माल ढ़ुलाई परिचालन में कमी नहीं आए।  

यह ध्यान देने योग्य बात है कि 175 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियों की यात्रा पूरी हो चुकी है जिससे विभिन्न राज्यों को राहत पहुंचाई गई है।   
 

भारतीय रेलवे का यह प्रयास रहा है कि ऑक्सीजन का अनुरोध करने वाले राज्यों को कम से कम संभव समय में अधिक से अधिक संभव ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके।
 

खबर लिखे जाने तक महाराष्ट्र में 521 मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश में लगभग 2858 मीट्रिक टन, मध्य प्रदेश में 476 मीट्रिक टन, हरियाणा में 1427 मीट्रिक टन, तेलंगाना में 565 मीट्रिक टन, राजस्थान में 40 मीट्रिक टन, कर्नाटक में 480 मीट्रिक टन, उत्तराखंड में 200 मीट्रिक टन, तमिलनाडु में 350 मीट्रिक टन, पंजाब में 81 मीट्रिक टन, केरल में 118 मीट्रिक टन और दिल्ली में लगभग 3794 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचाई गई है।
 

नई ऑक्सीजन लेकर जाना बहुत ही गतिशील कार्य है और आंकड़े हर समय बदलते रहते हैं। देर रात ऑक्सीजन से भरी और अधिक ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियां यात्रा प्रारंभ करेंगी।

रेलवे ने ऑक्सीजन सप्लाई स्थानों के साथ विभिन्न मार्गों की मैपिंग की है और राज्यों की बढ़ती हुई आवश्यकता के अनुसार अपने को तैयार ऱखा है। भारतीय रेल को एलएमओ लाने के लिए टैंकर राज्य प्रदान करते हैं।

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