“मेहबूबा” को सता रही है सता की डर

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वतन की आवाज 03-अगस्त 2019

कहते है सता सबको है प्यारी । आखिर कौन चाहता है कि उसके आना वाले पीढी कमा कर खाये? “सता ” जिसके हाथ मे है वो छोड़ना नही चाहता है , जिसके हाथ मे नही है वो हर हाल मे उसे पा लेना चाहता है। ऐसे मे दोनों की हालात कैसा होगा यह आप भली भाँती समझ सकते है , जब उनको पता चले की उनके खोने पाने दोनो के ही उम्मीद पर पानी फिरने वाला है।

आज कल कश्मीर को लेकर कुछ ऐसा ही माहौल देश मे बना हुआ है । केन्द्र सरकार लगातार कश्मीर मे सैनिक तथा अर्ध सैनिक बल के टुकड़िया भेज रही है । पिछले महीने से अभी तक 35 हजार जवान अतिरिक्त भेजे जा चुके है। पूरी कश्मीर को छावनी मे बदलने की तैयारी है ऐसा लगता है। देश के सेक्यूलर नेता के पेट दर्द हो रहे है। हर तरफ आशंका का माहौल है, पता नही सरकार क्या करने वाली है। ऐसे सरकार भी तो निर्णायक ही है जो करता है वो करता है और जो नही करता है उसका जिक्र तक नही करता है।

कश्मीर मे बढ़ते सैनिक बल को देख चारों तरफ बैचैनी सी छा रही है। कही मेहबूबा को रात की नींद उड़ रही है , तो कही फारुक अब्दूल्ला की बल्डप्रेशर बढने तथा डिप्रेशन की शिकायत सामने आने लगी है । इतने बैचेन की सरकारी अधिकारी से बार बार पुछने पहुँच जाते है की ये तो बताओं कश्मीर मे क्या होने वाला है। आज तो राज्यपाल के पास भी पहुँच गये फारुक जी।

सबसे अधिक परेशानी बेचारी मेहबूबा जी को हो रही है, जिसे अपने जीते जी सता की सेज खिसकते दिखने लगी है। सता जिसे वो अपना सबकुछ समझती है। शायद किसी ने ये नही बताया होगा मोहतरमा को की सता किसी के अपना रियासत नही होते है। संसार मे जन्म देने वाली माँ, पालन करने वाला पिता एवं शिक्षा देने वाला गुरु भी साथ नही देता है। सबसे परम मेहबूब जो की मेहबूबा के लिए सबकुछ न्योछावर करना चाहता है वो भी बीच रास्ते मे साथ छोड़ देता है। फिर ये सता की मोह कैसा यह तो वो सता है जिसे आप और आपके पूर्वजों ने लोगों को वेवकूफ बनाकर हासिल किया है।

भारत के खर्चे पर पलने वाले जेहादी कैसे हो सकता है ?

यहाँ आपको ज्ञात कराना चाहता हुँ की देश भर मे जितने भी सहायता राशी जारी कि जाती है , उसका 10 प्रतिशत सिर्फ कश्मीर के 1 प्रतिशत आबादी के लिए आवंटित किया जाता रहा है। यह पैसा उन हिन्दू भाईयों से टैक्स के रूप मे वसूला जाता है ,जिसको मारने के लिए कश्मीर मे जेहादी पैदा किया जाता है। भारत सरकार चाहे तो इस 10 प्रतिशत को खर्च कर वहाँ हमेशा के लिए सैनिक की छावनी बना सकती है। आखिर काफिर की पैसा खाने के बाद कोई जेहादी कैसे बन सकता है । क्या बनता है वो यहाँ नही लिखा जा सकता है क्योंकि यह मार्यादा से बाहर की शब्द है।

सेना नायक विपिन रावत की ब्यान क्या सच होने वाला है ?

सेना नायक श्री विपिन रावत जी का ब्यान जो पिछले कुछ दिन पहले ही आया था की “हमे तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर चाहिये” । क्या केन्द्र सरकार इसी मामले मे निर्णायक कदम उठाने जा रही है। क्या इसे धारा 370 तथा 35A की विदाई होने वाली है । जिससे कश्मीरी नेताओं को इतना परेशानी हो रहे है। जिस तरह से अमरनाथ यात्रियों को वापस बुला लिया गया है। इससे तो लगता है कि जल्द ही भारत सरकार कश्मीर की सारे समस्या हल करने के लिए कदम उठाने जा रही है।

 

रमन झा की कलम से 

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