Maha Shivratri 2020: व्रत रखें या नहीं प्रेगनेंसी में किन बातों का रखें ध्‍यान डॉक्‍टर से जानें

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Maha Shivratri 2020, Health Tips: महाशिवरात्रि 2020 का पर्व 21 फरवरी शुक्रवार को मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि का त्योहार भारत में बेहद ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव (Lord Shiva) के भक्त सुबह जल्दी उठते स्नान करने के बाद मंदिर में जाकर शिवलिंग पर दूध, जल, दही, फल और फूल चढ़ाकर अपने ईष्ट (Puja Vidhi) को प्रसन्न करते हैं.

महाशिवरात्रि 2020 का पर्व 21 फरवरी शुक्रवार को मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि का त्योहार भारत में बेहद ही उत्साह के साथ मनाया जाता है.

इस दिन भगवान शिव (Lord Shiva) के भक्त सुबह जल्दी उठते स्नान करने के बाद मंदिर में जाकर शिवलिंग पर दूध, जल, दही, फल और फूल चढ़ाकर अपने ईष्ट (Puja Vidhi) को प्रसन्न करते हैं. काफी लोग शिवरात्रि का उपवास (Maha Shivratri 2020) भी करते हैं, वहीं कुछ लोग निर्जला व्रत (Nirjala Vrat) भी रखते हैं.

व्रत रखते समय काफी लोगों के मन यह सवाल होता है कि हम क्या खाएं और क्या नहीं, आपके इन्हीं सब सवालों का जवाब इस आर्टिकल में आपको मिलेगा. खासकर गर्भवत‍ी महिलाओं के लिए. गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए वह समय है जिसका वह एक एक पल जीना चाहती है.

इस दौरान वह कई बार परेशानियों से तो कई बार खुशियों से रुबरु होती है. क्योंकि गर्भावस्था नौ महीने का लंबा समय लेती है, तो यह भी लाजमी है कि इस दौरान हिंदू धर्म के कई बड़े त्योहर पड़ जाएं. इन सभी त्योहारों पर आमतौर पर महिलाएं व्रत रखती हैं.

लेकिन उस समय व्रत को लेकर अक्सर दुविधा पैदा हो जाती है जब आपके अंदर एक दूसरी जान सांस ले रही हो. उस समय अक्सर यही दूविधा होती है कि व्रत रखा जाए या नहीं.

एक ओर जहां घर की बड़ी औरतें यह सलाह देती हैं कि दोपहर तक व्रत रखने के बाद उसे खाले लें या ऐसा ही कुछ करें तो वहीं दूसरी ओर डॉक्टर व्रत न करने की हिदायत देती हैं.

अब सवाल यह उठता है कि गर्भवती महिलाएं भी उपवास करें या नहीं? यह असल में एक बड़ा सवाल है. डाक्टर्स के मुताबित व्रत या उपवास के दौरान अच्छा-बुरा प्रभाव महज मां पर ही नहीं बच्चे पर भी होता है.

यही वजह है कि इस नौ महीने के दौरान सेहत और खान-पान का पूरा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है.

अब लौट कर आते हैं अपने सवाल पर कि क्या प्रेगनेंसी के दौरान व्रत या उपवास करना चाहिए या नहीं… तो इसका जवाब काफी हद तक आपके शरीर पर निर्भर करता है, क्योंकि जब आप अंदर से अच्छा महसूस कर रही हैं, तब उपवास रखने में कोई परेशानी नहीं है.

लेकिन कुछ मामलों जैसे शरीर में खून की कमी, कमजोरी, उच्च रक्तचाप या फिर गर्भकालीन मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज) में चिकित्सक गर्भवती महिला को उपवास रखने की सलाह नहीं देते हैं, क्योंकि इससे न केवल आपको बल्कि आपके गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान हो सकता है.

एक नजर इस बात पर कि अगर गर्भवती महिला को व्रत या उपवास से क्या समस्या हो सकती है. डॉक्टर के मुताबिक प्रेगनेंसी की पहली और तीसरी तिमाही में व्रत नहीं रखना चाहिए. पहले तीन महीनों में अक्सर नॉजिया की समस्या होती है. यह भूखे रहने पर और बढ़ सकती है.

तो वहीं तीसरी तिमाही में ऐसा करने से चक्कर का खतरा रहता है. और मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज) खून की कमी (एनीमिया) या गर्भ में एक से अधिक बच्चा होने पर तो यह और भी खतरनाक साबित हो सकता है.

अगर सबकुछ ठीक है और आप व्रत रखना चाहती हैं तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. ये बातें क्या हैं हम आपको बताते हैं-

  1. इस दौरान कभी भी निर्जल न रहें. अगर आपको व्रत करना ही है तो पानी का त्याग न करें. पानी आपके और बच्चे के लिए बहुत जरूरी है.
  2. किसी भी हाल में आप निर्जला उपावस से दूर रहें. उपवास के दौरान नारियल पानी, दूध व जूस जैसे पेय पदार्थ लें. फल, सब्जी, जूस से शरीर में पानी की जरूरत भी पूरी होती है और पोषक तत्व भी मिल जाते हैं.
  3. इस बात का खास ध्यान रखें कि आप खाली पेट चाय या कॉफी का सेवन न करें. यह गैस बना कर आपको परेशानी दे सकता है.
  4. व्रत तोड़ने के दौरान शुरू में एक ग्लास जूस या नारियल पानी पीएं. इसके बाद कुछ हल्का खाना खाएं.
  5. व्रत के दौरान गर्भ में भ्रूण की हलचल पर नजर रखें और समय-समय पर चिकित्सीय जांच कराती रहें.
  6. अगर किसी तरह की समस्या है, फिर तो यह बेहद अहम है कि आप अपने चिकित्सक की सलाह लें और वह जैसा कहें, वैसा ही करें. अगर चिकित्सक उपवास करने से मना नहीं करते हैं तब भी खानपान का ध्यान रखें, नियमित परामर्श जैसी सामान्य चीजों का ध्यान रखकर आप व्रत में रह सकती हैं. त्योहार का मजा उठाइए, पर सेहत को सर्वोपरि रखते हुए.
  7. गर्भवती महिलाओं के लिए व्रत पर निर्णय लेना हमेशा उधेड़बुन भरा रहता है, जहां परंपराओं को पूरा करना होता है, वहीं स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी महत्वपूर्ण होता है. मेरी सलाह है कि अगर आप स्वस्थ हैं, तो व्रत रखिए और सबसे जरूरी बात कि अपने चिकित्सक के ‘हां’ कहने पर ही उपवास रखें.
  8. धार्मिक प्रवृत्ति की किसी भी महिला के लिए व्रत की काफी अहमियत है.
  9. कई महिलाएं गर्भधारण में भी उपवास रखने का फैसला करती हैं. करवा चौथ, तीज, शिवरात्रि जैसे त्योहार नौ महीने की गर्भावस्था के बीच पड़ते रहते हैं, ऐसे में गर्भावस्था के दौरान उपवास किया जाए या नहीं, इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है.
  10. इस बारे में कई शोध किए गए हैं. इसके बावजूद यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि उपवास करना आपके और गर्भस्थ शिशु के लिए सुरक्षित रहेगा. कुछ शोध रिपोर्ट में उपवास का बच्चे पर कोई असर न पड़ने की बात कही गई है, तो कुछ में कहा गया है कि जो मांएं उपवास करती हैं, उनके गर्भ से जन्मे बच्चे को आगे चलकर कई तरह की शारीरिक कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है.
    कुल मिलाकर अगर गर्भावस्था में पहले से कोई मुश्किल नहीं है, तो उपवास से कोई खास असर नहीं पड़ता. बस, आपको थोड़ा अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है.
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