चंद्रग्रहण 2020 का दुसरा जानें चंद्र ग्रहण से जुड़े कुछ खास पौराणिक बाते

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5 जून 2020 को चंद्र ग्रहण लगने वाला है. इससे पहले जनवरी में साल का पहला चंद्रग्रहण पड़ा था. हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर चंद्रग्रहण लगेगा. यह चंद्रग्रहण उपछाया ग्रहण होगा. ग्रहण 5 जून की रात 11 बजकर 15 मिनट से लगना आरंभ हो जाएगा जो अगले दिन रात के 2 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. ग्रहण के समय चंद्रमा वृश्चिक राशि में भ्रमण करेगा. हिंदू धर्म में ग्रहण से जुड़े कई मिथक और अंधविश्वास प्रचलित है. सूर्य ग्रहण और या चंद्र ग्रहण दोनों को लेकर हिंदू धर्म में कई अंधविश्‍वास हैं. हिंदू धर्म में ग्रहण को राहुकेतु नामक दो दैत्‍यों की कहानी से जोड़ा जाता है और इसके साथ ही कई अंधविश्‍वास भी इससे जुड़ जाते हैं. आज हम आपको आसे ही कुछ अंधविश्वास और मिथकों के बारे में बताने जा रहे हैं.


दुनिया भर में लोग मानते हैं कि सूर्य या चंद्र ग्रहण के दौरान, सूर्य या चंद्रमा को पौराणिक जानवरों या राक्षसों ने खा लिया था. उन दानवों का पीछा करने के लिए, लोग चंद्र घ्रहण के दिन बर्तन पीटते हैं और शो मचाते हैं


अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले मूल हूपा और लिइसेनो ट्राइब्स यह मानते हैं कि ग्रहण के दौरान चांद जख्मी या बीमार हो जाता है. ग्रहण के बाद चांद को उपचार की जरूरत होती है. ये उपचार चांद की पत्नी या आदिवासी लोग करते हैं. इसी क्रम में लुइसेनो आदिवासी काले पड़े चुके चांद को देखते हुए उसके स्वस्थ होने की कामना में गीत गाते हैं.


ऐसा माना जाता था कि चंद्र ग्रहण के दौरान, मजबूत पराबैंगनी किरणों का उत्सर्जन होता है और पानी से पकाया जाने वाला भोजन, जो उत्सर्जन को आकर्षित करता है, जहरीला हो जाता है. इसलिए लोग आमतौर पर ग्रहण के दौरान पका हुआ खाना नहीं खाते क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा.


कई मान्यताओं के अनुसार चांद का कनेक्शन हमारे शरीर से भी होता है. माना जाता है कि चांद की परिक्रमा हमेशा शरीर पर असर डालती है. लेकिन खगोलीय दृष्‍ट‍ि में हमारा शरीर सूक्ष्‍म होता है, इसलिए यह बदलाव न्‍यून रहता है और हम इसे महसूस नहीं कर पाते.
ग्रहण को देखने के लिए, हर किसी सनग्लास पहनने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान नग्न आंखों से देखना सुरक्षित नहीं है. ऐसे में चश्मा पहनकर देखना अधिक सुरक्षित माना जाता है. वैज्ञानिक भी ऐसा मानते हैं कि सूर्य ग्रहण के विपरीत यह हानिकारक साबित हो सकता है.


चंद्रमा को उर्वरता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है. कई मान्यताओं के अनुसार, यह उन महिलाओं के लिए सबसे अच्छा समय होता है जो इस दौरान गर्भवती होने के लिए ओवुलेशन महीने में है.


चंद्र ग्रहण के साथ ही चांद धरती के काफी करीब होता है और साथ ही इसका गुरुत्‍वाकर्षण भी तेज होता है. माना जाता है कि चांद और हमारे शरीर के बीच कनेक्शन होता है. चंद्र ग्रहण के समय महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल चेंज आ सकते हैं.


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण नहीं देखना चाहिए. क्योंकि इससे शिशु पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है.

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